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वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

January 8th, 2009 | 22 Comments | Posted in Uttarakhand's Life

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब सिर्फ यादों में ही सिमट के रह गये हैं।

इसमें उपयोग में लाये गये कई शब्दों के शाब्दिक अर्थ शायद सबके समझ ना आये क्योंकि वो पहाड़ की संस्कृति से जुड़े हैं, इसलिये ऐसे कुछ शब्दों का अर्थ और भाव गजल के अंत में मैंने दिया है।

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो
भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी
मगर मुझको लौटा दो, भांगे की चटनी
वो सना हुआ नींबू, वो नौले का पानी।

वो आमा के खेतों में चुपके से जाना
वो आड़ू चुराना और फिर भाग आना
वो जोश्ज्यू के घर में अंगूर खाना
वो दाड़िम के दाने से चटनी बनाना
भूलाये नही भूल सकता ‘तरूण’ मैं
वो मासूम सा बचपन और उसकी कहानी।

वो पीतल के गिलास में चाय सुड़काना
वो डूबके, वो कापा और रसभात खाना
वो होली की गुजिया, वो भांग की पकौड़ी
पत्ते में लिपटी वो मीठी सिंगौड़ी
छूटा वो सब पीछे अब यादें बची हैं
ना है अब वो बचपन ना उसकी निशानी।

वो काला सा कौवा और उसको बुलाना
वो डमरू, वो दाड़िम वो तलवार को खाना
फूलदेई में सबके घरों में जाकर
घरों की देली को फूलों से सजाना
बेतरतीब से खुद के कपड़े थे रहते
भीगने को जाते जब बरसता था पानी।

होली में एक घर में चीर को लगाना
वो गुब्बारे, हुलियार और होली का गाना
वो चितई का मंदिर और मोष्टमानो का मेला
ना थी कोई चिंता, ना ही झमेला
ना दुनिया का गम था, ना रिश्तों का बंधन
बड़ी खुबसूरत थी वो जिंदगानी।

हिसालू, काफल और किलमोडी खाना
दिवाली में फूलों की माला बनाना
वो क्रिकेट का खेला जब हों खेत बंजर
बो भुट्टों की फुटबाल, कागज का खंजर
अब है झिझक कुछ करने ना देती
गया अब वो बचपन और ढलती जवानी।

ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो…

कुछ शब्दों के भाव/अर्थ:

नौलाः पानी का प्राकृतिक स्रोत
भांगः ये दरअसल बीज होता है जिसकी बहुत स्वादिष्ट चटनी बनती है, अपने को बहुत प्रिय है
सना हुआ नीबूः जाड़ों के वक्त घर की छतों में धूप में बैठकर बड़ा नीबू, मूली, संतरा, दही, नमक, भांगा वगैरह मिलाकर बनाया जाता है
हुलियारः होली गाने वाले प्रोफेशनल
फूलदेईः पहाड़ों का एक प्रसिद्ध त्यौहार जिसमें बच्चे घर घर जाकर घर की एंट्रेस में फूल और चावल डालते हैं
सिंगौड़ीः अल्मोड़े की प्रसिद्ध स्वादिष्ट मिठाई जो पत्ते में लपेट के दी जाती है
डूबके, कापा, रसभातः पहाड़ी व्यंजन
सुड़कानाः जोर जोर से आवाज करके चाय पीना
दाड़िमः अनार की तरह का ही फल लेकिन छोटे रूप में

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22 Responses to “वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी”

  1. Vineeta Yashswi Says:

    maine yeh aaj hi dekha aur mujhe behad pasan aaya.

    aapne bahut achha kaam kiya hai

  2. kavita rawat Says:

    muje aur bhi garhwali gane wo bhi narender singh negi ji ke muje negi ji ke gane bhut pasand hai. garhwal ki har khubsurti ke bare me batana. mai bhi eak garhwali ladki hu. I am belonge to garhwal. mis to garhwal.

  3. roop kandwal Says:

    muje gajal ko padkar acha laga lekin thora sa bura bhe laga ki hum log dusaro ki nakal karke use convert karke late hain, hum khud he kyun apni rachano ko write karke unhe bheje…so garwal ki boli din parti din reimix hoti ja rahi hai…. jo ki ek bada sochniy dash hoti ja rahi hai….plz sabhi garwali bole ….apne bhasha ka vikash karen… ane wali padi ko bhe apne boli se parchit karyen…so thank …

  4. Rajen Says:

    “अब है झिझक कुछ करने न देती……”

    पहाडों में बिताये मेरे बछपन के दिनों का सजीव वर्णन आपने किया. बहुत खूब तरुण जी बहुत खूब | थैंक यू है आपको.

