13 Jul
Posted by Tarun as कुमाऊँ, ट्रैकिंग, पर्यटन |
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किसी शायर ने बहुत पहले कहा था, ‘सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ’। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजाय बस, कार या हवाई जहाज के अपनी ग्यारह नंबर की गाडी से खूबसुरत नजारों के मजे लूटें जायें। नजारे भी ऐसे कि देखते ही मन कहे काश वक्त यहीं थम जाये। अगर नही सोचा तो सोच लीजिये क्योंकि हम आप को बताने जा रहे हैं एक नही बल्कि तीन ग्लेशियर की ट्रैकिंग के बारे में। क्या कहा आपने? आप ग्यारह नंबर की गाडी नही समझे़। अरे जनाब, ग्यारह नंबर की गाडी यानि अपने पैर जगन्नाथ (पैदल सवारी)।
हम आपको बतायेंगे - पिण्डारी (7-9 दिन का ट्रैक, ऊँचाईः 3353 मीटर, नंदाकोट और नंदादेवी पर्वत के मध्य स्थित), सुन्दरढूंगा (7-10 दिन का ट्रैक) और कफनी ग्लेशियर (7-9 दिन का ट्रैक) के बारे में।
कैसे पहुँचा जाये:
ये तीनो ही ग्लेशियर उत्तरांचल के कुमाऊँ क्षेत्र में आते हैं। सफर की शुरूआत दिल्ली मानकर चलें तो तीनों ही ग्लेशियर के लिये शुरू का आधा रास्ता एक ही है और उसके बाद अलग अलग, यानि कि शंकर जी के त्रिशुल के समान। पहले ये तीनों अल्मोडा जिले में आते थे लेकिन नया राज्य बनने के बाद ये बागेश्वर जिले के अन्तर्गत आते हैं। कफनी ग्लेशियर पिण्डारी ग्लेशियर के पूर्व में और सुन्दरढूंगा ग्लेशियर पिण्डारी के पश्चिम दिशा में पडता है, पिण्डारी से ही निकलती है पिण्डर नदी। पिण्डारी से कुछ और ज्यादा पश्चिम की तरफ जाने पर आता है नामिक ग्लेशियर जहाँ से निकलती है रामगंगा नदी। तीनों ही ग्लेशियर के लिये पैदल ट्रैकिंग शुरू होती है धाकुरी से।
ये लगभग 7-9 दिन का ट्रैक बनता है, सफर को अगर अलग-अलग दिनों में बाँटा जाये तो प्रोग्राम कुछ इस तरह का बनेगा - (जाहिर सी बात है इसमें आप अपनी सुविधा, ताकत और स्टेमिना अनुसार परिवर्तन करना चाहेंगे/कर सकते हैं)
दिन 1: दिल्ली - अल्मोडा, दूरीः 380 किमी, कैसे जायें - सडक द्दारा बस या कार से या फिर दिल्ली से काठगोदाम तक रेलगाडी और काठगोदाम से अल्मोडा तक बस द्दारा।
अल्मोडा - बागेश्वर, दूरीः 90 किमी (सडक मार्ग), रहने के लियेः प्राइवेट होटल, पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस , कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास। दिल्ली आइ. एस. बी. टी. (ISBT) से सीधे बागेश्वर के लिये भी एक बस जाती है।
दिन 2: बागेश्वर - सोंग, 40 किमी (सडक मार्ग), रहने के लियेः प्राइवेट होटल,
सोंग - लोहारखेत, 3 किमी (पैदल, ट्रैकिंग) , तक भी जा सकते हैं और फिर वहाँ से सीधे खाती।
दिन 3: सोंग - धाकुरी, 14 किमी (पैदल, ट्रैकिंग) ऊँचाई 2690 मीटर, रहने के लियेः पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस, कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास।
दिन 4: धाकुरी - खाती, 8 किमी (पैदल, ट्रैकिंग) ऊँचाई 2210 मीटर, रहने के लियेः प्राइवेट होटल, पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस, कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास।
