20 Mar
Posted by Tarun as कुमाऊँनी संगीत, त्यौहार, विडियो
Tags:कुमाऊँनी संगीत, त्यौहार, विडियो, bali bedna, kumaoni holi geet, uttarakhand, videoवैसे तो होली आने वाली है लेकिन हमने अभी पिछले शनिवार एक बार तो होली मना ही ली है। इस बार पहली बार यहाँ अमेरिका में हमें भी बैठकी होली में बैठकर होली मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बचपन की सारी यादें ताजा हो गयी, थोड़ा अफसोस रहेगा कि खड़ी होली का मजा नही ले पाये।
सालों से जिन होली के गीतों को इंटरनेट पर ढूँढ रहा था वो भी इस बैठकी होली में हमें मिल गये, पहले शनिवार को इन्हें वहाँ गाया तो सोचा क्यों ना अब आप लोगों के साथ बाँटा जाय। वैसे तो बहुत सारी होलियां थीं लेकिन हम उनमें से कुछ ही यहाँ दे रहे हैं।
कुमाँऊ में हो या वहाँ से बाहर होलियार होली की शुरूवात ज्यादातर जिस होली से करते हैं वो है - “सिद्धि को दाता, विघ्न विनाशन, होली खेलें गिरिजापति नंदन“, इसलिये हमने भी पहले इसी का जिक्र कर दिया। चूँकि वक्त की कमी थी इसलिये हमने ज्यादा होलियां तो नही गायीं लेकिन जो गायीं पहले वो बता देता हूँ।
वैसे तो आजकल यमुना इतनी गहरी नही रह गयी है लेकिन जब ये होली लिखी गयी होगी तब जरूर रही होगी -
जल कैसे भरूं जमुना गहरी -२
ठाडी भरूं राजा राम जी देखें
बैठी भरूं भीजे चुनरी
जल कैसे…
धीरे चलूं घर सास बुरी है
धमकि चलूं छलके गगरी
जल कैसे…
गोदी में बालक सिर पर गागर
परवत से उतरी गोरी
जल कैसे…
शुरूआत में गाने वाले हम बहुत कम थे इसलिये हम लोगों ने महिला होलियारों (नेताओं के महिला वोटरों को रिझाने वाले अंदाज में) को रिझाने के लिये शुरू किया -
रंग में होली कैसे खेलूं री मैं सांवरियाँ के संग….
अबीर उडता गुलाल उडता, उडते सातों रंग
भर पिचकारी सनमुख मारी, अंखियाँ हो गयी बंद…
तबला बाजे, सारंगी बाजे, और बाजे मृदंग
कान्हा जी की बांसुरी बाजे, राधा जी के संग…
रंग में होली कैसे खेलूं री मैं सांवरियाँ के संग….
इसका फायदा भी देखने में आया, होलियारों की संख्या बढ़ने लगी उसके बाद एक और होली गायी थी जो अभी याद नही आ रही और उस होली की कॉपी लाना भी मैं भूल गया। लेकिन वो शुरू हाँ हाँ हाँ से होती थी। अब हाँ हाँ से शुरू होने वाली तो काफी होलियां हैं, दो मैं बता देता हूँ अगर आप को कोई और याद हो तो बतायें। ये दो है -
1. हाँ हाँ हाँ, छैला खेलो ना होरी
2. हाँ हाँ हाँ मोहन गिरधारी, हो-हो-हो मोहन गिरधारी,
ओ ऐसो अनाड़ी चुनर गयो फाडी, हंसी-हंसी दे गयो गारी
फिर रंग में होली कैसे खेलूँगी वाली होली दोबारा गाई गयी वैसे ही जैसे किसी किसी फिल्म में एक ही गाना पहले पुरूष आवाज में होता है फिर महिला गायिका की आवाज में। अब चूँकि हम सब लोग इधर-उधर से हांक कर लाये गये थे इसलिये शुरू शुरू में हमारे रंभाने के स्वर सुर और ताल में थोड़ा बेताला हो रहे थे। लेकिन फिर बुजुर्ग होलियारों के स्टेज संभालने के बाद थोड़ा लय बना और जोगी ने दरवाजे में दस्तक दी -
जोगी आयो शहर में व्योपारी -२
अहा, इस व्योपारी को भूख बहुत है,
पुरिया पकै दे नथ-वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को प्यास बहुत है,
पनिया-पिला दे नथ वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को नींद बहुत है,
पलंग बिछाये नथ वाली
जोगी आयो शहर में व्योपारी -२
आजकल मार्केट में वैसे ही मंदी का दौर चल रहा है तो इस व्यापारी को भी नही पूछा गया और हम सारे होलियारों को हो हो, हो नगरे, होली है कहते हुए स्टेज से रूखसत होना पड़ा। क्योंकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नंबर जो था। बरहाल स्टेज के बाद हमने एक दो लोगों से अफसोस जताया कि बेस्ट होली तो हमने गायी ही नही, दरअसल ये होली बेस्ट, सिर्फ लड़को के बीच ही मानी जाती है। वो होली है -
झनकारो झनकारो झनकारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो - २
