10 Mar
Posted by Tarun as कुमाऊँ, इतिहास
Tags:pithoragarh history, prithvi raj chauhan, uttarakhand, Uttaranchalपिथौरागढ़ का इतिहास
पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो।
फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या उनके आक्रमण से बचकर) वहाँ से भागकर यहाँ उत्तराखंड के इस हिस्से की तरफ आ गये। ऐसा माना जाता है कि राजपूत Settlers जब भी कोई नयी जगह बसते थे तो उस जगह का नाम वो ही रखते थे जहाँ से वो आये होते थे, इसलिये चौहान राजपूतों ने अपने उस शहर के नाम पर ही इस नये स्थान का नाम भी पिथौरागढ़ रखा जो कि आज उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण जिला भी है।
सन् १३६४ के बाद से बाकि बची १४वीं शताब्दी में यहाँ पाल वंशजों का राज रहा जो कि पिथौरागढ़ से अस्कोट तक फैला हुआ था। ऐसा देखने (पढ़ने) में आता है कि पाल राजवंश को नेपाल से आये ब्रहम राजवंश ने यहाँ से उखाड़ फेका था लेकिन फिर क्षेत्रपाल के साथ हुई लड़ाई के दौरान इनके राजा ज्ञानचंद की मृत्यु की वजह से यहाँ एक बार फिर पाल वंशजों का आधिपत्य हो गया।
१६वीं शताब्दी में एक बार फिर चंद राजवंश ने पाल राजवंश को उखाड़ के यहाँ अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और १७९० में एक पहाडी के ऊपर नये किले का निर्माण किया जहाँ आजकल गर्ल्स इंटर कालेज है।
उसके बाद ब्रितानी (British) साम्राज्य के दौरान ये अल्मोडा़ जिले की एक तहसील रहा फिर १९६० में पिथौरागढ को अलग से एक जिला बना दिया गया। अंग्रेजों के शासन के दौरान ही वहाँ आर्मी कैंट (वड्डा में), चर्च, मिशन स्कूल (सिल्थाम के पास की पहाड़ी में, जहाँ हमने भी २ साल पढ़ाई की थी) और ईसाई धर्म का भी फैलाव (विकसित) हुआ।
आगे जारी…….अगली बार पिथौरागढ़ के मौसम की बात करके इस श्रृंखला को आगे बढ़ायेंगे
[पिछली कड़ी - भूमिका]
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10 Responses
ghughutibasuti
March 10th, 2008 at 3:01 pm
1लिखते रहिये । मुझे तो अभी उत्तराखंड के इतिहास के बारे में बहुत कुछ जानना है ।
घुघूती बासूती
mukul nainwal
March 11th, 2008 at 10:16 am
2Thank’s for information about pithoraghar
Mukesh Pathak
March 13th, 2008 at 10:53 am
3This is good information for those persons who are living outside from Uttarakhand for their livelihood.
Thanks,
Mukesh Pathak
9868001596
Hem Pant
March 17th, 2008 at 1:15 pm
4तरूण दा!! बहुत सुन्दर जानकारी दी आपने… पिथोरागढ को “सोर” के नाम से भी जाना जाता है… 7-8 किमी लम्बी और 3-4 किमी चौडी यह घाटी “सोरघाटी” नाम से भी मशहूर है. विद्वानों के अनुसार यह इलाका एक सूखे हुए सरोवर की जगह पर स्थित है… सरोवर का अपभ्रंश ही “सोर” है….
आम भाषा में यहाँ के लोगों को “सोर्याल” भी कहा जाता है…
राजेन्द्र सावंत
March 27th, 2008 at 5:27 pm
5सुन्दर आलेख है। लिखते रहिये। धन्यबाद.
पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है by Uttaranchal | उत्तरांचल
March 28th, 2008 at 4:37 am
6[…] आगे जारी…… पिथौरागढ़ का इतिहास […]
pankaj singh mahar
April 17th, 2008 at 12:23 pm
7तरुण दा,
आपने बहुत अच्छी जानकारी दी है, पिथौरागढ़ को भारत का स्विटजरर्लैंड और मिनी कश्मीर भी कहा जाता है। यहाँ पर माना जाता है कि पहले इस घाटी में सात सरोवर थे। दिन-प्रतिदिन सरोवरों का पानी सूखता चला गया और यहाँ पर पठारी भूमि का जन्म हुआ। पठारी भूमि होने के कारण इसका नाम पिथौरागढ़ पड़ा। पर अधिकांश लोगों का मानना है कि यहाँ राय पिथौरा की राजधानी थी। उन्हीं के नाम से इस जगह का नाम पिथौरागढ़ पड़ा। राय पिथौरा ने नेपाल से कई बार टक्कर ली थी। यही राजा पृथ्वीशाह के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
सादर,
पंकज सिंह महर
09412005856
vinay singh rawat
May 2nd, 2008 at 7:37 pm
8Tarun ji that its the right
I want many history of the pithoragarh
Thax for this information
Thanquuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuuu
Vinay singh rawat
9210071487
chitra pokharia
May 15th, 2008 at 8:55 pm
9Mr.Tarun there is too much grammatical mistakes in your web page so that there is too much problems to read it so please either right in English or make a correction here
thank you
Tarun
May 16th, 2008 at 12:12 am
10@chitra,
Thanks for your comments, can you give one example of that mistake. This is a hindi website and these posts are written in hindi, just to let you know in case you see garbage characters and thinks as a mistake.
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