कुमाऊँनी लोकगीतः ओ भिणा कसके जाणूँ द्वरहटा
Posted by on May 27, 2009 Filed under कुमाऊँनी संगीत, गीत और संगीत
कुमाँऊ का ये एक बहुत प्रसिद्ध लोकगीत है, मुझे याद है बचपन में स्कूल में हमने इस पर डांस भी किया था। ये गीत जीजा साली के बीच हो रहे संवादों से बना है। रानीखेत से आगे एक जगह पड़ती है द्वाराहाट, जहाँ हर साल मेला लगता है (पहले लगता था इसलिये कह सकता हूँ कि अब भी लगता होगा) जो पहले बहुत प्रसिद्ध था।
एक जीजा अपनी साली को इसी मेले में चलने के लिये कह रहा है और साली मेले में ना जाने के एक के बाद एक बहाने बना रही है। मसलन साली का बहाना है पहनने के लिये अच्छे कपड़े नही हैं, जीजा का कहना है वहीं द्वराहाट में दर्जी भी होगा तो वहीं सिला लेंगे। फिर साली कहती है नाक में गहना नही है कैसे जा सकते हैं, जीजा उत्तर देता है कि वहाँ सुनार भी है वहीं बना लेंगे। ऐसे ही साली अलग अलग बहाने बनाती जाती है जीजा प्रति उत्तर देता जाता है। और अंत में साली राजी हो जाती है और दोनों कौतिक यानि मेले के लिये चले जाते हैं।
इस गीत को मैं बहुत समय से ढूँढ रहा था और फिर एक दिन बगैर ढूँढे मिल गया, आजकल विस्तार से लिखने वाले लेखों के लिये वक्त नही मिल पा रहा है। उत्तरांचल में कुछ पोस्ट किये मुद्दत हो गयी तो सोचा आज जीजा साली की ये नोकझोंक ही सुना दी जाय। इस गीत में पुरूष स्वर दिया है हिरदा कुमाऊँनी ने महिला स्वर का अगर आप में से किसी को पता हो जरूर बतायें।
डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।
Tags: dwarahat, festivals and local fair, kumaoni-folk-song, pahari geet, uttarakhand-music
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तरुण जी नमस्कार, आप कैसे है,
आपके द्वारा भेजी हुई पोस्ट 27 मई 2009 को मिली, शीर्षक हैं “ओ भीना कासके जानू द्वारहाटा” जो की कुमाओं के प्रसिद्द गीतो मे से एक है इसे सुनकर बहुत अच्छा लगा, तरुण जी आज आप काफ़ी लंबे समय के बाद पोस्ट भेजी, जिसे पाकर बेहद खुशी हुई
मुझे लगा की तरुण जी हमे भूले नही है! समय-समय पर यू ही पोस्ट भेजते रहेंगे यही आशा करता हूँ!
It could not have been better, I have fallen in love with this song
I have fallen in love with this song
daju ke bhalo lagu dekhi bera yea suni bera , man karuch bora bister bandhi bera bat le gauo gher huuni per ke kru
Thanks a lot Tarun for this song….tumnae jab sae ish geet ko load kiya hai tabsae mein bhaut barr ish geet ko sunn chuki hu parr aaj comment likh rahein hu….this song reminds me of my school-college days…..gr8 song….thanks again!!
I LOVE MY UTTRAKHAND I BELONG DISTRICT FORM ALMORA SAKANARA IS MY VILLAGE NEAR PLACE OF MY VILLAGE MANILA I LIKE TO LISTEN GARHWALI AND KUMAONI SONGS VERY MUCH BUT I AM UNABLE OT DOWN LOAD THESE SONGS FROM THISE SITE PLEASE TELL ME ABOUT IT.THANKU
DEVENDRA SING RAWAT
MANILA ALMORA
Very nice song I like this song
I am from Village Manila (Rathkhal), Almora. I love my village very much and would like to do something for its improvement in near future.
dear
daajue mera naam hai mohan chand sharma my village dhura near
shashikhal salt I love in my village. i always listen in uttranchal
lokgeet. i love uttranchal.
I love uttrakhand and namste tarun ji how are you.tarun ji aaj kal aap bahut lambe samy per geet bejte ho hum aapse itna door nahi rah sakte. please aap hume isi tarah ke ache ache lokgeet bheja karo
Thanks
nice song ye gane ne bachpan ki yad dila di ye gana bachpan bhut suna tha oh purane din fir yad agaye
thaks
tarun ji