गढ़वाली सिनेमा की रजत जंयती यानि २५ साल पूरे होने पर गढ़वाली सिनेमा के जनक, पहली गढ़वाली फिल्म ‘जग्वाल’ (४ मई १९८३ को प्रदर्शित) की सौगात देने वाले पराशर गौड़ बतौर निर्माता अब लेकर आये हैं फिल्म ‘गौरा’, यह कनाडा में बसे पराशर गौड़ की दूसरी फिल्म है। रविवार ८ जून को रिलीज हुई यह फिल्म आंचलिक फिल्मस् और गैलेक्सी इंटरनेशनल, कनाडा के संयुक्त बैनर तले बनायी गयी है। इस फिल्म के प्रीमियर का उद्घघाटन संस्कृति और पर्यटन मंत्री प्रकाश पंत ने किया।

ये फिल्म एक साधारण पहाड़ी महिला के संघर्ष और कर्ज के बोझ तले दबे उसके परिवार की कहानी है। गौरा की हत्या के बाद से उत्पन हालात राजनीति पर व्याप्त भ्रष्टाचार से भी दो-चार कराते हैं। इस फिल्म का निर्देशन श्रीष डोभाल ने किया है और इस फिल्म की मुख्य नायिका देहरादून निवासी चंद्रकांता मलासी हैं जो इससे पहले छोटे पर्दे की गढ़वाली फिल्म ‘मेरी प्यारी बोई’ में अभिनय कर चुकी हैं।

इसके अलावा अपनी छाप छोड़ने वाली अब तक बनी कुछ अन्य गढ़वाली फिल्म हैं - १९८३ - जग्वाल, १९८४ - कबि सुख-कबि दुःख, १९८६ - घरजवैं (घर जंवाई), १९८७ - कौथिग (इसी साल पहली कुमांऊनी फिल्म ‘मेघा आ’ भी प्रदर्शित हुई), १९९० - रैबार, १९९२ - बंटवारू, १९८६ - बेटी-ब्वारी, २००३ - तेरी सौं, २००६ - चेलि।

इस अवसर पर देहरादून में मनाये गये गढ़वाली सिनेमा के रजत जंयती समारोह में गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ को सम्मानित किया गया। इन्हें गढ़वाली सिनेमा का दादा साहेब फालके कहा जाया तो कोई अतिश्योक्ति नही होगी। इस अवसर पर गढ़वाली सिनेमा के एक और दिग्गज और मधुर आवाज के धनी नरेन्द्र सिंह नेगी भी मौजूद थे। इन दोनों कलाकारों का साथ काफी पुराना है।


(बायें सेः प्रकाश पंत, पराशर गौढ़, नरेन्द्र सिंह नेगी)

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