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कुमाऊँनी कवि शेरदा अनपढ़ का कविता पाठ

क्या आप जानते हैं ग्राम सभा, विधान सभा और लोक सभा किसे कहते हैं? अगर नही तो इस पोस्ट को जरूर पढ़िये। शेरदा अनपढ़ कुमाऊँ क्षेत्र के बहुत प्रसिद्ध कवि हैं, इनकी दो कवितायें (O Parua Boju and, Mat Maro Mohana Pichkari) मैंने आपको पहले सुनवायी थी। आज यू-ट्यूब में घूमते घूमते कुछ और मिल [...]

Holi: क्या हम अपनी पारम्परिक होली को फास्ट फारर्वड करते जा रहे हैं?

मेरा ये मानना रहा है कि हमारी संस्कृति को सबसे बड़ा खतरा बाहर के लोगों से नही बल्कि अपनों से होता है। अगर ऐसा नही होता तो काँटा लगा माफिक पुराने गीतों की मिक्सिंग गोरे कर रहे होते लेकिन ये रिमिक्स की अंधी दौड़ अपन लोगों ने ही शुरू की। दरअसल आजकल गीत आडियो के [...]

[ More ] February 26th, 2010 | Comments Off | Posted in गीत और संगीत, त्‍यौहार |

कुमाँऊनी गीतः रंगीली चंगीली पुतई कैसी

मुझे एक ईमेल/टिप्पणी आयी जिसने मुझे नींद से जगाने का बिल्कुल वैसा ही काम किया जैसा काम इस गीत का नायक नायिका को जगाने के लिये चाय से करवाना चाह रहा है। अगर आपकी शादी हो गयी हो तो शायद आपने भी कभी कोशिश की हो अपनी श्रीमति को जगाने की। शायद श्रीमति की शान [...]

[ More ] August 25th, 2009 | Comments Off | Posted in कुमाऊँनी संगीत, गीत और संगीत |

कुमाऊँनी लोकगीतः ओ भिणा कसके जाणूँ द्वरहटा

कुमाँऊ का ये एक बहुत प्रसिद्ध लोकगीत है, मुझे याद है बचपन में स्कूल में हमने इस पर डांस भी किया था। ये गीत जीजा साली के बीच हो रहे संवादों से बना है। रानीखेत से आगे एक जगह पड़ती है द्वाराहाट, जहाँ हर साल मेला लगता है (पहले लगता था इसलिये कह सकता हूँ [...]

पहाड़ी गीतः अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरे गे

गोपाल बाबू गोस्वामी जी की आवाज में सुनिये ये मधुर और प्रसिद्ध कुमाऊँनी गीत। ये गीत एक पति द्वारा अपनी पत्नी दुर्गा के लिये गाया गया है। ये दोनों पति और पत्नी पग डंडियों पर मस्त होकर छेड़ छाड़ करते हुए द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती के मेले में घूमने के लिये जा रहे हैं लेकिन [...]

पहाड़ी गीतः स्वर्गतारा जुनली रात

इस गीत के बारे में पहली बार मैंने यहाँ अमेरिका में एक पहाड़ी गेट-टुगेदर में सुना था और वहीं सुना भी जब कुछ लोगों ने मिलकर गाया। अभी इंडिया गया था तो मुझे वहाँ ये गीत मिल गया लेकिन इस गीत से जुड़े कलाकारों का नही मालूम। अगर किसी को मालूम हो तो जरूर बतायें। [...]

पहाड़ी गीतः पहाड़ छूटी ग्यो

अपनों से बिछड़ने की व्यथा (यानि Home Sickness) को व्यक्त करता है ये गीत। एक पहाड़ी नौकरी की तलाश में पहाड़ छोड़ कर परदेश (यानि मैदानी इलाके या फिर दूसरे देश) चला जाता है। उसके बाद उसे याद आती है घर की सब बातें, उस पहाड़ की बातें जहाँ देवताओं का धाम है, घर छोड़ते [...]

पहाड़ी गीतः म्यर पहाड़

आज एक ऐसे पहाड़ी गीत के बारे में बात करते हैं और सुनते हैं जिसे किसी प्रोफेशनल गायक ने नही गाया। बल्कि ये गीत उस नौजवान पीढ़ी का नतीजा है जो नाम के बजाय काम के प्रति समर्पित है। म्यर पहाड़ पर लिखे अपने आलेख में मैने जिक्र किया था पहाड़ के नौजवानों का जिन्हें [...]

पहाड़ी गीतः हिमला हाउ उनो कोता

इस गीत की सबसे बड़ी मधुरता है इसकी लयबद्दता और संगीत, भाषा समझ ना आये तो भी गीत का आनंद उठाया जा सकता है। लेकिन सबसे पहले गढ़वाल के उस क्षेत्र के बारे में थोड़ा बताता दूँ जहाँ का ये गीत है। गढ़वाल के इस क्षेत्र का नाम है जौनसार रवांई, ये पड़ता है उत्तरकाशी [...]

Interview: गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ के साथ बातचीत – 2

गड़वाली सिनेमा के २५ साल पूरे होने पर हमने जा पकड़ा, पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी कहती फिल्म “गौरा” और पहली गढ़वाली फिल्म “जग्वाल” के निर्माता पराशर गौढ़ को, और उनके साथ करी एक लंबी बातचीत। आज से उसी बातचीत का सिलसिला यहाँ शुरू कर रहे हैं। पिछली पोस्ट के साथ हमने पराशर गौढ़ [...]

[ More ] July 1st, 2008 | 4 Comments | Posted in व्यक्तिव, सिनेमा |

Interview: गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ के साथ बातचीत

गड़वाली सिनेमा के २५ साल पूरे होने पर हमने जा पकड़ा, पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी कहती फिल्म “गौरा” और पहली गढ़वाली फिल्म “जग्वाल” के निर्माता पराशर गौढ़ को, और उनके साथ करी एक लंबी बातचीत। आज से उसी बातचीत का सिलसिला यहाँ शुरू कर रहे हैं। “मुश्किल नही है कुछ भी अगर ठान [...]

[ More ] June 26th, 2008 | 24 Comments | Posted in व्यक्तिव, सिनेमा |

पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी – गढ़वाली फिल्मः गौरा

गढ़वाली सिनेमा की रजत जंयती यानि २५ साल पूरे होने पर गढ़वाली सिनेमा के जनक, पहली गढ़वाली फिल्म ‘जग्वाल’ (४ मई १९८३ को प्रदर्शित) की सौगात देने वाले पराशर गौड़ बतौर निर्माता अब लेकर आये हैं फिल्म ‘गौरा’, यह कनाडा में बसे पराशर गौड़ की दूसरी फिल्म है। रविवार ८ जून को रिलीज हुई यह [...]

[ More ] June 17th, 2008 | 19 Comments | Posted in सिनेमा |