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ओ पहाड़, मेरे पहाड़!

हमारे पहाड़ों में एक चिड़िया होती है जिसका नाम है घुघूती, इसका जिक्र अक्सर किसी ना किसी गीत में सुनने को मिल ही जाता है। बरसों पहले की बात है, ऐसी ही एक घुघूती ने एक दिन अपने पंख फैलाये, मुँह में बासुती का एक तिनका दबाया और उड़ चली मैदानों की ओर एक नई [...]

[ More ] November 25th, 2008 | 16 Comments | Posted in Reader's/Guest Column |

पहाड़ी गीतः म्यर पहाड़

आज एक ऐसे पहाड़ी गीत के बारे में बात करते हैं और सुनते हैं जिसे किसी प्रोफेशनल गायक ने नही गाया। बल्कि ये गीत उस नौजवान पीढ़ी का नतीजा है जो नाम के बजाय काम के प्रति समर्पित है। म्यर पहाड़ पर लिखे अपने आलेख में मैने जिक्र किया था पहाड़ के नौजवानों का जिन्हें [...]

हाँ वही ‘देबिया’

मेरे ब्लोग उत्तरांचल की एक पोस्ट ‘म्यार पहाड़‘ में कल देवेन्द्र कुमार पांडे के नाम से एक टिप्पणी आयी। ऐसी टिप्पणियाँ कभी कभी ही आती हैं और इस तरह की टिप्पणी का सही सम्मान उसको पोस्ट की शक्ल देना ही है। ये पढ़िये म्यार पहाड़ की कहानी देबिया की जुबानी – मैं याने देवकीनंदन पांडे [...]

[ More ] October 8th, 2008 | 29 Comments | Posted in Reader's/Guest Column |

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2

पिथौरागढ़ का इतिहास पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो। फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या [...]

[ More ] March 10th, 2008 | 24 Comments | Posted in इतिहास, कुमाऊँ |

पहाड़ी गीतः कैले बाजे मुरूली

अगर आपने शाहिद और करीना कपूर अभिनीत फिल्म का “ये इश्क हाय, बैठे बैठाये ” सुना होगा तो शायद गौर किया हो (या ना किया हो) कि इस गीत के शुरू में एक पहाड़ी धुन बजती है। वो पहाड़ी धुन कॉपी है कुमाँऊ क्षेत्र के मशहूर गायक गोपाल बाबू के गाये सुप्रसिद्ध कुमाँऊनी गीत “कैले [...]

लिटिल चैंपियनः वसुंधरा रतूड़ी

जी टीवी में चलने वाले सा रे गा मा पा लिटिल चैंपियन में उत्तरांचल से बिलोंग करने वाली वसुंधरा रतूड‌ी ने अभी पिछले एपिसोड में गढ‌वाली गाने की कुछ लाईनें गुनगुनायी। इस लिटिल चैंपियन के बारे में फिर कभी, फिलहाल आप ये दो विडियो देखिये लिटिल वन को गाते हुए। दूसरे विडियो के अंत में [...]

लोकगीतः हाय तेरी रूमाला

आज सुनिये एक बहुत ही प्रसिद्ध कुमाऊंनी लोकगीत, गोपाल बाबू गोस्वामी की आवाज में। कुछ अन्य गीतों की ही तरह इसमें भी नायिका की खुबसूरती की तारीफ की गयी है। गाने की शुरूआत में ही तारीफ करते हुए कहा है कि तेरे इस गुलाबी चेहरे में नाक में लगी नथुली (नाक में पहने जाने वाला [...]

ट्रैकिंगः पिंडारी, सुन्दरढूंगा और कफनी ग्लेशियर

किसी शायर ने बहुत पहले कहा था, ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ’। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजाय बस, कार या हवाई जहाज के अपनी ग्यारह नंबर की गाड‌ी से खूबसुरत नजारों के मजे लूटें जायें। नजारे भी ऐसे कि देखते ही मन कहे काश वक्त यहीं थम जाये। अगर [...]

Valley of Flowers | फूलों की घाटी

उत्तरांचल, जहाँ एक तरफ बर्फ से ढकी ऊँची ऊँची चोटियां हैं वहीं दूसरी तरफ खुबसूरत वादियां, एक तरफ हैं सीढ़ीनुमा हरियाली समेटे खेत दूसरी तरफ गहरी गहरी घाटियां। लेकिन इन गहरी गहरी घाटियों के साथ एक ऐसी घाटी भी है जो अपने दामन में तरह तरह के फूलों को समेटे हुए है। ये घाटी फूलों [...]

लोकगीतः ठंडो रे ठंडो और ठंडो पानी गीत

वैसे तो ये गीतों की बारी नही थी, लेकिन थोड़ा व्यस्त रहने के कारण जो लेख शुरू किया था वो पूरा नही कर पा रहा हूँ, इसलिये तब तक आप ये दो लोकगीत सुनिये। पहला है “पी जाओ पी जाओ मेर पहाड़ को” गोपाल बाबू गोस्वामीजी की आवाज में (कुमाँउनी बोली में) और दूसरा है [...]

विडियोः बबली तेरो मोबाइल

आज आपको दिखा रहे है सुपरहिट गीत बबली तेरो मोबाइल का विडियो इस गीत पर होने वाली टिप्पणियों के सैकड़ा पार करने की खुशी में । इस गीत के दो वर्जन हैं, पहला वाला तो जो ओरिजिनली फिल्माया गया। दूसरा वाला जो शादी ब्याहों में बैकग्राउंड में बजता है और फोरग्राउंड में शादी में आये [...]

म्यार पहाड़

अगर मेरा गांव मेरा देश हो सकता है तो म्यार पहाड़ क्यों नही? म्यार पहाड़ यानि मेरा पहाड़ लेकिन ऐसा कहने से ये सिर्फ मेरा होकर नही रह जाता ये तो सब का है वैसे ही जैसे मेरा भारत हर भारतवासी का भारत। खैर पहाड़ को आज दो अलग अलग दृष्टि से देखने की कोशिश [...]

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