पहाड़ी गीतः पहाड़ छूटी ग्यो
Posted by on January 2, 2009
अपनों से बिछड़ने की व्यथा (यानि Home Sickness) को व्यक्त करता है ये गीत। एक पहाड़ी नौकरी की तलाश में पहाड़ छोड़ कर परदेश (यानि मैदानी इलाके या फिर दूसरे देश) चला जाता है। उसके बाद उसे याद आती है घर की सब बातें, उस पहाड़ की बातें जहाँ देवताओं का धाम है, घर छोड़ते वक्त माँ की आँखों में आये आँसू, याद आते हैं दादी, दादा, पिता, भाई और बहिन, याद आते हैं सावन भादो के महीनों में होने वाले मेले।
सुनिये ये मधुर गीत:
उत्तरांचल के सभी पाठकों को नये साल की बहुत बहुत शुभकामनायें।
डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।


