इस गीत की सबसे बड़ी मधुरता है इसकी लयबद्दता और संगीत, भाषा समझ ना आये तो भी गीत का आनंद उठाया जा सकता है। लेकिन सबसे पहले गढ़वाल के उस क्षेत्र के बारे में थोड़ा बताता दूँ जहाँ का ये गीत है।

गढ़वाल के इस क्षेत्र का नाम है जौनसार रवांई, ये पड़ता है उत्तरकाशी जिले में यमनोत्री को जाने वाले रास्ते की तरफ। यानि कि हिमाचल प्रदेश और गढ़वाल के उत्तरकाशी के बीच का क्षेत्र, मुख्य शहरों में आते हैं - बड़कोट, नौगांव और पुरोला।

गीत के भाव और इसके बारे में तो मैं खुद भी कुछ नही बता सकता क्योंकि ये मेरी भी समझ में ठीक से नही आया, लेकिन जितनी बार भी इस गीत को सुना और सुनने का ही मन किया। इसे गाया है नरेन्द्र सिंह नेगी और अनुराधा निराला जी ने।

गीत के इस विडियो में आपको जहाँ पारम्परिक लोक नृत्य की एक झलक मिलेगी वहीं दूसरी ओर सुनने को मिलेंगे लुप्त प्रायः होते लोक संगीत वाध यंत्र। यही नही साथ में देखने को मिलेगें पहाड़ों के पुराने समय के बने घर।


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