९ नवम्बर यानि कि उत्तराखंड राज्य के अस्तित्व में आने की वर्षगांठ, इस दिन शायद सारे राज्य में खुशियाँ मनायी जायेंगी। जाहिर सी बात है वर्षगांठ होगी तो जश्न स्वाभाविक है। लेकिन उत्तराखंड में कुछ घर ऐसे भी होंगे जो अपने परिजनों की कमी आज के दिन कुछ ज्यादा महसूस करेंगे। ये वो घर हैं जिनके अपने उत्तराखंड राज्य के आंदोलन में शहीद हो गये।

मेरी समस्त हिंदी चिट्ठाजगत की तरफ से इन शहीदों को अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि, सभी शहीदों को सत सत नमन।

अपनों से ही लड़ी, हमने अपने आंदोलन की लड़ाई,
अपनों ने ही तब, हम पे कुछ गोलियाँ चलाई।

औरतों की अस्मत, जब लूटने आये लूटेरे,
अपने तब कुछ भाई, सीना तान आगे आ डटे रे।

हो गये शहीद, आंदोलन में वो कुर्बान हो गये,
‘तरूण’, उत्तराखंडियों में वो नया जोश भर गये।

आओ इस बरस फिर, उनकी चिताओं पर चंद फूल चढ़ायें
याद करके उन शहीदों को, वर्षगांठ का ये जश्न मनायें।।

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विडियोः उत्तराखंड गाथा और नरेन्द्र सिंह नेगी लाइव - भाग 2
आज पेश है इस कड़ी का दूसरा भाग, अगर आपने ओम पर्वत और कैलाश देखना है तो इस विडियो को जरूर देखिये। एक पर्वत के ऊपर बर्फ से बनता है ओम, इसी से इसका नाम भी पड़ता है ओम पर्वत। उत्तराखंड गाथा अभी अगले भाग में भी जारी रहेगी। भाग १

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