तुम हो बृज की सुन्दर गोरी, मैं मथुरा को मतवारो
चुंदरि चादर सभी रंगे हैं, फागुन ऐसे रखवारो।
गौरी प्यारो…
सब सखिया मिल खेल रहे हैं, दिलवर को दिल है न्यारो
गौरी प्यारो…
अब के फागुन अर्ज करत हूँ, दिल कर दे मतवारो
गौरी प्यारो…
भृज मण्डल सब धूम मची है, खेलत सखिया सब मारो
लपटी झपटी वो बैंया मरोरे, मारे मोहन पिचकारी
गौरी प्यारो…
घूंघट खोल गुलाल मलत है, बंज करे वो बंजारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो -२
हमारी रंग लगी हुई होली गाती तस्वीरें और क्लिप अब तक सहारा और TV एशिया में दिखायी जा चुकी होंगी। अब कुछ उन होली की बता देते हैं जो पसंदीदा होलियों में से हैं और जिन्हें हम गाने से रह गये -
बलमा घर आयो फागुन में -२
जबसे पिया परदेश सिधारे,
आम लगावे बागन में, बलमा घर…
चैत मास में वन फल पाके,
आम जी पाके सावन में, बलमा घर…
गऊ को गोबर आंगन लिपायो,
आये पिया में हर्ष भई,
मंगल काज करावन में, बलमा घर…
प्रिय बिन बसन रहे सब मैले,
चोली चादर भिजावन में, बलमा घर…
भोजन पान बानये मन से,
लड्डू पेड़ा लावन में, बलमा घर…
सुन्दर तेल फुलेल लगायो,
स्योनिषश्रृंगार करावन में, बलमा घर…
बसन आभूषण साज सजाये,
लागि रही पहिरावन में, बलमा घर…
एक और मजेदार होली है -
शिव के मन माहि बसे काशी -२
आधी काशी में बामन बनिया,
आधी काशी में सन्यासी, शिव के मन
काही करन को बामन बनिया,
काही करन को सन्यासी, शिव के मन…
पूजा करन को बामन बनिया,
सेवा करन को सन्यासी, शिव के मन…
काही को पूजे बामन बनिया,
काही को पूजे सन्यासी, शिव के मन…
देवी को पूजे बामन बनिया,
शिव को पूजे सन्यासी, शिव के मन…
क्या इच्छा पूजे बामन बनिया,
क्या इच्छा पूजे सन्यासी, शिव के मन…
नव सिद्धि पूजे बामन बनिया,
अष्ट सिद्धि पूजे सन्यासी, शिव के मन…
होली के गीतों में ज्यादातर, शिव, राधा-कृष्ण और राम-सीता का उल्लेख भी मिलता है। ऐसी ही एक होली है -
हाँ हाँ जी हाँ, सीता वन में अकेली कैसे रही है
कैसे रही दिन रात, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता रंग महल को छोड़ चली है
वन में कुटिया बनाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता षटरस भोजन छोड चली है
वन में कन्दमूल फल खाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता तेल फुलेल को छोडि चली है
वन में धूल रमाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता कंदकारो छोड़ चली है
कंटक चरण चलाई, सीता वन में
कैसे रही दिन रात, सीता वन में।
अब ये होली तो निपट ही गयी है, होली के गीत अभी भी बहुत बाकि हैं इसलिये इन्हें अगली होली के लिये छोड़ देते हैं। अब होली के अवसर पर कुछ शानदार और जानदार विडियो और कुमाऊँनी कविता सुनाते हैं। सबसे पहले देखिये ये क्रियेटिव विडियो, ये उत्तरांचल से संबंधित तो नही है लेकिन होली से है और बहुत अच्छा बनाया गया है -
अब सुनिये ओ परूवा बोजू वाले शेरदा अनपढ़ की होली पर ये कुमाऊँनी कविता,
यहाँ देखिये, गिरीश तिवारी गिर्दा कुमाँऊनी होली के बारे मे बता रहे हैं -
कुमाँऊनी फिल्म “बली बेदना” का ये होली गीत बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय है, इस पोस्ट को लिखते लिखते हम ये ५-६ बार सुन चुके हैं (गीत के बोल हिंदी में हैं इसलिये सभी को समझ आ जायेंगे), हरि खेल रहे हैं होरी, देवा तेरे द्वारे में (जिसे संजू ने कुछ दिनों पहले भेजा था) -
कुमाँऊ में होली की इक बैठक में ये देखिये एक छोटा सा बालक (३-४ साल से ज्यादा नही दिखता) कितना बढ़िया तबला बजा रहा है।
और आखिरी गीत है हेम पंत और दोस्तों का होली पे खड़ी होली अंदाज में गाया हुआ ये गीत (जिसे हेम ने आज ही भेजा) -
15 Responses
kakesh
March 20th, 2008 at 10:23 am
1कलेक्शन अच्छा लगा. वैसे इसे मेरा पहाड़ पर देखा था फिर भी यहाँ देखना सुखद रहा. हमारी होली भी देखिये जरूर कुछ नया मिलेगा आपको.
