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कुमाऊँनी कवि शेरदा अनपढ़ का कविता पाठ

क्या आप जानते हैं ग्राम सभा, विधान सभा और लोक सभा किसे कहते हैं? अगर नही तो इस पोस्ट को जरूर पढ़िये। शेरदा अनपढ़ कुमाऊँ क्षेत्र के बहुत प्रसिद्ध कवि हैं, इनकी दो कवितायें (O Parua Boju and, Mat Maro Mohana Pichkari) मैंने आपको पहले सुनवायी थी। आज यू-ट्यूब में घूमते घूमते कुछ और मिल [...]

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – ४

पिथौरागढ़ पर पिछला अंक लिखे जमाना हो गया शायद भूल गये हों बात कहाँ से शुरू करके अंत में कहाँ छोड़ी थी। आज मैं बता रहा हूँ पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जाये और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों के बारे में। पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जायेः यहाँ या तो टैक्सी से पहुँचा जा सकता है या बस [...]

[ More ] January 18th, 2010 | 1 Comment | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

कुमाँऊनी होली: गीत-संगीत और रंगों का त्‍यौहार

[Whenever holi comes it take me down to memory lane, way back when I was kid. Most of the best holi I ever had when I was a kid and all those holi I celebrated in my native place (Uttaranchal/Uttarakhand). It’s unique because the Kumaoni Holi lies in being a musical affair, whether it’s the [...]

मकर संक्रान्तिः घुघुतिया और मेले ही मेले

जनवरी माह में उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति, दक्षिण में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर में उत्तराखंड में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है, कुमाँऊ में अगर आप मकर संक्रान्ति में चले जायें तो आपको शायद कुछ ये सुनायी पड़ जाय – काले कौव्वा, खाले, [...]

पहाड़ी गीतः पहाड़ छूटी ग्यो

अपनों से बिछड़ने की व्यथा (यानि Home Sickness) को व्यक्त करता है ये गीत। एक पहाड़ी नौकरी की तलाश में पहाड़ छोड़ कर परदेश (यानि मैदानी इलाके या फिर दूसरे देश) चला जाता है। उसके बाद उसे याद आती है घर की सब बातें, उस पहाड़ की बातें जहाँ देवताओं का धाम है, घर छोड़ते [...]

ओ पहाड़, मेरे पहाड़!

हमारे पहाड़ों में एक चिड़िया होती है जिसका नाम है घुघूती, इसका जिक्र अक्सर किसी ना किसी गीत में सुनने को मिल ही जाता है। बरसों पहले की बात है, ऐसी ही एक घुघूती ने एक दिन अपने पंख फैलाये, मुँह में बासुती का एक तिनका दबाया और उड़ चली मैदानों की ओर एक नई [...]

[ More ] November 25th, 2008 | 16 Comments | Posted in Reader's/Guest Column |

उत्तराखंड सांस्कृतिक कार्यक्रम: रंग बिरंगो कौथिक

15 नवम्बर 2008, को नई दिल्ली में आयोजन होने जा रहा है उत्तराखंड के लोक गीतों का सांस्कृतिक कार्यक्रम – रंग बिरंगो कौथिक। उत्तराखंड दिवस के उपलक्ष्य में उत्तराखंड जन जागृति संघ के सौजन्य से आयोजित होने वाला ये प्रोग्राम शनिवार 15 नवम्बर दोपहर 3 बजे से शुरू होगा। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले [...]

[ More ] November 7th, 2008 | 9 Comments | Posted in Announcement |

पहाड़ी गीतः म्यर पहाड़

आज एक ऐसे पहाड़ी गीत के बारे में बात करते हैं और सुनते हैं जिसे किसी प्रोफेशनल गायक ने नही गाया। बल्कि ये गीत उस नौजवान पीढ़ी का नतीजा है जो नाम के बजाय काम के प्रति समर्पित है। म्यर पहाड़ पर लिखे अपने आलेख में मैने जिक्र किया था पहाड़ के नौजवानों का जिन्हें [...]

हाँ वही ‘देबिया’

मेरे ब्लोग उत्तरांचल की एक पोस्ट ‘म्यार पहाड़‘ में कल देवेन्द्र कुमार पांडे के नाम से एक टिप्पणी आयी। ऐसी टिप्पणियाँ कभी कभी ही आती हैं और इस तरह की टिप्पणी का सही सम्मान उसको पोस्ट की शक्ल देना ही है। ये पढ़िये म्यार पहाड़ की कहानी देबिया की जुबानी – मैं याने देवकीनंदन पांडे [...]

[ More ] October 8th, 2008 | 29 Comments | Posted in Reader's/Guest Column |

कनाडा में एक गीतों भरी शाम नरेन्द्र नेगी जी के साथ

स्कारबोरो टोरन्टो कैनाडा में वहां की संस्था उत्तराखन्ड कल्चरल एशोसियेशन ने 2 अगस्त 2008 को उतराखन्ड के इस सदी के महान गढ़वाली बोली के गायक नरेन्द्र सिह नेगी जी के साथ गीतों भरी सांझ का आयोजन किया । इस सुर सम्राट को सुनने कैनाडा के प्रत्येक शहर से, जिनमे मौंट्रियाल से सुधीर रावत जी, नेगी [...]

[ More ] August 7th, 2008 | 18 Comments | Posted in Uttarakhand News |

Interview: गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ के साथ बातचीत – 2

गड़वाली सिनेमा के २५ साल पूरे होने पर हमने जा पकड़ा, पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी कहती फिल्म “गौरा” और पहली गढ़वाली फिल्म “जग्वाल” के निर्माता पराशर गौढ़ को, और उनके साथ करी एक लंबी बातचीत। आज से उसी बातचीत का सिलसिला यहाँ शुरू कर रहे हैं। पिछली पोस्ट के साथ हमने पराशर गौढ़ [...]

[ More ] July 1st, 2008 | 4 Comments | Posted in व्यक्तिव, सिनेमा |

Interview: गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ के साथ बातचीत

गड़वाली सिनेमा के २५ साल पूरे होने पर हमने जा पकड़ा, पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी कहती फिल्म “गौरा” और पहली गढ़वाली फिल्म “जग्वाल” के निर्माता पराशर गौढ़ को, और उनके साथ करी एक लंबी बातचीत। आज से उसी बातचीत का सिलसिला यहाँ शुरू कर रहे हैं। “मुश्किल नही है कुछ भी अगर ठान [...]

[ More ] June 26th, 2008 | 24 Comments | Posted in व्यक्तिव, सिनेमा |