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चक दे मैन मीर रंजन नेगी के साथ रजनीश की बातचीत

[अब तक तो शायद काफी लोग जान गये होंगे कि 'चक दे इंडिया' में शाहरूख वाला रोल पूर्व हाकी कोच मीर रंजन नेगी को लेकर लिखा गया था। उत्तराखंड समुदाय के सक्रीय मेम्बर रजनीश ने उनके साथ बातचीत करी। ये बातचीत यहाँ आप लोगों के लिये पेश है। इससे पहले ये क्रियेटिव उत्तराखंड की साईट पर प्रकाशित हो चुकी है।]

कहते है की कुछ लोग इस दुनिया में सदियों में एक बार होते है कयोंकी वो आम इन्सान से काफी हट कर होते है वो एक मिसाल बन जाते है एक प्रेरणा एक प्रकाश बन जाते है, वो प्रकाश जो कई सदियों तक लोगों को रास्ता दिखाता है एसी ही एक मिसाल है श्री मीररंजन नेगी, जिनका नाम आते ही आपको सरलता और सहजता का एहसास होने लगता है. आइये आज नेगी जी से मिलकर उनसे जीवन जीने का और जीतने का राज जानने की कोशिश करते है.

Q- आप उत्तराखंड में किस जगह से है?
Ans – मेरे पिता जी ओटला गाव जो की मचखाली Meer Ranjan Negi और अल्मोड़ा के बीच मे है और माता जी मेरी पौडी से है लेकिन मेरी परवरिश मध्य प्रदेश मे हुई है और पिछ्ले कई सालो से मे मुम्बई मे हूँ पर आप तो जानते है की मुझे प्रदेशों के नाम ना तो सुनाई देते है ना दिखाई देते है मुझे सिर्फ एक नाम सुनाई देता है INDIA

Q- आपको पहाड़ी व्यक्तित्व केसा लगता है?
Ans- मेरे हिसाब से पहाड़ी व्यक्ति बहुत ही सहज, ईमानदार और परिश्रमी होते है इसीलिये हम लोग आज भी अधिकतर सेना मे ही है जंहा सच की कद्र होती है. पर बड़ी ख़ुशी होती है ये देख कर की आज उत्तराखंड के लोग हर जगह आगे आ रहे हैं.

Q- आपने अपने जीवन में हॉकी ही कयों चुना?
Ans- ( हसते हुए) अब केयोंकी पहाड़ी ख़ून है तो मेरे अन्दर उर्जा ( Energy) बहुत थी हालंकि में ऐसे माहोल में पला बड़ा हूँ जंहा सिर्फ क्रिकेट का ही बोल-बाला था, पर में एक जगह खड़ा रहकर गेंद का इंतिज़ार नहीं कर सकता था तो जब मेने हॉकी खेलना सुरु किया तो मुझे लगा की अपनी उर्जा को में यंहा जादा अच्छे ढंग से लगा सकता हूँ, इसलिये मुझे फुटबाल, बेटबिनटन, टेबलटेनिस सुरु से बहुत पसंद था और इन सभी खेलो मे भी मेरा बहुत अच्छा प्रदर्शन रहा है.

Q- पहाड़ी संगीत सुनते है?
Ans- मुझे बहुत पसंद है लेकिन हम लोग सुरु से ही बहार रहे है तो बहुत जादा नहीं सुनपाए, फिर भी नरेंदर सिंह नेगी और गोपाल बाबु गोस्वामी के कई गाने सुने है..

Q- आपको नहीं लगता की उत्तराखंड सरकार कभी भी अपने खिलाड़ियों को या उन सभी लोगों को जिन्होंने ने देश दुनिया में नाम किया है ना तो उनकी सरहाना करती है, ना ही कभी उनके साथ कोई अपनेपन का बय्वाहार करती है?
Ans – हॉकी के खिलाड़ियों के साथ सोतेला बय्व्हार हमेसा से ही हुआ है चाहे वो कोई भी राज्य हो पूरे हिंदुस्तान में हॉकी के खिलाडियों को कभी भी सरकार ने अपनेपन की दृष्टि से नहीं देखा. उत्तराखंड में बहुत प्रतिभा जिनका लोहा आज दुनिया मान रही है लेकिन अगर आज कुछ लोग जो उत्तराखंड से है और देश दुनिया मे नाम कमा रहे है और उनके बारे में उत्तराखंड के लोग ही नहीं जानते है तो इसके लिए पूरी तरह से सरकार जिम्मेदार है जिसने कभी उन लोगों को अपनापन ही नहीं दिया जो बहुत दुःख की बात है.

