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कुमाऊँनी लोक नृत्यः छोलिया

कुमाँऊ के प्रसिद्ध लोक नृत्यों में एक है छोलिया नृत्य जिसका इतिहास लगभग १००० साल पुराना है। इस नृत्य का उदय खसिया राज्य के वक्त माना जाता है जब विवाह तलवारों की नोक पर हुआ करते थे। खस शायद छत्रिय शब्द का अपभ्रंश हो क्योंकि इनके ज्यादातर रिति रिवाज राजपूतों के रिवाजों से काफी मिलते हैं।

बाद में शायद राजाओं का वक्त खत्म होने के बाद कुमाऊँ में छत्रियों की शादियों में छोलिया नृत्य किया जाने लगा (होगा)। जब बारात घर से निकलती थी तो बारात के आगे कुछ पुरूष नृतक रंग बिरंगी पोशाकों में तलवार और ढाल के साथ नृत्य करते हुए चलते थे। ये नृत्य दुल्हन के घर तक पहुँचने तक जारी रहता था। साथ में गाजे बाजे भी होते थे जो हरिजन जाति के लोग बजाते थे जिन्हें ढोलिया या ढोली कहते थे। बारात के साथ तुरी या रणसिंगा (ये कुमांऊनी संगीत यंत्र हैं जो रणभेरी या बैगपाईपर जैसे ही होते हैं) भी होता था जो बैरागी, जोगी या गोसांई जाति के लोग बजाते थे; और हाँ, साथ में लाल रंग का झंडा भी चलता था।

हालांकि ये कोई पेशेवर नृतक नही होते थे लेकिन इस नृत्य कला में पारांगत जरूर होते थे जाहिर सी बात है ऐसी विशेष कला के लोग हर शहर में तो होते नही होंगे। इसलिये ज्यादातर शादियों में ये अल्मोड़ा या चंपावत क्षेत्र से बुलाये जाते थे। इन नृतकों की वेशभूषा में चूड़ीदार पैजामा (पायजामा), एक लंबा सा घेरदार छोला (कुर्ता) और उसके ऊपर पहनी जाती थी बेल्ट, सिर में पगड़ी, पैरों में घुंघरू की पट्टियाँ, कानों में बालियाँ और चेहर सजा होता था चंदन और सिन्दूर से। लगभग 22 लोगों की इस छोलिया नृतकों की टीम में 8 तो होते थे नृतक और बाकि 14 लोग गाजे बाजे वाले होते थे। संगीत और बाजों की थाप पर इन छोलिया नृत्यों की कलाकारी देखने लायक होती थी।

जब ये बारात गली मोहल्लों या गाँवों से निकलती थी तो बारात में आकर्षण का केन्द्र ये छोलिया होते थे ना कि दुल्हा दुल्हन। मुझे आज भी इस तरह की शादियाँ याद हैं जो पिथौरागढ़ में अपने घर के छज्जे (खिड़कियों) से मैंने देखी थी। शायद आज भी गांवों में कुछ लोग इस परंपरा को जीवित रखे हों लेकिन बदलते वक्त के साथ इन छोलिया नृतकों की जगह बैंड बाजों वालों ने ले ली है।

ये देखिये छोलिया नृत्य, बारात जाने से पहले

मंच पर इस कला को प्रदर्शित करते कुछ कलाकार

नैनिताल की माल रोड से गुजरते कुछ नृतक,

हमारे संजू पहाड़ी इस पर कहते हैं,

हाँ बिल्कुल आज भी ऐसी शादियाँ होती हैं…पर शायद कलाकारों की कमी, लोगों का नाकारापन या फिर अपनी संस्कृति की तरफ अनदेखापन इस सालों की परंपरा को ढहाने में (विलुप्त होने का कारण) मदद कर रहा है। अब कुछ प्रोग्रामों या गिनीचुनी शादियों में ही ये डांस देखने को मिलते हैं। २२ लोगों की टीम तो मैने शायद ही देखी है और कहीं ना कहीं शायद ज़ांस में मोर्डन डांस की छाप भी दिखती है…बस भगवान से प्रार्थना ही करता हूँ कि इस कला का बचा के रखना।

