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Valley of Flowers | फूलों की घाटी

उत्तरांचल, जहाँ एक तरफ बर्फ से ढकी ऊँची ऊँची चोटियां हैं वहीं दूसरी तरफ खुबसूरत वादियां, एक तरफ हैं सीढ़ीनुमा हरियाली समेटे खेत दूसरी तरफ गहरी गहरी घाटियां। लेकिन इन गहरी गहरी घाटियों के साथ एक ऐसी घाटी भी है जो अपने दामन में तरह तरह के फूलों को समेटे हुए है। ये घाटी फूलों की घाटी (Valley of Flowers) के नाम से विख्यात है।

भीड़भाड़ से दूर एक ऐसी सुंदर जगह जहाँ फूलों की सुगंध बिखरी रहती है, शहर की कोलाहल से दूर पंछी की चहचहाट घाटी के चारों ओर फैले जंगल से साफ सुनायी देती है। ये फूलों की घाटी गढ़वाल क्षेत्र के चमोली जिले में है। फूलों की घाटी पार्क (valley of flowers national park) भारत की राजधानी दिल्ली से ५९५ किमी दूर उत्तर-पूर्व के उत्तरांचल राज्य में स्थित है। इस घाटी का सबसे पहले पता ब्रिटिश मांउटेनियर फ्रैंक एस स्मिथ (Frank S Smith) और उनके साथी आर एल होल्डसवर्थ (R. L. Holdsworth) ने लगाया। जो इत्तेफाक से १९३१ में अपने माउंट कामेट की यात्रा करके लौट रहे थे। इसकी इंतहा खूबसुरत से प्रभावित होकर मि। स्मिथ वापस १९३७ में इस घाटी में वापस आये और फिर १९३८ में “Valley of Flowers” नाम से एक किताब प्रकाशित करवायी।

लेकिन अगर मनमोहन शर्मा की १९८५ में प्रकाशित इसी नाम की किताब की मानें तो इस घाटी में सबसे पहले भारतीय सेना में एक्सप्लोलर और एजुकेशन आफिसर कर्नल एडमंड स्मिथ के कदम पड़े, यही कोई १८६२ में। कदम चाहे जिसके भी पड़े हों लेकिन इस घाटी को प्रसिद्धि फ्रैंक स्मिथ की किताब से ही मिली। उन्ही की किताब से एक छोटा सा पैराग्राफ -

“I hope generously, my ignorance must judge for myself whether the Bhyundar Valley deserves its title the Valley of Flowers. Others will visit it, analyze it and probe it but, whatever their opinions, to me it will remain the ‘Valley of Flowers’ a valley of peace and perfect beauty where the human spirit may find repose”.

इससे ये तो पता चला कि लोकल रहने वालों के बीच ये भ्यूंडर घाटी ने नाम से जानी जाती थी (और है)। भ्यूंडर घाटी इसलिये क्योंकि यह भ्यूंडर गंगा के ऊपरी इलाके पर बसी है, फूलों की घाटी ८७.५ वर्ग किमी में फैली हुई है, घाटी से होकर बहती है पुष्पावती नदी। घाटी के एक तरफ है नर पर्वत तो दूसरी तरफ है रतबन पर्वत, नर पर्वत फूलों की घाटी को बद्रीनाथ घाटी से अलग करता है।

बर्फ के पिघलने के साथ ही फूलों का खिलना शुरू होता है लेकिन सबसे चरम समय होता है मध्य जुलाई से मध्य अगस्त तक। जंगली फूलों की लगभग ३०० किस्में यहाँ खिलती हैं जिनमें से कुछ हैं – Anemone, Braham kamal, Geranium, Marsh marigold, Prinula, Potentilla, Geum, Inula, Asters, Lilium, Ranunculus, Corydalis, Campanula, Pedicularis, Arisaema, Morina, Impatiens, Bistorta, Ligularia, Anaphalis, Saxifrages, Sibbaldia, Thermopsis, Trollius, Codonopsis, Dactylorhiza, Cypripedium, Strawberry, Epilobium, Rhododendrons।

फूलों के अलावा यहाँ तितलियों, कस्तूरी हिरनों (musk deer) भरल (blue sheep), हिमालयन भालू और चूहों, हिमालयन चिड़ियों की कुछ किस्में भी मिलती हैं। सितम्बर के बाद से फूलों की विदाई शुरू हो जाती है और फिर अगले ५ महीने तक फूलों की जगह बर्फ (बर्फवारी) ले लेती है। जाहिर सी बात है इतनी सुन्दर जगह के लिये सीधी पहुँच तो होगी नही लेकिन ट्रैकिंग के शौकीनों के लिये पहुँचना आसान है।

