< Browse > Home / इतिहास, कुमाऊँ / Blog article: पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2

| Mobile | RSS

  

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2

March 10th, 2008 | 24 Comments | Posted in इतिहास, कुमाऊँ

पिथौरागढ़ का इतिहास
पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो।

फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या उनके आक्रमण से बचकर) वहाँ से भागकर यहाँ उत्तराखंड के इस हिस्से की तरफ आ गये। ऐसा माना जाता है कि राजपूत Settlers जब भी कोई नयी जगह बसते थे तो उस जगह का नाम वो ही रखते थे जहाँ से वो आये होते थे, इसलिये चौहान राजपूतों ने अपने उस शहर के नाम पर ही इस नये स्थान का नाम भी पिथौरागढ़ रखा जो कि आज उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण जिला भी है।

सन् १३६४ के बाद से बाकि बची १४वीं शताब्दी में यहाँ पाल वंशजों का राज रहा जो कि पिथौरागढ़ से अस्कोट तक फैला हुआ था। ऐसा देखने (पढ़ने) में आता है कि पाल राजवंश को नेपाल से आये ब्रहम राजवंश ने यहाँ से उखाड़ फेका था लेकिन फिर क्षेत्रपाल के साथ हुई लड़ाई के दौरान इनके राजा ज्ञानचंद की मृत्यु की वजह से यहाँ एक बार फिर पाल वंशजों का आधिपत्य हो गया।

१६वीं शताब्दी में एक बार फिर चंद राजवंश ने पाल राजवंश को उखाड़ के यहाँ अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और १७९० में एक पहाडी के ऊपर नये किले का निर्माण किया जहाँ आजकल गर्ल्स इंटर कालेज है।

उसके बाद ब्रितानी (British) साम्राज्य के दौरान ये अल्मोडा़ जिले की एक तहसील रहा फिर १९६० में पिथौरागढ को अलग से एक जिला बना दिया गया। अंग्रेजों के शासन के दौरान ही वहाँ आर्मी कैंट (वड्डा में), चर्च, मिशन स्कूल (सिल्थाम के पास की पहाड़ी में, जहाँ हमने भी २ साल पढ़ाई की थी) और ईसाई धर्म का भी फैलाव (विकसित) हुआ।

आगे जारी…….अगली बार पिथौरागढ़ के मौसम की बात करके इस श्रृंखला को आगे बढ़ायेंगे

[पिछली कड़ी - भूमिका]

Leave a Reply 8,400 views |
Follow Discussion

24 Responses to “पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – 2”

  1. ghughutibasuti Says:

    लिखते रहिये । मुझे तो अभी उत्तराखंड के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानना है ।
    घुघूती बासूती

  2. mukul nainwal Says:

    Thank’s for information about pithoraghar

  3. Mukesh Pathak Says:

    This is good information for those persons who are living outside from Uttarakhand for their livelihood.

    Thanks,

    Mukesh Pathak
    9868001596

  4. Hem Pant Says:

    तरूण दा!! बहुत सुन्दर जानकारी दी आपने… पिथोरागढ को “सोर” के नाम से भी जाना जाता है… 7-8 किमी लम्बी और 3-4 किमी चौडी यह घाटी “सोरघाटी” नाम से भी मशहूर है. विद्वानों के अनुसार यह इलाका एक सूखे हुए सरोवर की जगह पर स्थित है… सरोवर का अपभ्रंश ही “सोर” है….
    आम भाषा में यहाँ के लोगों को “सोर्याल” भी कहा जाता है…

  5. राजेन्द्र सावंत Says:

    सुन्दर आलेख है। लिखते रहिये। धन्यबाद.

  6. pankaj singh mahar Says:

    तरुण दा,
    आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है, पिथौरागढ़ को भारत का स्विटजरर्लैंड और मिनी कश्मीर भी कहा जाता है। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे। दिन-प्रतिदिन सरोवरों का पानी सूखता चला गया और यहाँ पर पठारी भूमि का जन्म हुआ। पठारी भूमि होने के कारण इसका नाम पिथौरागढ़ पड़ा। पर अधिकांश लोगों का मानना है कि यहाँ राय पिथौरा की राजधानी थी। उन्हीं के नाम से इस जगह का नाम पिथौरागढ़ पड़ा। राय पिथौरा ने नेपाल से कई बार टक्कर ली थी। यही राजा पृथ्वीशाह के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

    सादर,
    पंकज सिंह महर
    09412005856

  7. vinay singh rawat Says:

    Tarun ji that its the right
    I want many history of the pithoragarh
    Thax for this information
    Thanquuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu
    Vinay singh rawat
    9210071487

  8. chitra pokharia Says:

    Mr.Tarun there is too much grammatical mistakes in your web page so that there is too much problems to read it so please either right in English or make a correction here
    thank you

  9. Tarun Says:

    @chitra,
    Thanks for your comments, can you give one example of that mistake. This is a hindi website and these posts are written in hindi, just to let you know in case you see garbage characters and thinks as a mistake.

