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पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – ४

पिथौरागढ़ पर पिछला अंक लिखे जमाना हो गया शायद भूल गये हों बात कहाँ से शुरू करके अंत में कहाँ छोड़ी थी। आज मैं बता रहा हूँ पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जाये और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों के बारे में। पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जायेः यहाँ या तो टैक्सी से पहुँचा जा सकता है या बस [...]

[ More ] January 18th, 2010 | 1 Comment | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 3

पिछले अंक – भाग १, भाग २ पिथौरागढ़ के मौसम को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है – दिसम्बर से मार्च तक जाडा़, अप्रैल से जून तक गर्मी, जुलाई से सितम्बर तक मानसून यानि बरसात और सितम्बर से नवम्बर जिसे कई जगह पतझड़ भी कहा जाता है। इसी दौरान शुरू होता है गुलाबी जाड़ा। [...]

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2

पिथौरागढ़ का इतिहास पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो। फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या [...]

[ More ] March 10th, 2008 | 24 Comments | Posted in इतिहास, कुमाऊँ |

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है

पिथौरागढ़, यानि प्रकृति की गोद में बसा उत्तरांचल (उत्तराखंड) राज्य का एक बेहद रमणीक शहर, वो शहर जो मिनी काश्मीर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग १० वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली सोर घाटी में बसा ये शहर, चंडाक, ध्वज, थल केदार और कुंदर पहाड़ियों के मध्य घिरा हुआ है। कैमरे में कैद करने [...]

[ More ] March 3rd, 2008 | 18 Comments | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

लिटिल चैंपियनः वसुंधरा रतूड़ी

जी टीवी में चलने वाले सा रे गा मा पा लिटिल चैंपियन में उत्तरांचल से बिलोंग करने वाली वसुंधरा रतूड‌ी ने अभी पिछले एपिसोड में गढ‌वाली गाने की कुछ लाईनें गुनगुनायी। इस लिटिल चैंपियन के बारे में फिर कभी, फिलहाल आप ये दो विडियो देखिये लिटिल वन को गाते हुए। दूसरे विडियो के अंत में [...]

विडियोः उत्तराखंड गाथा और नरेन्द्र सिंह नेगी लाइव – भाग 2

आज पेश है इस कड़ी का दूसरा भाग, अगर आपने ओम पर्वत और कैलाश देखना है तो इस विडियो को जरूर देखिये। एक पर्वत के ऊपर बर्फ से बनता है ओम, इसी से इसका नाम भी पड़ता है ओम पर्वत। उत्तराखंड गाथा अभी अगले भाग में भी जारी रहेगी। भाग १ देखने के लिये यहाँ [...]

ट्रैकिंगः पिंडारी, सुन्दरढूंगा और कफनी ग्लेशियर

किसी शायर ने बहुत पहले कहा था, ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ’। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजाय बस, कार या हवाई जहाज के अपनी ग्यारह नंबर की गाड‌ी से खूबसुरत नजारों के मजे लूटें जायें। नजारे भी ऐसे कि देखते ही मन कहे काश वक्त यहीं थम जाये। अगर [...]

Valley of Flowers | फूलों की घाटी

उत्तरांचल, जहाँ एक तरफ बर्फ से ढकी ऊँची ऊँची चोटियां हैं वहीं दूसरी तरफ खुबसूरत वादियां, एक तरफ हैं सीढ़ीनुमा हरियाली समेटे खेत दूसरी तरफ गहरी गहरी घाटियां। लेकिन इन गहरी गहरी घाटियों के साथ एक ऐसी घाटी भी है जो अपने दामन में तरह तरह के फूलों को समेटे हुए है। ये घाटी फूलों [...]

म्यार पहाड़

अगर मेरा गांव मेरा देश हो सकता है तो म्यार पहाड़ क्यों नही? म्यार पहाड़ यानि मेरा पहाड़ लेकिन ऐसा कहने से ये सिर्फ मेरा होकर नही रह जाता ये तो सब का है वैसे ही जैसे मेरा भारत हर भारतवासी का भारत। खैर पहाड़ को आज दो अलग अलग दृष्टि से देखने की कोशिश [...]

होली मुबारक साथ में जानिये कुमाऊंनी होली

उत्तरांचल पढने वाले सभी पाठकों को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें और उन सभी उत्तरांचली बंधुओं को बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने टिप्पणी के द्वारा होली की शुभकामनायें सभी के लिये दीं। आप सब की ये होली रंगों भरी और मस्ती भरी रहे। पिछली होली में मैंने एक आलेख कुमाउंनी होली के ऊपर लिखा था अगर [...]

[ More ] March 1st, 2007 | 12 Comments | Posted in कुमाऊँ, त्‍यौहार |

जल समाधि एक शहर की

हर व्‍यक्‍ति की जिंदगी में कुछ ना कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्‍हें वो अक्‍सर याद करता रहता है। किसी ना किसी शहर की कोई ना कोई गली ताउम्र याद रहती है क्‍योंकि उसमें कहीं उसका बचपन और बचपन की यादें दफन रहती हैं। और वो शहर तो सभी को याद रहता है जिस शहर [...]

अल्‍मोड़ा

प्रकृति के मनोहारी द्रश्‍यों से भरपूर उत्तरांचल का एक खुबसूरत जिला अल्‍मोड़ा, सुन्‍दर पहाड़, घने जंगल, खुबसूरत वादियां, साफ सुथरी झीलें, कल-कल करती नदियाँ, पुरातन सांस्‍कृतिक प्रभाव यही सब अल्‍मोड़ा को भारत का स्‍वीटजरलैण्‍ड कहे जाने के लिये विवश करता है। यहाँ से हिमालय का शानदार द्रश्‍य बड़ा ही मनोहारी दिखायी देता है, अगर हिमालय [...]

[ More ] February 19th, 2006 | 31 Comments | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |