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कुमाऊँनी कवि शेरदा अनपढ़ का कविता पाठ

क्या आप जानते हैं ग्राम सभा, विधान सभा और लोक सभा किसे कहते हैं? अगर नही तो इस पोस्ट को जरूर पढ़िये। शेरदा अनपढ़ कुमाऊँ क्षेत्र के बहुत प्रसिद्ध कवि हैं, इनकी दो कवितायें (O Parua Boju and, Mat Maro Mohana Pichkari) मैंने आपको पहले सुनवायी थी। आज यू-ट्यूब में घूमते घूमते कुछ और मिल [...]

कुमाँऊनी गीतः रंगीली चंगीली पुतई कैसी

मुझे एक ईमेल/टिप्पणी आयी जिसने मुझे नींद से जगाने का बिल्कुल वैसा ही काम किया जैसा काम इस गीत का नायक नायिका को जगाने के लिये चाय से करवाना चाह रहा है। अगर आपकी शादी हो गयी हो तो शायद आपने भी कभी कोशिश की हो अपनी श्रीमति को जगाने की। शायद श्रीमति की शान [...]

[ More ] August 25th, 2009 | Comments Off | Posted in कुमाऊँनी संगीत, गीत और संगीत |

कुमाऊँनी लोकगीतः ओ भिणा कसके जाणूँ द्वरहटा

कुमाँऊ का ये एक बहुत प्रसिद्ध लोकगीत है, मुझे याद है बचपन में स्कूल में हमने इस पर डांस भी किया था। ये गीत जीजा साली के बीच हो रहे संवादों से बना है। रानीखेत से आगे एक जगह पड़ती है द्वाराहाट, जहाँ हर साल मेला लगता है (पहले लगता था इसलिये कह सकता हूँ [...]

कुमाँऊनी होली: गीत-संगीत और रंगों का त्‍यौहार

[Whenever holi comes it take me down to memory lane, way back when I was kid. Most of the best holi I ever had when I was a kid and all those holi I celebrated in my native place (Uttaranchal/Uttarakhand). It’s unique because the Kumaoni Holi lies in being a musical affair, whether it’s the [...]

पहाड़ी गीतः अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरे गे

गोपाल बाबू गोस्वामी जी की आवाज में सुनिये ये मधुर और प्रसिद्ध कुमाऊँनी गीत। ये गीत एक पति द्वारा अपनी पत्नी दुर्गा के लिये गाया गया है। ये दोनों पति और पत्नी पग डंडियों पर मस्त होकर छेड़ छाड़ करते हुए द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती के मेले में घूमने के लिये जा रहे हैं लेकिन [...]

पहाड़ी गीतः स्वर्गतारा जुनली रात

इस गीत के बारे में पहली बार मैंने यहाँ अमेरिका में एक पहाड़ी गेट-टुगेदर में सुना था और वहीं सुना भी जब कुछ लोगों ने मिलकर गाया। अभी इंडिया गया था तो मुझे वहाँ ये गीत मिल गया लेकिन इस गीत से जुड़े कलाकारों का नही मालूम। अगर किसी को मालूम हो तो जरूर बतायें। [...]

पहाड़ी गीतः पहाड़ छूटी ग्यो

अपनों से बिछड़ने की व्यथा (यानि Home Sickness) को व्यक्त करता है ये गीत। एक पहाड़ी नौकरी की तलाश में पहाड़ छोड़ कर परदेश (यानि मैदानी इलाके या फिर दूसरे देश) चला जाता है। उसके बाद उसे याद आती है घर की सब बातें, उस पहाड़ की बातें जहाँ देवताओं का धाम है, घर छोड़ते [...]

पहाड़ी गीतः म्यर पहाड़

आज एक ऐसे पहाड़ी गीत के बारे में बात करते हैं और सुनते हैं जिसे किसी प्रोफेशनल गायक ने नही गाया। बल्कि ये गीत उस नौजवान पीढ़ी का नतीजा है जो नाम के बजाय काम के प्रति समर्पित है। म्यर पहाड़ पर लिखे अपने आलेख में मैने जिक्र किया था पहाड़ के नौजवानों का जिन्हें [...]

होली के रंग गीत और मस्ती के संग

वैसे तो होली आने वाली है लेकिन हमने अभी पिछले शनिवार एक बार तो होली मना ही ली है। इस बार पहली बार यहाँ अमेरिका में हमें भी बैठकी होली में बैठकर होली मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बचपन की सारी यादें ताजा हो गयी, थोड़ा अफसोस रहेगा कि खड़ी होली का मजा नही ले [...]

पहाड़ी गीतः कैले बाजे मुरूली

अगर आपने शाहिद और करीना कपूर अभिनीत फिल्म का “ये इश्क हाय, बैठे बैठाये ” सुना होगा तो शायद गौर किया हो (या ना किया हो) कि इस गीत के शुरू में एक पहाड़ी धुन बजती है। वो पहाड़ी धुन कॉपी है कुमाँऊ क्षेत्र के मशहूर गायक गोपाल बाबू के गाये सुप्रसिद्ध कुमाँऊनी गीत “कैले [...]

विडियोः नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच जुगलबंदी – भाग २

आज मजे लीजिये गीत और कविताओं से सजी नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच हुई जुगलबंदी का दूसरा भाग, ये जुगलबंदी उत्तराखंड के इन दो जबरदस्त कलाकारों के बीच विगत दिनों अमेरिका के न्यु जर्सी प्रान्त में हुई थी। इस जुगलबंदी का संचालन कर रहे थे डा. शेखर पाठक जी। जुगलबंदी के पहले भाग [...]

विडियोः नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरदा के बीच जुगलबंदी

आज मजे लीजिये इस गीत और कविताओं से सजी इस जुगलबंदी का, ये जुगलबंदी उत्तराखंड के दो जबरदस्त कलाकारों के बीच विगत दिनों अमेरिका के न्यु जर्सी प्रान्त में हुई थी। जी हाँ ये दो कलाकार हैं – नरेन्द्र सिंह नेगी जी और गिरीश तिवारी ‘गिरदा’ के बीच। इस जुगलबंदी का संचालन कर रहे थे [...]

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