उत्तरांचल पढने वाले सभी पाठकों को होली की बहुत बहुत शुभकामनायें और उन सभी उत्तरांचली बंधुओं को बहुत बहुत धन्यवाद जिन्होंने टिप्पणी के द्वारा होली की शुभकामनायें सभी के लिये दीं। आप सब की ये होली रंगों भरी और मस्ती भरी रहे। पिछली होली में मैंने एक आलेख कुमाउंनी होली के ऊपर लिखा था अगर आप उसे पढना चाहते हैं तो नीचे लिंक पर क्लिक कीजिये -

कुमांऊनी होली - संगीत और रंगों का त्‍यौहार | English version

जब हम छोटे थे तो पहाडों में होली बडे ही उत्साह से मनाते थे, हमारी होली लगभग एक हफ्ते पहले शुरू हो जाती थी, दिन के वक्त महिलाओं की बैठकी होली और रात को आदमियों की खडी होली। जिसमें हम चीर (होली की चीर, एक वृक्ष) के चारों ओर नाचते हुए पहले बहुत सारे गीत गाते और फिर भोजन, ये सब चलता रहता होलिका दहन तक। वैसे मैं बता दूँ हर दिन गाने वाले गाने अलग अलग होते थे, मुझे सारे तो याद नही लेकिन दो गानों की पहली पहली लाईने याद हैं। पहले वो पढिये साथ आप में से किसी को पता हो और फिर उसके बाद हिन्दी फिल्मों के होली के गीत के मजे लीजिये।

१. झनकारो, झनकारो, झनकारो, गोरी प्यारो लगो तेरो झनकारो
२. बलमा घर आयो, फागुन में, बलमा घर आयो फाहुन में

अब कुछ मेरी पसंद के होली के गीत आपकी खिदमत पेश हैं, शुरूआत करेंगे मन्ना दा की मदमस्त आवाज से फिर धीरे धीरे बढेंगे पुराने गानों से नये गानों की ओर।

(प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)  

होली रे होली
होली आयी होली
मारो भर भर के पिचकारी
होली के दिन
होली खेले रघुवीरा
कोई भीगा है रंग से
देखो आयी होली

अब मजा लीजिये होली के दो ऐसे गीतों का जो शायद बहुत ही कम बजते हों, पुराने गीत हैं सबको पसंद आने की गारंटी हमारी तो कतई नही है लेकिन गाने मधुर हैं।

आई आई रे होली
चुनर मोरी कोरी

और अब होली का ये गीत बिल्कुल ही अलग अंदाज में कैलाश खेर की सूफियाना आवाज में, बहुत ही मस्त गीत है

ऐ गोरी ऐ गोरी:

होली हो, रंग हो, मस्ती का माहौल हो और ये गीत ना बजे ऐसा हो सकता है क्या भला, कम से कम हमने तो ऐसा ही देखा है।

डिस्क्लेमर:होली के ये गीत सिर्फ होली का माहौल बनाने के लिये हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।

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