लोकगीतः ठंडो रे ठंडो और ठंडो पानी गीत
Posted by on June 21, 2007
वैसे तो ये गीतों की बारी नही थी, लेकिन थोड़ा व्यस्त रहने के कारण जो लेख शुरू किया था वो पूरा नही कर पा रहा हूँ, इसलिये तब तक आप ये दो लोकगीत सुनिये। पहला है “पी जाओ पी जाओ मेर पहाड़ को” गोपाल बाबू गोस्वामीजी की आवाज में (कुमाँउनी बोली में) और दूसरा है “ठंडो रे ठंडो” नरेन्द्र सिंह नेगीजी की आवाज में (गढ़वाली बोली में)।
पी जाओ पी जाओः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
ठंडो रे ठंडोः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।


