आज हम सुना रहे हैं ये गीत लेकिन दो अलग अलग तरीके से, जी हाँ पहले सुनिये बगैर म्यूजिक के ओरिजनल शेरदा ‘अनपढ’ की आवाज में इस गीत की एक झलक। फिर सुनिये इसी गाने का कमर्शियल या म्यूजिकल वर्जन। शेरदा कुमाऊँ में काफी प्रसिद्ध हैं, उनकी कवितायें और गीत काफी मधुर और सफल रहे हैं और ये नैनिताल में रहते हैं।

मान लीजिये कि आप बाजार से कुछ लेकर आये और जिस को दिया उसने कह दिया कि अरे ये क्या ले आये बस इस गीत में ऐसे ही कुछ भाव हैं। गीत के अंत में तय यही होता है कि अब बाजार कुछ लेने जायेंगे तो एक साथ।

बगैर संगीत केः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)  

संगीत के साथः (प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)  

और यहाँ ऊपर के दोनो गानों को एक फाईल में मिक्स करने का मेरा प्रयोगः  

डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।

Ye Dil Maange More, Get it right here
...and here is one random article I picked for you:

ट्रैकिंगः पिंडारी, सुन्दरढूंगा और कफनी ग्लेशियर
किसी शायर ने बहुत पहले कहा था, 'सैर कर दुनिया की गाफिल, जिन्दगानी फिर कहाँ'। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बजाय बस, कार या हवाई जहाज के अपनी ग्यारह नंबर की गाड‌ी से खूबसुरत नजारों के मजे लूटें जायें। नजारे भी ऐसे कि देखते ही मन कहे काश

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