  10. jagdishsinghsoni Says:

    im like uttranchal song

    thanku

    uttranchal

  11. ANAND NAILWAL Says:

    I WANT EVERY TIME/DAY LISINIG OF OUR KUMAUNI LOVELY SONG. AND I WANT DOWNLOAD THESE SONG IN OUR MOBILE. SO PLEASE HELP ME. LOT OF OF YOU.

  12. Himanshu Risky Pathak Says:

    Tarun Daa.. Great Information….

    Thwaad Kaafal and Hisaalu ki Photuk Yaa le Chaao Dhe…

  13. Ajay Bankoti Says:

    Tarun

    Infact I did my inter from DSB in 1984. Wonderful place mate.
    Ignore Chitra’s comments. You doing a great job.

    I did not know much about Pithoragarh in 80s as I knew from your post.

    Appreciated!

    Cheers

    Aj

  14. AJEET RAWAT Says:

    good job

  15. SUDHIRCHAUHAN Says:

    THANK S

  16. Anand Singh Rana Says:

    apke alekh bhaut ache lage evem apne 42 versh ki aayu me jo jankari nahi thi vah mili evem yah hini me hai isse bara gaurav aur kya ho sakta hai.

    Anand Singh Rana
    Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, Mussoorie

  17. Anand Singh Rana Says:

    apke alekh bhaut ache lage evem apne 42 versh ki aayu me jo jankari nahi thi vah mili evem yah hindi me hai isse bara gaurav aur kya ho sakta hai.

    Anand Singh Rana
    Lal Bahadur Shastri National Academy of Administration, Mussoorie

  18. GOKARNh Says:

    I had completed my ISc From GIC pithoragarh. Very nice city. Very nice people and custom. I am from Nepal. But the culture, customs and everything are same as in the western part of nepal and pithoragarh. I still remember those streets, jungles, that KABRAGAH, that chandak snow falling..
    I remember so much this nice city where I got so many friends like krishna, girish, sanwal, mahendra, dipti. ….. but now everthing lost, only a nostalogia remain……..

  19. Yogesh kothyari Says:

    I m also from pithoragarh. your commitment for our place is very apparicating. we r very thankful to u for this hindi web sidt witch is very easy to read a comman man. god bless u. thanks for eatch information.
    thank you once again!!!!!

  20. govind Says:

    When i read this text, i really remember those days which i spend in pithoragarh when i went there for army selection. mujhe woh ucchi neechi sadkein abhi bhi yaad hain.i have not spent a lot but some that is really great for my life memories. because that is my mother land and i really attached with my distt. .some people are feeling hesitatation about to tell others that they are pahadi. but i feeling proudy when i tell others.bye………..govind

  21. manu paliwal Says:

    da thanks yar…………………………………………. m proud of….na kaumon

  22. Shyam Singh Dhami Says:

    Hi dear how are you,

    Me hamesha he fakra karta hun ke me kumaouni hun and belongs to Khela,Dharchula, Pithoragarh
    Mujhe apne is website me bahut kuch sikhane ko mila, if i given a chance i will try to join your company

    pahari jinda baad

    me umeed karta hun ke we people belongs to Kumaouni & garhwali hills kabhe bhe apne mitti ko na bhule because wo hamari pujya bhumi hai

    me hamesha out of Kumaouni hills raha fir bhe apne bhumi se bahut pyaar karta hun

    Thanks to Eyazuu & babu

    & thanks to you my dear

    with love

    Shaym Singh Dhami

    9219556208

  23. Gokarn Bhatt Says:

    आज मुझे फिर से पिथोरगढ कि याद आ रही है। पत नही जिन्दगी कहाँ से कहाँ ले जाती है। मै मेरे दोस्तो से फिर से मिलना चाहता हुँ। लेकिन न पता न खबर। कोइ मुझे बाटये कि कृष्ण उप्रारी, दीपक सनवाल, मोहन पाण्डे, हेम, कोमल, पंकज, दीप्ती, गिरिश, पाठक जी का अता पता। anawart@gmail.com

Trackbacks

  1.   पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है by Uttaranchal | उत्तरांचल  

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।