उनका दर्द समझमें आता है क्योंकि विश्वस्त सूत्रों के अनुसार इन्होंने ये नृत्य सीखा हुआ है, और ये चाहते भी हैं कि इनकी शादी में २२ वाली टीम पूरी हो जिससे लोग इन्हें कम और इन छोलिया नृतकों को ज्यादा देखें शायद यही एक कलाकार का कला प्रेम है। हेम पंत इसी कड़ी में आगे जोड़ते हुए कहते हैं,

ये तो हर शादी ब्याह का जरूरी अंग होता था मेरे बचपन के दिनों में…असल में ये दो योद्धाओं के बीच युद्ध का नाटकीय रूपांतरण है…बीच में कलाबाजियाँ जोड़ दी जाती हैं…डांसर के कपड़े, और हथियार एक योद्धा की तरह ही होते हैं।

नोटः क्या आपको इस छोलिया नृत्य के विषय में कुछ और पता है? या फिर आपको छोलिया नृतकों से सजी किसी शादी कि याद है, आप टिप्पणी के रूप में हमारे साथ जरूर बाँटें।

[इस पोस्ट की सभी फोटो के फोटोग्राफरः हेम पंत]

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24 Responses to “कुमाऊँनी लोक नृत्यः छोलिया”

  1. sanjupahari Says:

    सुबह सुबह उत्तराखंड का छोलिया देख के मन खुस हू गया गुरु ….धन्य हैं आप ,,, वाह अति सुंदर.

  2. swapandarshi Says:

    jara nainitaali par bhee post karde.
    bahut achhaa hai.

  3. puranchand Says:

    i have very like It is gong

  4. dinesh Says:

    Yes i’m very like this,(Choliya nritya) such as i’m do’t live in uttaranchal right now but we have all link of our state of uttaranchal. boz we have very like the uttarakhand songs and much more too.

    Wah!!! maja aa gaya ji,

  5. dinesh Says:

    uttaranchal hamri devi bhumi hai use to hum hamesa yaad rakhenge,just like self hole life.

  6. GANESH Says:

    Hi
    My uttarakhandi brother,s & sister,s i like this song, main uttarakand ke song bahut hi pasand karta hun , main chandigarh mein rahne k bad bhi garhwali and kumawni geet sunns pasand karta hun Your brother Ganesh Chamoli Uttarkashi uttarakhand

  7. RA Says:

    धन्यवाद तरुण । हम जैसे देस में पले बढ़े कुमाउनियों के लिये यह सांस्कृतिक जानकारी बहुत की लाभदायक है । और हां , होली पार्टी में पहाड़ी खाना रखनें का ख़्याल उत्तम है, संजना से बात करनीं चाहिये।

  8. Jiten Chand Says:

    Hi
    i like toooo much this Nirittya.Its my traditional dance , aaj bhee main is chaliya dance ki dhoon ko yaad karta hoon mera tan gati main aajata hai , par jaab maine is ko is web main dekha aur suna to maan tan baab baag ho gaya , main india se nahi hoon magar meri parmpara aur mere ritiriwaaj purna taya uttarakhand se milta hai.kya ko hi batayaga main kaha se hoon? kaise meri parmpara aur ritiriwaag uttarakhand se milti hai kya ko hi purana sambandh hai kya uttarakhand se mere purbajaun ka?????

