अभी कुछ दिनों पहले उत्तरांचल एसोशियन आफ नार्थ अमेरिका का ९वाँ अधिवेशन संपन्न हुआ। “उत्तराखंड गाथा और नरेन्द्र सिंह नेगी लाइव” शीर्षक के अंतर्गत अगले कुछ पोस्टों (दिनों) तक इसी अधिवेशन के प्रोग्राम की झलकियाँ पेश की जायेंगी।

इस अधिवेशन में पहले आप देखेंगे, डा शेखर पाठक के व्याख्यान - “उत्तराखंड गाथा” और “अपने लोगों को तुम जानो, अपने गांवों को पहचानो” की कुछ झलकियाँ, उसके बाद लोकल बाल कलाकारों के सांस्कृतिक प्रोग्राम की झलकियाँ और अंत में नरेन्द्र सिंह नेगी और गिरीश तिवारी “गिरदा” की जुगलबंदी।

आज पेश है पहला भाग।

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ट्रैकिंगः पिंडारी, सुन्दरढूंगा और कफनी ग्लेशियर
किसी शायर ने बहुत पहले कहा था, 'सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ'। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजाय बस, कार या हवाई जहाज के अपनी ग्यारह नंबर की गाड‌ी से खूबसुरत नजारों के मजे लूटें जायें। नजारे भी ऐसे कि देखते ही मन कहे काश

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