Q- आप ने कुछ सोचा है उत्तराखंड के बारे में जो आप वंहा करना चाहते हो?
Ans- सबसे पहली बात तो में अपने लोगों से मिलना चाहता हूँ अपने लोगों के बीच आना चाहता हूँ और उत्तराखंड में हॉकी को आगे बढाना चाहता हूँ जेसे नैनीताल मे पहले एक टूर्नामेंट होता था जो टूरिस्ट को भी बहुत आकर्षित करता था, में उसको काफी बड़े स्तर पर करना चाहता हुं, इसके अलावा मेरा एक बेटा था “अभिरंजन नेगी” 19yrs का जिसकी एक सड़क दुर्घटना मे म्र्त्यु हो गई मैने उसके नाम से हॉकी फौंडरेसन बनाईं है जिसकी एक संस्था में उत्तराखंड में भी खोलना चाहता हुं, और चाहता हुं की उत्तराखंड के जवानों की जो उर्जा है उसको खेल के मैदान तक लाऊँ और देश को ऐसे खिलाडी दूँ जिन पर देश को नाज़ हो.

Q- जीवन के सबसे बुरे उतार चढ़ाव देखे है आपने, किसी भी इन्सान को तोड़ देने के लिए काफी था पर आपने केसे आपने आप को समय से जीतना सिखाया?
Ans – सच है की जो कुछ भी मेरे साथ हुआ वो किसी भी इन्सान को तोड़ देने के लिए काफी था यंहा तक की मेरे भी मन में कई बार आया की इस तरह के जीवन का क्या फायदा जब आप के साथ साथ आपके परिवार को भी जिल्लत उठानी पडे फिल्म ” चक दे इंडिया” में जो भी दिखाया वो सच्चाई से काफी दूर था, मेरे घर का पानी काट दिया बिजली काट दी, घर के सीसे तोड़ दिए पत्थर मारे और हर जगह गद्दार गद्दार की आवाजे लोगों ने यंहा तक कहां की एक – एक गोल का एक – एक लाख लीया है मैने. उस वक़्त मुझे लगा की लोग आत्महत्या कयों करते है लेकिन मेरे विरोध मे सिर्फ वो ही लोग थे जो मुझे नहीं जानते थे, बाकी मेरे परिवार ने और मेरे दोस्तों ने कभी मेरा साथ नहीं छोड़ा केयोंकी उनको विस्वास था मुझपे. केयोंकी अगर आप सच्चे है तो आप के लोग कभी आप का साथ नहीं छोडेंगे. फिर मुझे ये लगा की में तो एक खिलाडी हूँ और खिलाडी एक योद्धा [fighter] होता है और योद्धा का काम है लड़ना जब तक वो जीत ना जाये इस उम्मीद से में हमेशा परिस्थितियों से लड़ता रहा कयोंकि आखिरकार मे एक खिलाडी हूँ.

Q- 51 साल की उम्र है आपकी और आप [Sony TV] का एक शो कर रहे है “झलक दिखलाजा” बाकी सभी लोग आपसे उम्र में काफी जवान है, उसके बाद भी आपने इस चुनोती को स्वीकार किया क्या लगता है आपको?
Ans- सबसे पहले तो में ये बता देना चाहता हूँ की ये शो मेने पेसे या नाम के लिए नहीं किया, ना ही मेंने अपनी तरफ से कभी कोई इच्छा रखी की में एसा कुछ करु. अभी एक पत्रकार ने मेरे शो के बारे में लिखा की नेगी को वोट डांस की वजह से नहीं सीनियर सिटिजन की वजह से मिलेगा, जो की लोगों को अच्छा नहीं लगा अरे मुझे तो लगता है की आदमी की उम्र 45-50 के बाद से सुरु होती है मुझसे लोगों को उम्मीद थी की मे डान्स कर लूँगा और मुझे पता है की में कर सकता हूँ तो में कर रहा हूँ और लोग कहते है की में अच्छा कर रहा हूँ, जबकि इस फिल्ड में मै बिल्कुल नया हूँ..

Q- आप को उत्तराखंड सरकार से वंहा के लोगों से किस तरह की उम्मीदे हैं?
Ans- में वहा आना चाहता हूँ, अपने लोगों का प्यार चाहता हूँ मेरी दिली ख्वाइश है की अपने लोगों के बीच में रहूँ और वंहा की सरकार मुझे बुलाए कुछ करने का मोका दे ताकि में उत्तराखंड के स्पोर्ट्स के लिए कुछ कर सकूं. मुझे सिर्फ आप सभी लोगों से प्यार की उम्मीद हैं जो मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी. मुम्बई मे भी गढ़वाल भ्रात मंडल वालो ने मुझे “गड रतन” से सम्मानित किया जिसके लिए मे उनका आभारी हूँ.