  9. dinesh singh bisht Says:

    i like too mach my utrranchel i come for 1 time in almora almora sylde vill- timli so good mera to man karta hai ki apne gaon chala gawu magr kya kro mumbai se lamba hai but i miss my vill- thanks for utrranchel .com

  10. pankaj singh mahar Says:

    आफिस में प्रोटोकाल का ध्यान रखना पड़ता है, अन्यथा मन कर रहा है कि छोलियाओं के साथ धुन में, रुमाल तिकोना बनाकर उनके साथ नाचूं……।

  11. deep chand pandey Says:

    Excellent, it made me feel proud that I also have such a rich and colourful culture. I always felt that we the kumaoni people have left our own culture and language becuause it lacks the deapth that the Bengali, South India or Punjabi cultures have. Thank you very much for giving me such feeling.

  12. balam singh negi Says:

    ha mene ye dans dekha hai meri sadi 2 ssal pahale huee thi or meri sadi me ye dans tha lekin ab dansh karne wae 22 nahi balki kewal 2 hete hai or unke sath ek nagade wala ek rohati wala ek binbaj wala ek ransingh wala or do jhande wale ek lal or ek safed kalar ka.

    jab barat dulhe ke ghar se nikali hai to safed jhande wala sabse age chalata hai jisse har koee jan jata hai ki barat dulhan ko lene ja rahi hai or jab barat dulhan ke ghar se ati hai to lal jhande wala age se hota hai tab ye pata chalta hai ki batat dulhan ko lekar aa rahi hai or tab barat jis ghav se hokar jati hai to waha ki orte or ladkiya dulhan ko dekhane ke liye aa jati hai. hamare yaha har barat me ye hota hai.

    barat ke sath band baja bhi hota hai
    jo har gav ka alag se haota hai

    jai mere ghav ka nam ghachkot hai to

    mere band baje par likha hoga

    gram pnchayat ghachkot

    Dhanyawad

    BALAM SINGH NEGI
    VILLEG GHACHKOT
    DISTY ALMORA
    PATTI PALLA SALT

  13. ramesh pandey Says:

    gooad

  14. mahesh nath Says:

    pl my choo kumauni mussi

  15. rajendra Says:

    hi
    all bhuat acha laga ghughuti site dhekh kar i love Uttranchal and love kumoani vedio songs.

  16. आड़ू-बेडू-घिंघारु Says:

    तरुण दा,
    छोलिया नृत्य का नामकरण संभवतः छल शब्द से हुआ है, यह नृत्य युद्ध को प्रदर्शित करता है….कालांतर में यह प्रतीकात्मक रुप में नृत्य बनकर रह गया। छोलिया इसका परिष्कृत हिन्दी नाम हो गया, इसके इतिहास को मैं खंगाल रहा हूं और जैसे ही मुझे सफलता मिलेगी, फोरम के माध्यम से आप तक पहुचा दूंगा।

  17. ravikant arya Says:

    hi my name is ravikant arya from kashipur ( U.S. Nagar )
    now i am student of animation film design department of nation institute of design its a only one institute in india
    my film “one fine friday” resently win the internation award
    you can serach in google by my name and film name
    now i am doing my diploma project on cholia dancer for promating this rare dance. i already started the work.

    do you know any one who can sponser me for this film or any add
    where i can send my request for sposering my film i am doing it for uttarachal and its for good cause ‘promotin a rare folkdance’

    thanks

    ravikant
    ravikant@nid.edu

  18. आड़ू-बेडू-घिंघारु Says:

    दाज्यू,
    इक बेरी यां ले चाओ धैं

    http://www.merapahad.com/forum/index.php?topic=514.0

  19. pankaj gupta Says:

    hildo ke sardar ki selection chal rahi hai

  20. ramesh pandey Says:

    Dear Boos Veery Gooad

    RAMESH PANDAY

    T: +91-120-6601522/21 F: +91-120-6601989 M: +91-9953533535

  21. Puran Singh Satwal (Satyun) Says:

    bahut aapna choliya nach laga

  22. BASU Says:

    hi kumaoni song dekhkar bahut achha laga thanks

  23. Devendra Nagarkoti Says:

    i love kumaon.
    it is my home town.
    i am from bagwalipokhar(Basulisera,petshal).

  24. shankar singh fartiyal Says:

    feeling very good after watching choliya nretye

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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