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पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 3

पिछले अंक – भाग १, भाग २ पिथौरागढ़ के मौसम को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है – दिसम्बर से मार्च तक जाडा़, अप्रैल से जून तक गर्मी, जुलाई से सितम्बर तक मानसून यानि बरसात और सितम्बर से नवम्बर जिसे कई जगह पतझड़ भी कहा जाता है। इसी दौरान शुरू होता है गुलाबी जाड़ा। [...]

होली के रंग गीत और मस्ती के संग

वैसे तो होली आने वाली है लेकिन हमने अभी पिछले शनिवार एक बार तो होली मना ही ली है। इस बार पहली बार यहाँ अमेरिका में हमें भी बैठकी होली में बैठकर होली मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बचपन की सारी यादें ताजा हो गयी, थोड़ा अफसोस रहेगा कि खड़ी होली का मजा नही ले [...]

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2

पिथौरागढ़ का इतिहास पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो। फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या [...]

[ More ] March 10th, 2008 | 24 Comments | Posted in इतिहास, कुमाऊँ |

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है

पिथौरागढ़, यानि प्रकृति की गोद में बसा उत्तरांचल (उत्तराखंड) राज्य का एक बेहद रमणीक शहर, वो शहर जो मिनी काश्मीर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग १० वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली सोर घाटी में बसा ये शहर, चंडाक, ध्वज, थल केदार और कुंदर पहाड़ियों के मध्य घिरा हुआ है। कैमरे में कैद करने [...]

[ More ] March 3rd, 2008 | 18 Comments | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

पहाड़ी गीतः न्यु न्यु ब्यो छो

Valentine Day Special आज 14 फरवरी है जिसे वैंलेनटाईन दिवस के रूप में भी मनाया जाता है [वैलेनटाईन का इतिहास वैलेनटाईन का व्यवसायिकरण] तो सोचा क्यों ना इस प्यार भरे दिवस (वैसे तो हर दिन प्यार भरा होना चाहिये लेकिन इस दिन खासकर युवाओं को ये प्रेम प्यार का कीड़ा कुछ ज्यादा ही जोर से [...]

कुमाऊँनी लोक नृत्यः छोलिया

कुमाँऊ के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में एक है छोलिया नृत्य जिसका इतिहास लगभग १००० साल पुराना है। इस नृत्य का उदय खसिया राज्य के वक्त माना जाता है जब विवाह तलवारों की नोक पर हुआ करते थे। खस शायद छत्रिय शब्द का अपभ्रंश हो क्योंकि इनके ज्यादातर रिति रिवाज राजपूतों के रिवाजों से काफी मिलते [...]

पहाड़ी गीतः कैले बाजे मुरूली

अगर आपने शाहिद और करीना कपूर अभिनीत फिल्म का “ये इश्क हाय, बैठे बैठाये ” सुना होगा तो शायद गौर किया हो (या ना किया हो) कि इस गीत के शुरू में एक पहाड़ी धुन बजती है। वो पहाड़ी धुन कॉपी है कुमाँऊ क्षेत्र के मशहूर गायक गोपाल बाबू के गाये सुप्रसिद्ध कुमाँऊनी गीत “कैले [...]

शैलेश मटियानी :लिखना एक आहट पैदा करना है

शैलेश मटियानी को हमारे बीच से गये हुए छह साल पूरे हो चुके हैं। लगता है जैसे कल की बात हो। तमाम संघर्षो तथा दु:श्चिंताओं के बावजूद आखिरी समय तक जैसा कि वे लेखन के बारे में कहा करते थे,” कागज पर खेती” करते रहे। उनकी कहानियों पर टिप्पणी करते हुए राजेंद्र यादव ने स्वीकार [...]

[ More ] January 23rd, 2008 | 8 Comments | Posted in व्यक्तिव, साहित्य |

लिटिल चैंपः वसुंधरा रतूड़ी – २

पिछली पोस्ट में मैने इस लिटिल गर्ल की कुछ गाते हुए झलकियाँ दिखायी थी, अब अगर आप इस आवाज के लिये वोट देने की सोच रहे हैं तो ये रहा तरीका कि आप कैसे इसके लिये वोट कर सकते हैं, आप इंटरनेट से भी वोट कर सकते हैं। जानने के लिये यहाँ क्लिक करिये

विडियोः नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच जुगलबंदी – भाग २

आज मजे लीजिये गीत और कविताओं से सजी नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच हुई जुगलबंदी का दूसरा भाग, ये जुगलबंदी उत्तराखंड के इन दो जबरदस्त कलाकारों के बीच विगत दिनों अमेरिका के न्यु जर्सी प्रान्त में हुई थी। इस जुगलबंदी का संचालन कर रहे थे डा. शेखर पाठक जी। जुगलबंदी के पहले भाग [...]

चक दे मैन मीर रंजन नेगी के साथ रजनीश की बातचीत

[अब तक तो शायद काफी लोग जान गये होंगे कि 'चक दे इंडिया' में शाहरूख वाला रोल पूर्व हाकी कोच मीर रंजन नेगी को लेकर लिखा गया था। उत्तराखंड समुदाय के सक्रीय मेम्बर रजनीश ने उनके साथ बातचीत करी। ये बातचीत यहाँ आप लोगों के लिये पेश है। इससे पहले ये क्रियेटिव उत्तराखंड की साईट [...]

[ More ] October 24th, 2007 | 8 Comments | Posted in उप्लब्धि, व्यक्तिव |

विडियोः नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच जुगलबंदी

आज मजे लीजिये इस गीत और कविताओं से सजी इस जुगलबंदी का, ये जुगलबंदी उत्तराखंड के दो जबरदस्त कलाकारों के बीच विगत दिनों अमेरिका के न्यु जर्सी प्रान्त में हुई थी। जी हाँ ये दो कलाकार हैं – नरेन्द्र सिंह नेगी जी और गिरीश तिवारी ‘गिरदा’ के बीच। इस जुगलबंदी का संचालन कर रहे थे [...]