पहाड़ी गीतः कैले बाजे मुरूली
Posted by on January 27, 2008
अगर आपने शाहिद और करीना कपूर अभिनीत फिल्म का “ये इश्क हाय, बैठे बैठाये ” सुना होगा तो शायद गौर किया हो (या ना किया हो) कि इस गीत के शुरू में एक पहाड़ी धुन बजती है। वो पहाड़ी धुन कॉपी है कुमाँऊ क्षेत्र के मशहूर गायक गोपाल बाबू के गाये सुप्रसिद्ध कुमाँऊनी गीत “कैले बाजे मुरूली” की।
अगर आपने ये गीत पहले कभी नही सुना है तो आज हम आपको यही गीत सुना रहे हैं। ये गीत एक पहाड़ी औरत अपने पति को याद करते हुए गाती है- कैले बाजे मुरूली इइइ बैणा, ऊँची ऊँची डान्यू (डांडो) मा।
इस गीत का कुछ सारांश इस तरह से है, ये ऊँचे-ऊँचे पहाड़ों पर मुरली की तान किसने छेड़ दी है जो मेरे कलेजे को चीर रही है, मेरा मन उदास हो जाता है ये सुनकर। इस पापी मुरली की आवाज सुनकर मेरा हृदय भर उठता है और मेरा मन उदास होने लगता है क्योंकि मेरे पति फौज की नौकरी करने के लिये दूर लद्दाख में (परदेस) गये हैं। हे मेरे मायके की भगवती तू मुझ पर दया करना और मेरे पति को सकुशल घर वापस ले आना, फिर हम तेरे मंदिर आयेंगे।
पहले जब वी मैट के गीत ये इश्क हाय के इस छोटे से अंश में इस धुन को सुनिये (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
और उसके बाद ये रहा ओरिजिनल गीत (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।


