वैसे तो ये गीतों की बारी नही थी, लेकिन थोड़ा व्यस्त रहने के कारण जो लेख शुरू किया था वो पूरा नही कर पा रहा हूँ, इसलिये तब तक आप ये दो लोकगीत सुनिये। पहला है “पी जाओ पी जाओ मेर पहाड़ को” गोपाल बाबू गोस्वामीजी की आवाज में (कुमाँउनी बोली में) और दूसरा है “ठंडो रे ठंडो” नरेन्द्र सिंह नेगीजी की आवाज में (गढ़वाली बोली में)।

पी जाओ पी जाओः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
 

ठंडो रे ठंडोः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
 

डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।

...and here is one random article I picked for you:

पहाड़ी गीतः कैले बाजे मुरूली
अगर आपने शाहिद और करीना कपूर अभिनीत फिल्म का "ये इश्क हाय, बैठे बैठाये " सुना होगा तो शायद गौर किया हो (या ना किया हो) कि इस गीत के शुरू में एक पहाड़ी धुन बजती है। वो पहाड़ी धुन कॉपी है कुमाँऊ क्षेत्र के मशहूर गायक गोपाल बाबू के

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