29 Jan
Posted by Tarun as pahari cuisine (Recipes)
Tags:pahari cuisine (Recipes), bhatt ki churkani, black beans, kumaoni recipes, quick snack, uttarakhand cuisineजितनी खुबसूरत उत्तरांचल की पहाड़ियाँ है उतना ही स्वादिष्ट होता है पहाड़ी खाना। आज पहाड़ी खाना में हम आप को भट्ट की चुड़कानी की रेसिपी बताते हैं। भट्ट का नाम आपने अगर पहली बार सुना है तो आपको बता दें कि इसे ब्लैक बीन भी कहते हैं। मुझे भट्ट से बनी तीन रेसिपी का पता है आज पहली दो चीजें आपको बताते हैं, पहले बात करते हैं चुड़कानी की। 
भट्ट की चुड़कानी बनाने के लिये आपको चाहिये (Ingredients):
बनाने की विधि (तरीका):
1. भट्ट को एक रात के लिये पानी में भीगा कर रख दें
2. अब बनाने के लिये, कडा़ही में (लोहे की हो तो ज्यादा स्वाद आता है) तेल गर्म करें, गर्म होने पर इसमें साबूत जीरा डालकर भूने। जीरा जब हल्का भूरे रंग का दिखने लगे तो इसमें अब कटा हुआ प्याज डाल दें। प्याज को हल्का गुलाबी होने तक फ्राई करें। अब अगर आप मिर्चा चाहते हैं तो, साबूत मिर्चा को डाल कर हल्का फ्राई कर लें।
3. अब भीगे हुए भट्ट को कड़ाही में डाल लें, सिर्फ भट्ट डालें पानी को रहने दें। कुछ देर के फ्राई कर लें।
4. अब एक दूसरे बर्तन में चावल का आटा फ्राई कर लें, जब ये अच्छे से भुन जाये तो इसे कड़ाही में डाल दें।
5. इसमें अब हल्दी, जीरा, धनिया और नमक (अगर पाउडर वाली मिर्चा चाहते हैं तो वो इस समय मिलायें) मिला दें, कुछ सैकंड के लिये भुन लें।
6. अंत में इसमें पानी मिला लें और ऊँची आँच (high flame) में ढककर पकायें (भाप देकर भी पका सकते हैं)। तब तक पकायें जब तक भट्ट मुलायम नही हो जाते और करी थोड़ा गाड़ी नही हो जाती (लगभग 25-30 मिनट)। पकने पर भट्ट की चुड़कानी का रंग गहरा हरा लिये हुए काला (dark greenish black) आता है (अगर आप लोहे की कड़ाही उपयोग में लाते हैं तभी इस रंग को देखेंगे) अन्यथा इसका रंग काले की तरफ ज्यादा होगा।
बस अब चावल के साथ गरम गरम परोसें।
चलते चलते भट्ट की एक Quick snack वाली रेसिपी बताते चलते हैं, एक मुठ्ठी सूखे हुए भट्ट को (यानि इसके लिये भिगाने की जरूरत नही है, एक मुठठी से ज्यादा भी कर सकते हैं), तवे में या कड़ाही में भूने और भुने हुए भट्ट को स्नैक की तरह खायें। कुरमुरे भट्ट जहाँ चबा के खाने में स्वाद देंगे वहीं स्वास्थ्य के लिये पौष्टिक भी होंगे। भट्ट चबाने से मुँह की मांसपेशिया भी पुष्ठ होंगी। पसंद आने में ऐसे ही भुन कर खाते रहें।
17 Responses
mamta
January 29th, 2008 at 11:38 am
1आज तो कुछ नया ही देखने को यहां मिल रहा है।
आपकी रेसिपी पसंद आई।
क्या आप इन्हें बनाते है।
dr parveen chopra
January 29th, 2008 at 12:32 pm
2तरूण जी, कभी खिलवाओ तो बात बने। हां, उस दिन कमेंटंस माडरेशन एवं संबंधित जानकारी बेहद अच्छे ढंग से समझाने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। अब इस प्रकार का कोई संशय बिल्कुल नहीं रहा।
anuradha srivastav
January 29th, 2008 at 3:41 pm
3वाह अब तो बनाना ही पडेगा।
RA
January 29th, 2008 at 8:03 pm
4WOWWW!!!