Q- मीर रंजन नेगी इस नाम के पीछे कोई राज़?
Ans- मेरे पिता जी क्रन्तिकारी थे कम्युनिस्ट थे तो इस नाम का मतलब होता है शांति का दूत. वेसे मेरा बचपन का सतेंदर सिंह नेगी था आज भी घर में लोग मुझे सत्ती बुलाते है.

Question to Mrs Negi – किस तरह की यादे जुडी है उत्तराखंड से?
Ans- बहुत याद आती है कोई भी पहाड़ी सरनेम {Sur name} दिख जाता है तो लगता है की २ मिनट बात कर लेते, कंही पार्टी में भी जाते है तो अपना पहाड़ी गाना “बेडू पाको बारो मासा” और पहाड़ी डान्स भी करते है, बाल मिठाई , अरसे वंहा की ठंड सब बहुत याद आता है, यंहा तक की मैने अपने बेटे को बोला है की दोस्ती यारी अपनी जगह है पर शादी पहाड़ी लडकी से ही करना. मे दिल से चाहती हूँ की हमारे घर में पहाड़ी बहु आये.

Question to Mrs Negi- आपने भी नेगी जी के साथ कई बुरे वक़्त देखे है, तो ऐसी कोन सी चीज है नेगी जी के पास जिसके कारण हर बुरे वक़्त से नेगी जी जीत जाते है?
Ans- इनके अन्दर सहन शक्ति बहुत गजब की है, दूसरा मेने कभी इनको किसी का ग़लत करते नहीं देखा.

Question to Mrs Negi- 1982 में जब आप की शादी होने वाली थी उस वक़्त नेगी जी के ऊपर ज़माने भर के ग़लत इल्जाम लगाए गये तब आपके परिवार ने शादी का विरोध नहीं किया ?
Ans- तब सिर्फ हमारी सगाई हुई थी और में विशेस रूप से इनका मेच देखने दिल्ली गई थी पर कुछ कारणों से मे मेच नहीं देख सकी जिसका शुक्रिया में आज ऊपर वाले से करती हूँ वरना लोग मेरे कारण भी इनको बदनाम कर सकते थे, हमारे परिवार ने कभी इनसे कोई शिक़ायत इसलिये नहीं की केयोंकी हम लोग जानते है की नेगी जी केसे इन्सान है सिर्फ वो ही लोग नेगी जी को ग़लत बोल सकते थे जो कभी इनसे मिले ना हो या जिन्होंने मीडिया की बात पर भेड़चाल की तरह भरोसा किया हो..

Question to Mrs Negi – कहते है की जो इन्सान पूरी दुनिया के लिए अच्छा होता है वो घर के लिए बहुत अच्छा नहीं होता है? तो नेगी जी की कोन सी बाते है जो आपको पसंद नहीं है?
Ans- मुझे इनसे कोई शिक़ायत नहीं है सिवाए इसके की ये मेरा और बच्चो का समय भी बहार ही देते है एक दो दीन पहले ही मै इनको कह रही थी की जब से तुम झलक दिखलाजा कर रहे हो तब से तुम घर में भी झलक दिखाने के लिए ही आते हो..

Question to Mrs Negi आज जब सब कुछ वापस ठीक हो गया है तो किस चीज की कमी महसूस करते हो?
सबसे बड़ी चोट जो हमें मिली है वो हमारे बेटे की है ये हादसा १९८२ से भी बहुत बुरा था आज भी हमे उसकी बहुत कमी महसूस होती है.

Question to Mr and Mrs Negi क्या कहना चाहेंगे आप उत्तराखंड के लोगों से?
बस हम यही कहेंगे की आप ही लोगों के बीच के लोग है, हमेसा हमें आपके प्यार और स्नेह की जरुरत है…

Interview by: Rajneesh Agnihotri (core member CU-Myor Pahad)
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8 Responses to “चक दे मैन मीर रंजन नेगी के साथ रजनीश की बातचीत”

  1. समीर लाल Says:

    आजकल तो नेगी साहब झलक दिखला जा के सबसे एनर्जेटिक डान्सर बन कर छाये हुए हैं. कई बार देख चुका हूँ इनका डान्स.

    अच्छा लगा उनसे यह बातचीत का दौर.

    उनके बेटे के विषय में जानकर दुख हुआ.

  2. आलोक Says:

    मैंने चक दे नहीं देखी है पर नेगी जी को झलक दिखला जा पर देखा था। काफ़ी सरल स्वभाव के हैं। यह साक्षात्कार पढ़ के चक दे से संबंध पता चला।

  3. dinesh Says:

    baht achha laga mujae. i proud of all chak de india mambers.

