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पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है - 3

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पिछले अंक - भाग १, भाग २
पिथौरागढ़ के मौसम को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है - दिसम्बर से मार्च तक जाडा़, अप्रैल से जून तक गर्मी, जुलाई से सितम्बर तक मानसून यानि बरसात और सितम्बर से नवम्बर जिसे कई जगह पतझड़ भी कहा जाता है। इसी दौरान शुरू होता है गुलाबी जाड़ा। देखा जाय तो ये समय सबसे उत्तम होता है ना ज्यादा गर्म ना ज्यादा ठंड।

आप सोच रहे होंगे कि गरम और ठडां दोनो ज्यादा कैसे हो सकते हैं दरअसल घाटी में बसा होने की वजह से पिथौरागढ़ में अन्य पहाड़ी स्थलों के मुकाबले गर्मियों में थोड़ा ज्यादा गर्म और सर्दियों में थोड़ा ज्यादा ठंड होती है। पिथौरागढ़ जिले के कुछ कस्बों मसलन घाट, झूलाघाट और धारचूला में तो कई बार तापमान ४० सेटीग्रेड तक भी पहुँच जाता है।

मूलनिवासी और भाषाः यहाँ के मूल निवासी या जनजातियों में मुख्यतया वन रावत और भोटियाँ जातियाँ आती हैं। जहाँ वन रावत जाति का मुख्य पेशा शिकार था वहीं भोटिया भेड़-बकरी पालन और ट्रेडिंग से अपना काम चलाते थे। यहाँ मुख्यतया कुमाँऊनी और हिन्दी भाषा बोली जाती है। कुमाऊँनी में भी अलग-अलग क्षेत्रों में बोली में variations देखने को मिलता है। नेपाल और तिब्बत की सीमाओं से जुड़े इलाकों में उनकी बोली और कुमाऊँनी मिश्रित बोली सुनायी पड़ती है। किसी जमाने में नेपाल से पिथौरागढ़ और पिथौरागढ़ से नेपाल आना-जाना बहुत ही सुगम था अब तो शायद ऐसा ना हो, यही वजह थी कि पिथौरागढ़ में पहले काफी नेपाली नजर आते थे, खासकर ज्यादातर कुली नेपाली ही होते थे जिन्हें ढोटियाल भी कहते थे।

पर्वत और ग्लेशियर या हिमनदः पिथौरागढ़ जिले में काफी ग्लेशियर या हिमनद हैं, जिनमें खासकर मिलम, नामिक, रलम, पंचुली, शिपू, धौली और काली काफी प्रसिद्ध हैं। कुछ मुख्य हिमालयन पर्वतों में हैं - नन्दादेवी (७४३४ मी), हरदेओल (७१५१ मी), त्रिशुल (७०७४ मी), नन्दाकोट (६८६१ मी), पंचचुली (६४३७ मी), सुलीटॉप (६३०० मी), कालीगंगाधुरा (६२१५ मी), बाबा कैलाश (६१९१) और नागलिंग (६०४१ मी)। हिन्दूओं के एक प्रसिद्ध तीर्थ कैलास मानसरोवर जाने का मार्ग भी पिथौरागढ़ होते हुए जाता है जो कि आजकल चीन में पड़ता है। इनके अलावा भी बहुत सारे ग्लेशियर और पर्वत इस क्षेत्र में पड़ते हैं।

पहाड़ी दर्रेः पुराने जमाने में इन दर्रों का प्रयोग व्यापार आदि के लिये होता था, चीन और तिब्बत की तरफ जाने वाले या उन्हें जोड़ने वाले कुछ दर्रों में लम्पिया धुरा (५५३० मी की ऊँचाई पर), लिपू-लेह पास (५४५० मी) और मंगश्या-धुरा (५६३० मी) हैं। इनके अलावा सिन्ला और रलम पास भी इसी क्षेत्र में है जो हिमालय के दूसरे हिस्सों को आपस में जोड़ते हैं, और भी कई अन्य दर्रे पिथौरागढ़ जिले में आते हैं। दर्रों के अलावा कई घाटियाँ भी इस क्षेत्र में पड़ती है, सोर घाटी के अलावा नेपाल-पिथौरागढ़ की सीमा पर है काली घाटी, गौरी-गंगा घाटी, रलम घाटी और अन्य कई।

फ्लोरा और फौना: ये क्षेत्र फ्लोरा और फौना यानि आमचाल की भाषा में जंगली फूल-पौधों के लिहाज से भी काफी धनी है। इनमें मुख्य हैं, (जो मैने देखे भी हैं और पहचान भी सकता हूँ) - काफल (KAFAL - Myrica esculenta), तिमूर (TIMUR - Zanthoxylum armatum ) ब्रहम कमल (BRAHM KAMAL - Saussurea obvallata), किरमोड़ (KIRMOR - Berberis aristata), हिसालू (HISALU - Rubus rotundifolius), बुरांस (BURANS - Rhododendron barbatum), बांझ यानि Oak (Quercus leucotricophora), साल या चीड़ (Pinus roxburghii), देवदार या Cedar (Cedrus deodara) और कंडाली या बिच्छू (इसी को शायद poison Ivy भी कहते हैं)।