    “राजेन…” दिल से

  5. dr s b pandey Says:

    bachpanik yad taj hoi gai maharaj thanku

  6. ghughutibasuti Says:

    तरुण जी, क्या क्या यादें हैं ! कुमाँऊ में रहना चाहे कम हुआ फिर भी बचपन इनमें से बहुत सी बातों से रंगा, भीगा गुजरा। बड़े नींबू तो मेरे बचपन के घर में भी होते थे। हमने बचपन चाहे कुमाँऊ में नहीं बिताया परन्तु हिमाचल के पहाड़ हमारे यहाँ ही आकर खत्म होते थे। हम आखिरी पहाड़ी पर थे । सो आड़ू, दाड़िम, बेड़ू, नाशपाती सब बगीचे में खूब होते थे।
    वैसे पाँडे ज्यू ने बिल्कुल सही कहकर सब समेट लिया है।
    घुघूती बासूती

  7. राम दत्त तिवारी- दुबई से Says:

    तरुण जी नमस्कार, नव वर्ष की ढेरो शुभ कामनाए, आपके द्वारा भेजी गयी पोस्ट ” वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी” बहुत पसंद आई, ध्न्यबाद- आशा करता हू भविस्य मे भी इसी तरह भेजते रहेंगे….

  8. Rajesh Joshee Says:

    तरुन जी आपकी बातेंन दिल को छू गयी, नये वर्ष की शुभकामनाओं के साथ धन्यवाद

  9. BASUBABA Says:

    waah kya gajal banai hai sir wo bhange ki chatni wo noule ka paani

    bhange ki chatni yaad aa gayi aapki is gajal se

  10. HEMANT SINGH NAYAL Says:

    HI SIR MY NAME IS HEMANT.I AM SO FAR FROM MY COUNTARY.I Am from almora.i like your bhaga ke chatnin.thanks for this.i am mising my uttranchal.i hope in future also we can listen that song which u will post.
    Thanks and regards
    HEMANT SINGH NAYAL
    DUBAI

  11. kailash.goshwami Says:

    Hi
    Dear iam kailash goshwami ,iam uttarenchali i like it kumaoni loak geet please send me your dawonload websied addres

    Thakyou
    Kailash Goshwami

  12. Naresh Joshi Says:

    Tarun ji, makar sakrani ke upar to note leka hai, usne aaj ke dharmik tehyuhar ke bare main baut jankari melie hai,

    thanks

  13. Bhagwat singh.rawat Says:

    hello hia I am bhagu rawat gajal padkar bhut acha laga
    i like you bus aapse aik se binti aap ise trah gajal bnate rhiye.
    mai diyouna ka hun aap sabhi logo ko namskar w pailag karn chhu
    migi phad bhote yad aacho

  14. Bhagwat singh.rawat Says:

    hello hai i Bhagu rawat. from almora
    i like kumouni lokgeet.

  15. B.S.Bisht Says:

    भई बहुत खूब !
    सीधे दिल पर जा कर लगी, इस गीत के बारे मे जितना कहू कम है

  16. P.C.Dabral Says:

    आपके ब्लाग पर विजिट कर गावँ की सारी यादे ताजा हो गयी। सारा बचपन फिर से याद आ गया । Apna RCM

  17. Duga Parsad Says:

    Hi, Iam in ludhiana, but always feel Iam live in my village. Iam miss my Childhood. My heart always remember Hill secenery, river, mountain, Jangle, Cow & my parents. at this moment Iam thinks for this block.

  18. Poonam Chamoli Says:

    mite garwali gana bahut accha lagda.I like garwali song. maur tarf biti sara uttrakand or sare bharat vasio ko holi ki subkamnae.

  19. surendra singh gusain Says:

    aap sabhi garhwli bhai bahano ko mera hardik namaskar

  20. Rakesh bhatt Says:

    humare uttarakhand ko aap jaise hi logo ki jarurat hai Tarun ji, kya yandey sazo kai rakhi hai aapne, aap jaise logo ki wajah sai hi aaj humara uttarakhand itna aage ho paya hai, thanks, i am from pithoragarh but last 2 years i am in mumbai.

  21. Shankar Bisht (Someshwar) Says:

    Hi Sir,
    It was our beautiful past,
    you have bring these beautiful memories to our hearts.
    thanks for remembering us to our routs.

  22. GIRISH Says:

    sab uttrakhandi logo tai myar taraf bati namaskar. agar kwe myar comment padhnu ch tai mai tai jarur contact karya. me dilli mai ranu aur dilli mai naukari karnu agar kwe mai tai contact karalu mai tai badi khushi hweli. kile ki apad pahad k logu se bat kar ke apad ghar ki yaad aa jandi. myar number ch- 971130735 aur myar email id ch- girishchand47@rediffmail.com

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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