  4. devinder Says:

    dear Nei sir

    i am a school physical teacher we want to invite you in our school as chief guest kindly send your residence address and contact no. . so personally i may come or our school authrity may to invite you for this function

    your truly

    devinder
    gymnastics coach

  5. Kunwar S.Gusain Says:

    Negi ji ko sadar pranam,chak de india, filmaane ke bad, ek hockey sitare ka naam aaj sabkijuban per hai , or o hain negi ji jo ke uttrakhand dev bhoomi ke sapot.hai

    humko bahut khushi hoti hai ki aaj ek uttrakahndi etna naam kama raha,
    maine apka intervue padha,bahut achchalaga,or asha karte hain kee aap upna garhwali bhaibhanduho sanikuch aage badhne kee raha dikhala. jan kee aapna bolee ki main bahut saal che mumbai ma randu, uphna uttrakahndi mumbai maa lakho kee sakhya maa chan. yah per anek mandal chana joki aapko nimantran denda chanda per aapko contact kaiee sanipatta ne cha.
    dhayabad.
    kunwar singh Gusain
    m,bai

  6. rajender Says:

    यो जनीक बहूत बदीया लगी मई राजेंदर प्रसाद पेत्वल तेहेरी गडवाल से मेल करनो च मैं एक चीज का बारा की नेवेस बी एश सईद पर दल्दीय नमस्कार जी ठुम्हरू शुब चिन्तक
    राजेंसेर prasad

  7. अनूप शुक्ल Says:

    नेगीजी का इंटरव्यू पढ़कर अच्छा लगा। उनके साथ हुये हादसे के बारे में जानकर बहुत खराब लगा। नेगी जी के परिवार को मेरी मंगलकामनायें।

  8. seemant suveer Says:

    मैं मीररंज नेगी को आज से नहीं बल्कि 1984 के पूर्व से जानता हूँ। बतौर पत्रकार मेरा उनसे इंटरव्यू लेना या बतौर पारिवारिक रूप से जुड़कर उनकी पत्नी विनीता की शादी करना आज याद आता है, तो लगता है यह कल की ही तो बात है। विनीता की माँ श्रीमती कांता रावत और मेरी माताजी श्रीमती सुशीला सुवीर की मित्रता 40 बरस पुरानी है और दोनों एक ही स्कूल में टीचर थे। मेरा जन्म कांता मौसी के सामने ही हुआ। विनीता को बचपन से देखा। जब उसकी सगाई की तो मौसी ने कहा तू तो पत्रकार है। पता तो लगा कि आखिर 1982 के एशियाड में हुआ क्या था? तब मैं स्वदेश अखबार में खेल संपादक था और 1983 में दैनिक भास्कर के इंदौर संस्करण से जुड़ चुका था। 84 में शादी हुई और बरात के स्वागत से लेकर विदाई तक का जिम्मा था। जब रिसेप्शन चल रहा था, तब बदमाशों ने लाइट गुल कर दी। स्कूटर-मोटर साइकिलों की लाइट में खाना हुआ। मुझे हँसी आती है और विनीता (मीररंजन नेगी की पत्नी) भी आज तक वो बात नहीं भूली की भाईसाहब ने मेरी शादी पर बिस्मिल्ला खान की शहनाई पूरे रिसेप्शन में बजवाई थी। मीररंजन उर्फ सत्ती ने 82 के एशियाड के कई राज बताए, जो सार्वजनिक करने के लिए नहीं है। यहाँ मैंने अपनी पत्रकारिता को ताक में रखा क्योंकि जानता था कि सच लिखने से बहुत बरबादी हो जाएगी। विनीता से मुंबई में बातें होती रहती हैं और आज भी वो बड़े भाई का सम्मान देती है। कांता मौसी में भी कोई बदलाव नहीं आया है। कोई स्टार डम नहीं आना ही मीररंजन की विशेषता है। पहाड़ी लोग मुझे बहुत अच्छे लगते हैं और ये साक्षात्कार भी तारीफे काबिल है। मेरी बहुत अच्छी दोस्त है सुनीता घिल्डियाल। देहरादून में रहती है और मेरे पारिवारिक संबंध है। मैं पहाड़ियों को बहुत पसंद करता हूँ। इस समय दुनिया के पहले हिन्दी पोर्टल http://www.webdunia.com में सहायक संपादक हूँ। नौ बरस से। नेगी परिवार का नाम पूरी दुनिया में रौशन हो यही दिल से दुआ निकलती है….

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।