इनमें काफल (गहरा लाल रंग का), हिसालू (पीले रंग का) और किरमोड़ (टमाटर वाला लाल रंग) फल हैं और बुरांस फूल। काफल को नमक-तेल में खाने का जो मजा है आह लिखते हुए ही मुहँ में पानी आ रहा है, गरमियों में अगर आप इस तरफ जायें तो बस स्टेशनों में कोई ना कोई इसे बेचता हुआ मिला जाय। हिसालू भी खाने में बड़े ही स्वादिष्ट होता है, मुझे याद है जब हम छोटे थे तो हिसालू, काफल और बुरांस तोड़ने बड़ी दूर दूर जाया करते थे। इसके अलावा मेरे ख्याल से जहाँ तक याद आता है तिमूर वो ही है जिसकी पत्तियों से हम बचपन में Tattoo बनाते थे। इसकी पत्तियों में एक खास बात ये होती है (बच्चों के लिये) कि इसे हाथ में रखकर अगर दबाया जाय तो आपके हाथ में पत्तियों का आकार बन जाता है वैसे ही जैसे आजकल Tattoo वाले स्टिकर से बच्चे तरह-तरह की आकृति बनाते हैं।

अगले भाग में कुछ प्रसिद्ध और खुबसूरत जगहों के बारे में बतायेंगे, साथ में वहाँ तक कैसे पहुँचा जाय ये बतायेंगे। आलेख में अगर कुछ त्रुटियां हों तो आशा है आप उन्हें सुधारने में मदद करेंगे, इसके अलावा आप भी कुछ बातें पिथौरागढ़ के बारे में बांटना चाहें तो आपका स्वागत है, टिप्पणियों में अपनी बात कह सकते हैं।

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Comments (15)

 

  1. Tarun says:

    @पंकज भाई, शायद आप सही कह रहे हो, किलमोड़ काला ही होता है, ये चित्र पहचान सकते हैं क्या? वो घिंघारू है क्या। और हाँ टेटू के लिये वास्तव में फर्न ही ईस्तेमाल होता है। मुझे नाम याद नही आ रहा था इसीलिये शायद कहा था जिससे किसी को मालूम हो तो करेक्ट कर दे। धन्यवाद भाई।

  2. तरुन दा,
    किलमोडे का रंग काला होता है, आप शायद घिंघारु की बात कर रहे हो, वह सेब के आकार का छोटा फल होता है और चटख लाल रंग का होता है। साथ ही तिमूर, एक कांटेदार पेड़ होता है, जिसपर छोटे-छोटे हरे दाने लगते है, इसे हिन्दी में वज्रदन्ती कहा जाता है, यह टूथपेस्ट आदि में काम आता है। टेटू तो एक फर्न से बनाई जाती है।

  3. aditya sanwal says:

    hello kya bat hai pahar ki baton ka its good

  4. basant rai(basubaba) says:

    pithoragarh ke bare me jo aap ne bataya bahoot achha tha (waise)

    (kimi- gyanli,beroo) bhi to inke jaise hi hain! (basubaba)

  5. sundar says:

    tarun aap bahut mahan ho jo ki uttarakhand ke bare main uttarakhand ke logo ko unki purani yaadon ko taja karte ho, or unhain unki sanskriti ki yaad delate ho,aapse anurodh hai ki- aap ranikhet, nanital , almora, aadi ke bare main bhi likhiyega, or wahan ke khubsurat wadeyan, log or bolchal ke bare main likhiyega.

    your frnds
    sundar

  6. sundar says:

    tarun aap bahut mahan ho jo ki uttarakhand ke bare main uttarakhand ke logo ko unki purani yaadon ko taja karte ho, or unhain unki sanskriti ki yaad delate ho,aapse anurodh hai ki- aap ranikhet, nanital , almora, aadi ke bare main bhi likhiyega, or wahan ke khubsurat wadeyan, log or bolchal ke bare main likhiyega.

    your frnds
    sundar from ganai chakhutiya

  7. yugal sanwal says:

    hello bahut khub
    उत्तरांचल में आने का धन्यवाद, aaj apne meree purani yaadon ko taja kar diya ha

  8. Tarun says:

    आप सभी लोगों का बहुत बहुत धन्यवाद, आजकल वक्त की कमी के चलते पढ़ना लिखना दोनों ही नही हो पाता :(

  9. sanjupahari says:

    Arey Bhaiyya….chalo itne dino baad aur saanth main pahar ke kafal.hisalu,kilmori leke aaye isliye maanf kiya…warna gaali likhne wala tha….awesome pics and extra-awesome info….thanx a lot tarun ji ,,,

  10. Jiten Chand says:

    aaj apne meree purani yaadon ko taja kar diya hai Tarun Ji, apka bahut bahut dhannebaad.
    –Jiten Chand
    (Dubai)

  11. balkishan says:

    पिथोरा गढ़ के बारे मे इतनी सार जानकारी देने के लिए आभार.
    समीर भाई की बात पर ध्यान दें

  12. mamta says:

    पिथौरा गढ़ के बारे मे इतनी विस्तृत जानकारी देने का शुक्रिया।

    सच बहुत सुंदर जगह है।

  13. पहले तो आप यह बतायें कि आप इतने महीनों तक चिट्ठाजगत से गायब कैसे हो गये थे ? लेकिन आज आप का यह बहुत ही बढ़िया लेख ( मेरे ख्याल में परफैक्ट) देख कर यही लग रहा है कि आप तो शायद हम सब को यह जानकारी उपलब्ध करवाने के लिये इन दुर्गम जगहों का भ्रमण कर रहे होंगे। आप की मेहनत सफल हुई।
    समीर जी का सुझाव इस को विकि पर ले आने के लिये बढिया है। विकि तक लेखों को लाने के लिये कुछ लिंक्स या कुछ जानकारी अगर हमे भी उपलब्ध करवायें तो कृपा होगी।

  14. बहुत बढ़िया जानकारी दी है पिथौरागढ़ के बारे में. इसे विकि पर भी ले जायें. आभार,

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