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ट्राईस्टेट उत्तरांचल क्रिकेट २००६

जिस दिन भारत में चैलेंजर ट्राफी की शुरूआत हुई ठीक उसी दिन अमेरिका के न्यूजर्सी प्रान्त में उत्तरांचलियों ने दूसरे ‘ट्राईस्टेट उत्तरांचल क्रिकेट’ का आयोजन किया। उसी दिन सभी ग्रुप मैच खेले गये और शाम तक फाईनल भी निपट गया। ये क्रिकेट भारी टेनिस की गेंद से खेला गया जिसमें सभी लोगों ने बड़े उत्साह [...]

[ More ] October 10th, 2006 | 6 Comments | Posted in मनोरंजन |

कुमाँऊ का संक्षिप्त इतिहास

कुमाँऊ शब्द की उत्पत्ति कुर्मांचल से हुई है जिसका मतलब है कुर्मावतार (भगवान विष्णु का कछुआ रूपी अवतार) की धरती। कुमाँऊ मध्य हिमालय में स्थित है, इसके उत्तर में हिमालय, पूर्व में काली नदी, पश्चिम में गढ‌वाल और दक्षिण में मैदानी भाग। इस क्षेत्र में मुख्यतया ‘कत्यूरी’ और ‘चंद’ राजवंश के वंशजों द्धारा राज्य किया [...]

[ More ] September 4th, 2006 | 62 Comments | Posted in इतिहास |

नाम गुम जायेगा

राज्य बनने से पहले शायद जनता उत्तराखंड के नाम पर ज्यादा सहमत थी, लेकिन नाम मिला उत्तरांचल। अब जब इस नाम की आदत ही नही बल्कि सब जगह इस नाम की इबारत लिखी जा चुकी है सरकार इसका नाम बदल रही है। जी हाँ उत्तरांचल का पुनः नामकरण उत्तराखंड करने पर सहमति हो गई है। [...]

[ More ] August 24th, 2006 | 15 Comments | Posted in सामान्‍य |

लोकगीत: घुघुती ना बासा

घुघुती एक चिड‌िया का नाम है जो आम के पेड‌़ में बैठ के गीत गाती है, ये गीत एक स्त्री द्धारा अपने पति की विरह की भावनाओं को व्यक्त करता है, जिसका पति लदाख में तैनात है। गीत के बोल पढ़ कर समझिये और फिर गाने का मजा लीजिये। घुघुती ना बासा, आमे कि डाई [...]

एक नजर

9 नवम्‍बर 2000 को अस्‍तित्‍व में आया राजधानी – देहरादून कुल क्षेत्र – 52,185 वर्ग किमी. जंगल – 65% जनसंख्‍या – 8,479,562 घनत्‍व/आबादी – 159 लोग/वर्ग किमी. लिंग अनुपात – 964 महिलायें/1000 पुरूष खेती योग्‍य जमीन – 13% साक्षरता – 72.28% पुरूष साक्षरता – 84% महिला साक्षरता – 60.3% कुल गाँव – 15,651 गाँवों में [...]

[ More ] August 20th, 2006 | Comments Off | Posted in जरा हट के |

शिवानी गौरा पंत

हिन्दी साहित्य में शिवानी एक जाना पहचाना नाम है। इन्होनें काफी सारे उपन्यास, कहानियाँ, आलेख और निबन्ध लिखकर हिन्दी साहित्य को अपना योगदान दिया है। इनके लेखन में भावों का सुन्दर चित्रण, भाषा की सादगी तो होती ही थी साथ ही साथ पहाड‌‌‌, वहाँ रहने वाले भोले भाले लोग और वहाँ की संस्कृति का जीता [...]

जल समाधि एक शहर की

हर व्‍यक्‍ति की जिंदगी में कुछ ना कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्‍हें वो अक्‍सर याद करता रहता है। किसी ना किसी शहर की कोई ना कोई गली ताउम्र याद रहती है क्‍योंकि उसमें कहीं उसका बचपन और बचपन की यादें दफन रहती हैं। और वो शहर तो सभी को याद रहता है जिस शहर [...]

कुमांऊनी होली – संगीत और रंगों का त्‍यौहार

फाल्‍गुन के महीने होली का आना अक्‍सर मुझे ले जाता है बहुत पीछे बचपन की उन गलियों में, जहाँ न कोई चिन्‍ता थी और ना ही नौकरी का टेंशन सिर्फ मस्‍ती और हुड़दंग। अपने जीवन की अधिकतर मस्‍त होली मैंने अपने बचपन में ही मनायी और वो भी अपने ‘नेटीव प्‍लेस’ उत्तरांचल में। यहाँ की [...]

[ More ] March 7th, 2006 | 16 Comments | Posted in त्‍यौहार |

टेहरी गढ़वाल का संक्षिप्‍त इतिहास

टिहरी और गढ़वाल दो अलग नामों को मिलाकर इस जिले का नाम रखा गया है। जहाँ टिहरी बना है शब्‍द ‘त्रिहरी’ से, जिसका मतलब है एक ऐसा स्‍थान जो तीन तरह के पाप (जो जन्‍मते है मनसा, वचना, कर्मा से) धो देता है वहीं दूसरा शब्‍द बना है ‘गढ़’ से, जिसका मतलब होता है किला। [...]

[ More ] February 22nd, 2006 | 27 Comments | Posted in इतिहास |

अल्‍मोड़ा

प्रकृति के मनोहारी द्रश्‍यों से भरपूर उत्तरांचल का एक खुबसूरत जिला अल्‍मोड़ा, सुन्‍दर पहाड़, घने जंगल, खुबसूरत वादियां, साफ सुथरी झीलें, कल-कल करती नदियाँ, पुरातन सांस्‍कृतिक प्रभाव यही सब अल्‍मोड़ा को भारत का स्‍वीटजरलैण्‍ड कहे जाने के लिये विवश करता है। यहाँ से हिमालय का शानदार द्रश्‍य बड़ा ही मनोहारी दिखायी देता है, अगर हिमालय [...]

[ More ] February 19th, 2006 | 31 Comments | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

उत्तरांचल

उत्तरांचल यानि देवभूमि, मीलों फैला हिमालय और इस धरती का एक ओर स्‍वर्ग। हर किसी को हर कहीं से लुभाने के लिये लालायित एक रमणीय प्रदेश। स्‍वच्‍छ वायु, निर्मल जल, कँपकँपाती बर्फ, दूर तक फैली हरियाली, विशाल पहाड़, छोटे छोटे गाँव, सीधे-सादे लोग, कड़ी जीवन शैली यही है उत्तरांचल। एक तरफ उत्तरांचल जहाँ प्रकृति प्रेमियों [...]

[ More ] February 18th, 2006 | 7 Comments | Posted in सामान्‍य |