कैसे पहुँचेः
घाटी के रास्ते की शूरूआत होती है एक छोटे से कस्बे गोविंदघाट से, सिर्फ यहाँ तक आप बस मार्ग से भी आ सकते हैं। गोविंदघाट तक पहुँचने के दो रास्ते हैं – पहला ऋषिकेश-श्रीनगर-कर्णप्रयाग-जोशीमठ-गोविंदघाट, इस पूरे मार्ग की दूरी लगभग २७० किमी है। दूसरा तरीका है हल्द्वानी-रानीखेत-कर्णप्रयाग-जोशीमठ-गोविंदघाट और इस मार्ग की दूरी लगभग ३३२ किमी है। जोशीमठ से कुछ दूरी तक तो वो ही रोड है जो बद्रीनाथ को जाती है लेकिन कुछ दूरी से गोविंदघाट के लिये एक छोटी सी रोड अलग हो जाती है। गोविंदघाट से भ्युंडर गंगा के किनारे होता हुआ लगभग १३-१४ किमी का पैदल ट्रैक ले जाता है घंगरिया। घंगरिया से आगे ३ किमी चलने के बाद आती है फूलों की घाटी।

वहाँ जाने का उत्तम समयः
गर्मियों का समय वहाँ जाने के लिये सही वक्त है, खासकर जून से अक्टूबर के बीच। लेकिन सबसे उत्तम समय है अगस्त या सितंबर का महीना जब सबसे ज्यादा फूल खिले होते हैं।
रहने की जगह (यात्री निवास) रात में फूलों की घाटी में रूकने की ईजाजत नही है, लेकिन घंगरिया, गोविंदघाट और जोशीमठ में रहने के लिये होटल, लॉज, रेस्टहाउस हैं, सभी जगह साधारण सी ही व्यवस्था है। जोशीमठ और घंगरिया में राज्य द्वारा संचालित यात्री निवास भी है। घंगरिया में एक गुरूद्वारा भी है और वहाँ पर भी रहने का इंतजाम हो जाता है। ज्यादा जानकारी के लिये गढ़वाल मंडल विकास निगम (Garhwal Mandal Vikas Nigam) पर संपर्क किया जा सकता है।

फूलों की घाटी विडियोः


विडियो क्रेडिटः एममैनोबा
फोटोः गुगल ईमेज सर्च के द्वारा (व्यक्तिगत नाम उप्लब्ध नही)
मानचित्रः गुगल ईमेज सर्च (फिलहाल याद नही है)

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10 Responses to “Valley of Flowers | फूलों की घाटी”

  1. Amit Says:

    हम भी जाएँगे कभी और फिर अपनी नज़रों से दिखाएँगे कि कैसी लगतॊ है! :)

  2. devdutt Says:

    wonderfull pics, i m going to confirm my airticket 2day, hello Uttaranchal i cominggggggggggggggggggggggggggg

    dev..

  3. harish kumar Says:

    aap sabhi ka bahoot bahoot danhiya bad jo ki aapne vido ke saath hamara grdwal ki sunderta ko rakha hai musje bhot acha lagda ki hamara gardwal kitna accha hai.

    thanks
    harish kumar soniyal

  4. dinesh singh sajwan Says:

    manny manny thankes all of you

  5. ravin Says:

    Uttranchal is my born place i love uttranchal and it’s culture

  6. Swift Says:

    Hi,
    I belong to garhwal and while surfing on the net i incidently found this website. The website is beautiful but still need a little redesigning and restructuring. It is a nice concept to introduce uttaranchal to the world. The same is applicable to uttaranchal as well, though the beauty of uttaranchal is immense but the develop is very less. Which makes it unreachable to the many of the adventures places.

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    If you care to do so please give ideas and let’s work them out.

    Negi

  7. khasti ballabh Says:

    Phulo Se acchi Us Ki Khushbu,
    Kaliyo Se Pyari Uski Muskaan,

    Sitaro Sa Chamakta Hua Chehra,
    Koyal Si Meethi Zubaan,

    Chand Bhi Chhup Jaye Ye Keh K,
    Aasman Pe Ab Kya Mera Kaam,

    Chandni To Aa Nikli Zameen Se,
    Kaisi Hai Ye Qudrat Ki Shaan,

    Fursat Se Banaya Hoga Rub Ne,
    Farishto Ka Nahi Ye Kaam,

    Phulon Ne Bhi Hasrat Se Dekha Hoga,
    Pariyo Se Sunder Ye Utranchal ki shan.
    from
    khasti ballabh joshi

  8. raj joshi Says:

    mahan himalya jo bharat maa ka mukut hai

  9. chatar singh pundir Says:

    hmara uttranchl bhut achhi city hi

  10. vinodsemwal Says:

    i have belong to bharman cast in uttarchal but some reason we have belong to punjab i have always remeber in native in land of uttrachal so i have another advised that you have never forgive in our native land i have love in our uttrachal people
    and god bless in the person acha parnam

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

टिप्पणियों का शटर कुछ दिनों ही खुला रहता है। असुविधा के लिये हम से भूल हो रही है हमका माफी देयीदो, अच्छा कहो, चाहे बुरा कहो....हमको सब कबूल, हमका माफी देयीदो।