पिथौरागढ़, यानि प्रकृति की गोद में बसा उत्तरांचल (उत्तराखंड) राज्य का एक बेहद रमणीक शहर, वो शहर जो मिनी काश्मीर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग १० वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली सोर घाटी में बसा ये शहर, चंडाक, ध्वज, थल केदार और कुंदर पहाड़ियों के मध्य घिरा हुआ है। कैमरे में कैद करने लायक प्राकृतिक सुंदरता से भरा होने की वजह से ही शायद इस शहर को छोटा काश्मीर भी कहते हैं।

अगले कुछ लेखों में हम इसी शहर के बारे में बतायेंगे। यही वो शहर है जहाँ मनायी गयी होली हमें रह रहकर याद आती है। इसी शहर से हमने क्रिकेट, फुटबाल और बास्केटबॉल जैसे खेल सीखे। सिलथाम की सड़कों में भुट्टा खाने के बाद बचे उसके डंडे से फुटबाल खेलना अभी भी याद है। याद है डीएवी (शायद ये ही स्कूल का नाम था) के मैदान में बास्केटबॉल और फुटबाल सीखने के लिये जाना, स्टेडियम में बैठकर फुटबाल मैच का लुत्फ उठाना। खेतों से फसल कटने के बाद उस पर अपने विकिट गाड़ क्रिकेट खेलना।

मिशन स्कूल की पहाड़ी के पीछे जल्दी छुट्टी होने पर क्रिकेट खेलना, टांट बिछाकर रामलीला देखना, जेल वाले किले की दीवारों में चढ़ना, चंडाक का मैला, वो खड़िया की खान। गर्मियों में भाटकोट की तरफ घूमने निकल जाना, वड्डा में जाकर आर्मी थियेटर में सिनेमा देखना। नये बाजार की चौड़ी (तब तो ऐसी ही लगती थी) सड़कों में घूमना, पुनेठा पुस्तक भंडार में किताबें खरीदने के लिये लाईन लगाना। यादों का क्या एक बार जो आनी शुरू हो तो आती ही जाती है - “यादें याद आती हैं, बातें याद आती हैं”

ऐसी ही यादें हो सकता है आप में से किसी के साथ भी जुड़ी हों, कोई ऐसी जगह जिससे ये इंटरनेट अभी तक अनजान हो, वो आपका कोई सुंदर सा गांव जिसके बारे में आपके सिवा कोई और नही जानता। अगर आप के साथ भी इस शहर को लेकर कोई ऐसी याद जुड़ी हो तो हमें लिख भेजिये या टिप्पणी के द्वारा हमें बता दें। जिसे हम अपनी पिथौरागढ़ की इस श्रृंखला में शामिल कर सकें। पिथौरागढ़ की वादियों या इस शहर की तस्वीरें भी अगर आपके पास हैं और वो भी आप हमारे साथ बांट सकें तो ये सोने पर सुहागा वाली बात होगी।

आगे जारी…… पिथौरागढ़ का इतिहास

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