धन्यवाद तरुण । हमारे घर में यह हफ़्ते में एक बार तो यह बनती ही है ।जन्बू से छौंक लगी चुड़कानी : ख़्याल से भी भूख लग गयी है।
कभी ’रस’ बनानें की विधि भी लिखी जाय |
manish
January 30th, 2008 at 2:38 am
5क्या गुरू? - पांडे जी ने मूली सानी - तुमने चुड़कानी ? कल हमने पालक का कापा चेपा (ब्लॉग में नहीं पेट में) बिस्वार सहित - मनीष
sanjupahari
January 30th, 2008 at 2:43 am
6Arey guru,,kyaa karte hoo….abhi pet bhar ke khana khaya…tumne fir se bhook laga dee,,,abhi kab invite kar rahe hoo fir CHUDKANI ke liye…kaas ye methos aap blog ki jagah ghar main aake ya bulake sikhaate ,,,chaloo hum INTZAAR karenge,,
sanjupahari
January 30th, 2008 at 2:47 am
7ohhoo maharaaj bhuni bhatt waal section chut pado…waah waah mauz aigo guru..>>
Tarun
January 30th, 2008 at 7:05 am
8@ममता, जी हाँ अक्सर बनाते हैं और स्वाद ले लेकर खाते हैं
@प्रवीण जी, मेहनत का फल हमेशा स्वादिष्ट होता है रेसीपी मैने बता दी अब अगर आप खुद बनाकर खायेंगे तो ज्यादा स्वाद आयेगा।
@अनुराधा, बना ही डालिये इस वीकेंड पर
@आरए, बात तो सही कही आपने, हमारे यहाँ भी अक्सर बनती है। जम्बू का तड़का तो जिसमें भी लगा दो स्वाद दुगना कर देता है, रस का नंबर भी आयेगा। इस बार होली पार्टी में एक पहाड़ी खाना भी हो जाये।
@मनीष दाज्यू, अकेले अकेले चेपे जा रहे हो, अच्छी बात नही वो भी विस्वार डला। कोई बात नही अब अगली बार हम पालक का कापा ही चेपेंगे, पेट में भी और ब्लोग में भी।
@संजू, कभी भी आ जाओ जब आओगे तब तो बनाना ही पड़ेगा ना। कभी इस तरफ आओ तो बता देना तुम्हे पहाड़ी खाना खिला ही देंगे।
dinesh
January 30th, 2008 at 9:31 am
9haan hum bhi banate hain.
pankaj singh mahar
January 30th, 2008 at 12:27 pm
10ओहो………….तार दा,
गजब रौनक आ गई ठेरी हो भट्ट की चुड़्काणी देख भेर, खाप में पानी आ गया हो महाराज……..आहा..लुवा की भदेली में त और ले बढ़िया होती है।
बहुतै निक काम करनोछा हो तरुण दा……पहाड़ी में कहो तो तारदा।
ghughutibasuti
February 7th, 2008 at 2:45 am
11तरुण , सच में मैंने अपने पहाड़ के अलावा कहीं भट्ट नहीं देखे । माँ के घर तभी बनते थे जब कोई पहाड़ से लाकर देता था । पर यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि इतने सारे कुमाऊँनी, उत्तराखंडी ब्लॉगि्ग में हैं । मनीष जी क्या ये अपने गीतों वाले हैं ? जम्बू को तो सूँघे भी सदियाँ बीत गईं ।
घुघूती बासूती
Tarun
February 7th, 2008 at 9:57 am
12@दिनेश, शुक्रिया
@पनदा, बिल्कुल सही कहने वाले हुए कहा तुम। हमने भी सही कहा ना, पनदा ही कहना हुआ तुम्हे पहाड़ी में
@घुघूती जी, ये मनीष हमारे हरी मिर्ची वाले हैं
अजित वडनेरकर
February 18th, 2008 at 4:02 pm
13भट्ट की चुड़कानी । वाह क्या बात है। खाना बनाने का शौक तो हम भी रखते हैं । कमबख्त शब्दों के सफर पर न निकले होते तो अब तक ज़ायके का सफ़र जैसा ब्लाग शुरु कर चुके होते ।
ये बताइयें कि भट्ट का राजमा परिवार का बीज है ? हरिद्वार से मंगवाते हैं। यहां भोपाल में तो शायद ही मिले । इसके कुछ और प्रचलित नामों का उल्लेख करें, शायद मिल जाए।
Ritu
February 22nd, 2008 at 12:51 am
14चलो एक और नई पहाड़ी रेसिपी का पता चल गया. जिस तरह कुमाऊ में ‘भट्ट की चुकरानी’ बनती हैं. हमारे यहाँ गढ़वाल में भट्ट की ‘भटौनी’ बनती हैं और वो भी बड़ी स्वादिष्ट होती हैं. फरक इतना हैं की हमारे यहाँ भट्ट को पहले भुनकर उसका पाउडर बना दिया जाता हैं फ़िर आप जब चाहे उससे ‘भटौनी’ बनाकर उसका स्वाद चावल के साथ लीजिये गरमगरम .
रीतू
Ritu
February 22nd, 2008 at 12:55 am
15चलो एक और नई पहाड़ी रेसिपी का पता चल गया. जिस तरह कुमाऊ में ‘भट्ट की चुडकानी’ बनती हैं. हमारे यहाँ गढ़वाल में भट्ट की ‘भटौनी’ बनती हैं और वो भी बड़ी स्वादिष्ट होती हैं. फरक इतना हैं की हमारे यहाँ भट्ट को पहले भुनकर उसका पाउडर बना दिया जाता हैं फ़िर आप जब चाहे उससे ‘भटौनी’ बनाकर उसका स्वाद चावल के साथ लीजिये गरमगरम .
रीतू
radha
March 4th, 2008 at 1:19 pm
16vah!!!!
hum log bhi bhatt ki chudkyani aur bhatt ke dubbuk bhi banate hai
meenu rawat
May 3rd, 2008 at 12:01 pm
17hi varun
yAAR batt ki cuttkani to mai bhi banti hu par, aaj tumshe esye banane ka ek nay tareeka pata chla es baar agar ghar mai banegi to tumhare bataye huye tarike se hi banugi
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