पहाड़ी गीतः म्यर पहाड़
Posted by on October 29, 2008
आज एक ऐसे पहाड़ी गीत के बारे में बात करते हैं और सुनते हैं जिसे किसी प्रोफेशनल गायक ने नही गाया। बल्कि ये गीत उस नौजवान पीढ़ी का नतीजा है जो नाम के बजाय काम के प्रति समर्पित है। म्यर पहाड़ पर लिखे अपने आलेख में मैने जिक्र किया था पहाड़ के नौजवानों का जिन्हें नौकरी और अच्छी पढ़ाई की खातिर पहाड़ छोड़ना पड़ जाता है। उन्हीं में से कई युवाओं ने अलग-अलग ग्रुप बनायें हुए हैं जो पहाड़ की बेहतरी के लिये अपने-अपने स्तर पर कुछ कार्य कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है क्रियेटिव उत्तराखंड म्यर पहाड़, इन्होंने अपने आपको २ मुख्य डोमेन में बाँटा हुआ है, जिनमें से एक है g-troupe।
जिसका मकसद उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को बरकरार रखने का है और इस दिशा में ये लोग समय समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम करते रहते हैं।
इन्हीं लोगों ने मिलकर निकाला पहाड़ी गीतों का एक एलबम - म्यर पहाड़। इस एलबम की एक विशेषता ये है कि इसमें किसी का भी नाम नही दिया गया है, ना उनका जिन्होंने गीत लिखे, ना ही उनका जिन्होंने संगीत दिया और ना ही उनका जिन्होंने इन मधुर गीतों को अपने मधुर स्वर दिये। अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य कर रहे है इन लोगों को संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिर्फ शौक भर था। लेकिन इस ऐलबम को सुनने के बाद ये कहीं से भी नही लगता। इस एलबम के बारे में फिर कभी विस्तार से बात करेंगे आज सुनते हैं इसी का टाईटिल गीत - म्यर पहाड़।
हालांकि जैसा मैने पहले कहा इस ऐलबम में कोई नाम नही है लेकिन फिर भी मेरे पास कुछ नाम हैं जो इस ऐलबम से संबन्धित हैं। आज से पहले हो सकता है आपने इस ऐलबम के गीतों को सुना हो लेकिन उन नामों से अनजान हों जिन्होंने इन गीतों को एक पहचान दी हो। यदि आप में से कोई और भी इन नामों को जानता हो और उसे लगे कि कोई नाम छूट गया है तो जरूर बतायें।
म्यर पहाड़ नाम का ये ऐलबम नीचे लिखे लोगों की मेहनत का प्रतिफल है -
गानों के बोल लिखें हैं: दयाल पांडे, शेखर शर्मा, संजू पहाड़ी, दिवेश जोशी
संगीतः दयाल पांडे, शेखर शर्मा, हेम पंत, संजू पहाड़ी, दिवेश जोशी
स्त्री स्वरः कोमल गुप्ता, हिमानी जोशी
पुरूष स्वरः शेखर शर्मा, दयाल पांडे, भुवन गिरी, संजू पहाड़ी, दिवेश जोशी
कोरसः मंजू पांडे, सीमा जोशी, तनुजा अधिकारी, पूजा पांडे, सुनीता कांडपाल, शैलेश त्रिपाठी, सतीश झल्डियाल (या घिल्डियाल), शैलेन्द्र जोशी, अंकित शाह, प्रदीप जोशी, नंदन सिंह, मनोज बिष्ट, हरीश जोशी।
हम तो इनसे यही कहेंगे - ऊ पहाड़ी में कि कुणि, जिया रिया बची रिया, ठुल साहब बण जया और खूब नाम कमाया।
(मुझे ठीक से बोलनी नही आती, इसलिये गलत लिखा है तो उसे अनदेखा ना करें सुधारके टिप्पणी में लिख दें)
ऊंचा डाना बटि, बाटा-घाटा बटि,
ऊंचा ढूंगा बटि, सौवा बोटा बटि,आज ऊंणे छे आवाज,
म्यर पहाड़, म्यर पहाड़।ऊंचा पहाड़ को देखो, डाना हिमाला को देखो,
और देखि लियो, बदरी-केदार
म्यर पहाड़यांको ठंडो छू पांणि, नौवा-छैया कि निशानी,
ठंडी-ठंडी चली छे बयार
म्यर पहाड़जय-जय गंगोतरी, जय-जय यमनोतरी,
जय-जय हो तेरी हरिद्वार
म्यर पहाड़तुतरी रणसिंहा तू सुण
दमुआ नंगारा तू सुणआज सुणिलै तू हुड़के की थाप
म्यर पहाड़, म्यर पहाड़
















