लोकगीत: घुघुती ना बासा
Posted by on August 20, 2006
घुघुती एक चिडिया का नाम है जो आम के पेड़ में बैठ के गीत गाती है, ये गीत एक स्त्री द्धारा अपने पति की विरह की भावनाओं को व्यक्त करता है, जिसका पति लदाख में तैनात है। गीत के बोल पढ़ कर समझिये और फिर गाने का मजा लीजिये।
घुघुती ना बासा, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा
घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा।
तेर घुरु घुरू सुनी मै लागू उदासा
स्वामी मेरो परदेसा, बर्फीलो लदाखा, घुघुती ना बासा
घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा।
रीतू आगी घनी घनी, गर्मी चैते की
याद मुकू भोत ऐगे अपुना पति की, घुघुती ना बासा
घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा।
तेर जैस मै ले हुनो, उड़ी बेर ज्यूनो
स्वामी की मुखडी के मैं जी भरी देखुनो, घुघुती ना बासा
घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा।
उडी जा ओ घुघुती, नेह जा लदाखा
हल मेर बते दिये, मेरा स्वामी पासा, घुघुती ना बासा
घुघुती ना बासा ssss, आमे कि डाई मा घुघुती ना बासा।
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डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।