होली की ढेर सारी शुभकामनाऐं.
mamta
March 20th, 2008 at 1:27 pm
2तरुण जी होली मुबारक हो।
Hem Pant
March 20th, 2008 at 5:49 pm
3तरूण दा! इंटरनेट पर इस बार ‘पहाडी होली’ पर काफी सामग्री आ गयी है. काकेश जी और आपने तो जबरदस्त ब्लोग लिख डाले हैं. आपके ब्लोग में इतने वीडियो देखने को मिले… मजा आ गया
समीर लाल
March 20th, 2008 at 5:57 pm
4आप तो तरीके बताते बताते ही प्रसिद्ध हो लिये.
समीर लाल
March 20th, 2008 at 5:58 pm
5उपर वाल कमेंट गलत हो गया है जी….होली के नशे में.
होली मुबारक.
sanjupahari
March 20th, 2008 at 8:10 pm
6waah waah,,,,pura holi rang chada diya gurudev….abhi ab ghar ki yaad aa rahi hai,,,,,,,,,, sajna ghar aayooo fagun main….
cheers
sanjupahari
dinesh
March 21st, 2008 at 9:42 am
7Good Tarun ji……….HAPPY HOLI JI………………..
Maja aa gaya
Dinesh
Tarun
March 21st, 2008 at 8:52 pm
8@आप सभी लोगों को सराहने के लिये धन्यवाद, होली मुबारक आप सभी को।
@दिनेश, अक्सर पढते रहने और विचार रखने के लिये धन्यवाद, आपको भी होली की बहुत बहुत बधाई।
Tarun
March 22nd, 2008 at 12:59 am
9gr8 its very lovely song . we share same name.
tarun
March 22nd, 2008 at 1:01 am
10its gr8 very gud songs. happy holi and we share same name too
TVijay Devrani
March 24th, 2008 at 8:16 am
11Thanku
Dalbir Singh Sagoi
March 28th, 2008 at 10:14 am
12hi i am dalbir sagoi from uttrakhand i am working in delhi
and i like to all garhwali song and garhwali jagar edit by pritam Bhartwan and i all garhwalis men to informe that pls may be singing
by narendra singh negi send this vidio.in profile
thanks with Regards
Dalbir Singh Sagoi
Karnpryag
Dalbir Singh Sagoi
March 28th, 2008 at 10:16 am
13i Love my All Garhwali Bhai And i Love the Passon
kumar singh
June 27th, 2008 at 7:49 pm
14hi
mujhe kumaoni geet ache lagate hai
kyonki main uttranchal ka rahne vala hoon
आड़ू-बेडू-घिंघारु
September 3rd, 2008 at 5:25 pm
15कुमाऊंनी होली में मात्र कुमाऊंनी गीत ही नहीं गाये जाते, बल्कि यह होली अपने शाष्त्रीय गायन के लिये ज्यादा प्रसिद्ध है। एक होली जो चन्द्र शिखा जी ने लिखी है और यह काफी प्रचलित है।
कैसी होरी मचाई, स्याम चिर चोरी लगाई,
खेलत गेंद गिरी जमुना में, हम से कहत चुराई,
बहियां पकड़ मोरी अंगिया में खोजत, एक गई, दो पाई,
छीन लिये मुरली पीतांबर, सिर पर चुनड़ी उठाई,
कहां गये तेरे संग के सखा सब, कहां गये बल भाई,
कहां गई तेरी मात जशोदा, तुमको लेय छुड़ाई,
फगुवा लिये बिन जान ना देंगी, तुम चित्त चोर कन्हाई।
RSS feed for comments on this post · TrackBack URI
Leave a reply
अगर आप भी उत्तरांचल की कोई फोटो हमारे साथ शेयर करना चाहते हैं तो प्लीज इस पते पर भेजियेः
कंट्रोल पैनल
Categories
Archives
Links
Meta
About Me
Email Notification
Would you Like to receive an email whenever a new article is posted? Enter your email address below...
Geet Gaata Chal
Calendar
Recent Entries
Recent Comments
Most Commented
Uttaranchal | उत्तरांचल is proudly powered by WordPress - BloggingPro theme by: Design Disease