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जाड़ों की नर्म धूप और …

दुनिया के इस कोने से उस कोने तक मौसम की ऊठापटक जारी है और ऐसे ही इस साल के जाड़ों में हर सप्ताह पड़ने वाली बर्फवारी के बीच एक सुबह की खिली खिली धूप ने याद दिलायी, इस गीत की – दिल ढूँढता, है फिर वो ही, फुरसत के रात दिन। और इस गीत की [...]

[ More ] January 21st, 2011 | 14 Comments | Posted in Uttarakhand's Life |

कुमाँऊनी होली: गीत-संगीत और रंगों का त्‍यौहार

[Whenever holi comes it take me down to memory lane, way back when I was kid. Most of the best holi I ever had when I was a kid and all those holi I celebrated in my native place (Uttaranchal/Uttarakhand). It’s unique because the Kumaoni Holi lies in being a musical affair, whether it’s the [...]

वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 22 Comments | Posted in Uttarakhand's Life |

अपराध बोध

उत्तरांचल के पहाड़ और उन्हें काटती हुई सर्पनुमा सड़कें और सड़कों के ऊपर नीचे दिखते सीढ़ीनुमा खेत बहुत ही सुन्दर लगते हैं। इन्हीं खेतों के इर्दगिर्द नजर आते हैं छोटे छोटे गाँव, शायद किसी सैलानी का मन ये सब देखकर वहीं बसने का करता भी हो। लेकिन दूर से मनलुभावने वाले ये गाँवों के दृश्य [...]

[ More ] January 4th, 2009 | 11 Comments | Posted in Reader's/Guest Column, Uttarakhand's Life |