< Browse > Home /

| Mobile | RSS

  

कुमाँऊनी गीतः रंगीली चंगीली पुतई कैसी

मुझे एक ईमेल/टिप्पणी आयी जिसने मुझे नींद से जगाने का बिल्कुल वैसा ही काम किया जैसा काम इस गीत का नायक नायिका को जगाने के लिये चाय से करवाना चाह रहा है। अगर आपकी शादी हो गयी हो तो शायद आपने भी कभी कोशिश की हो अपनी श्रीमति को जगाने की। शायद श्रीमति की शान [...]

[ More ] August 25th, 2009 | Comments Off | Posted in कुमाऊँनी संगीत, गीत और संगीत |

पहाड़ी गीतः अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरे गे

गोपाल बाबू गोस्वामी जी की आवाज में सुनिये ये मधुर और प्रसिद्ध कुमाऊँनी गीत। ये गीत एक पति द्वारा अपनी पत्नी दुर्गा के लिये गाया गया है। ये दोनों पति और पत्नी पग डंडियों पर मस्त होकर छेड़ छाड़ करते हुए द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती के मेले में घूमने के लिये जा रहे हैं लेकिन [...]

पहाड़ी गीतः स्वर्गतारा जुनली रात

इस गीत के बारे में पहली बार मैंने यहाँ अमेरिका में एक पहाड़ी गेट-टुगेदर में सुना था और वहीं सुना भी जब कुछ लोगों ने मिलकर गाया। अभी इंडिया गया था तो मुझे वहाँ ये गीत मिल गया लेकिन इस गीत से जुड़े कलाकारों का नही मालूम। अगर किसी को मालूम हो तो जरूर बतायें। [...]