खाती से सुन्दरढूंगा ग्लेशियर जाने का रास्ता अलग हो जाता है, यहाँ से सुन्दरढूंगा का ट्रैकः
दिन 5: खाती - जतोली, 7 किमी (पैदल, ट्रैकिंग), रहने के लियेः प्राइवेट होटल, पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस, कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास।
दिन 6: जतोली - खतलिया, 12 किमी (पैदल, ट्रैकिंग), रहने के लियेः गांव में कहीं या कैंपिंग साईट (कैंप)।
अगर वक्त इजाजत दे तो खतलिया से आप तीन जगह जा सकते हैं -
दिन 7: अ. खतलिया - मकतोली बेस कैंप, 5 किमी ( पैदल, ट्रैकिंग), रहने के लियेः कैंपिंग साईट (कैंप); मकतोली बेस कैंप - खतलिया, 5 किमी (पैदल, ट्रैकिंग),
दिन 7: ब. खतलिया - सुखराम ग्लेशियर, 7 किमी ( पैदल, ट्रैकिंग), रहने के लियेः कैंपिंग साईट (कैंप); सुखराम ग्लेशियर - खतलिया, 7 किमी ( पैदल, ट्रैकिंग),
दिन 7: स. खतलिया - सुन्दरढूंगा, 8 किमी (पैदल , ट्रैकिंग), रहने के लियेः कैंपिंग साईट (कैंप)।
खाती से पिण्डारी और कफनी ग्लेशियर जाने के लियेः
दिन 5: खाती - द्वाली, 11 किमी (पैदल, ट्रैकिंग) ऊँचाई 2575 मीटर, रहने के लियेः पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस, कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास।
कफनी ग्लेशियर के लियेः
दिन 6: द्वाली - कफनी, 12 किमी (पैदल, ट्रैकिंग), रहने के लियेः जगह देख के तम्बू गाडो/वापस द्वाली लौटें।
पिण्डारी के लियेः
दिन 6: द्वाली - फुरकिया, 5 किमी (पैदल, ट्रैकिंग) ऊँचाई 3260 मीटर, रहने के लियेः पी डब्ल्यू डी रेस्ट हाउस, कुमाऊँ मंडल विकास निगम का यात्री निवास।
दिन 7: फुरकिया - पिण्डारी ( जीरो प्वाइंट), 7 किमी (पैदल , ट्रैकिंग), रहने के लियेः वापस फुरकिया या द्वाली लौटें।
अब तक आप लोगों ने अंदाज लगा ही लिया होगा कि इन तीनों में सबसे आसान ट्रैक पिण्डारी का है क्योंकि रास्ता भी अन्य के मुकाबले अच्छा है और सुविधायें भी लगभग अंत तक हैं। पिण्डारी ग्लेशियर आकार में लगभग 3 कि.मी लम्बा और 1/4 कि.मी चोडा है।
कठिनता का मापकः ग्रेड 3बी (मध्यम, सामान्य )
3 का मतलब है - 5250 मीटर तक की ऊँचाई की ट्रैकिंग, ऊँचाई में रहने का अभ्यास, एक दिन में 6 घंटे तक का सफर, ट्रैकिंग का पिछला अनुभव कम से कम 1-2 टीम मेंबर को तो जरूरी हो, अच्छे स्वास्थ्य का होना जरूरी। बी का मतलब है कठिनता का लेवल मध्य (ठीक ठाक)।
अगर आप पहली बार जा रहे हैं तो कुमाऊँ मडंल विकास निगम के द्वारा संचालित टूर में ही जायें, उसके बारे में जानकारी आप यहाँ से ले सकते हैं।
फोटो क्रेडिट: गुगल ईमेज सर्च के द्वारा (व्यक्तिगत नाम उप्लब्ध नही)
मानचित्र: गुगल ईमेज सर्च (फिलहाल याद नही है)
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3 Responses
श्रीश शर्मा
July 13th, 2007 at 4:46 pm
1अच्छी जानकारी दी आपने, कभी जाना हुआ तो यह लेख काम आएगा।
anil
July 13th, 2007 at 5:03 pm
2wonderfull info and love explore this part of the world.
Prahlad Tadiyal
February 14th, 2008 at 4:39 pm
3es side ko dekh kar Pahar Ke yade taja ho gaye..
aaj bhi yaad ate hai waha gujree wo den…….
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