वैसे तो हर साल अलग अलग लोगों को उनके विशिष्ट कार्यों के कारण ये अवार्ड दिया जाता है, इस साल भी दिया गया लेकिन इस बार इसमें उत्तरांचल के भी चार नाम शामिल थे। ये हैं - स्वर्गीय प्रोफेसर देविन्द्र राहिनवाल को उनके समाज कार्यों के लिये (यह इनको मरणोपरांत दिया गया), श्री खालिद जहीर को उनके समाज कार्यों के लिये, डा ललित पांडे पर्यावरण संरक्षण (इनवायरंमेंट प्रोटेक्शन) के लिये किये गये उनके प्रयासों के लिये और प्रोफेसर (डाक्टर) शेखर पाठक को साहित्य और शिक्षा के लिये दिये गये उनके योगदान के लिये। पूरी सूची आप यहाँ देख सकते हैं

इनमें से देविन्द्र राहिनवाल और खालिद जहीर, इनके बारे में मुझे ज्यादा कुछ मालूम नही है और ना ही इंटरनेट पर मिला। ललित पांडे उत्तराखंड सेवा निधि पर्यावरण शिक्षा संस्थान के डायरेक्टर हैं और ये संस्था उत्तरांचल के विकास के लिये काफी सक्रिय है। शेखर पाठक तो अपने आप में ही हिमालय का चलता फिरता विश्वकोश हैं, एक घुमक्कड जिसने पहाड का चप्पा चप्पा शायद पैदल ही छाना हुआ है। नैनिताल के रहने वाले लेकिन नैनिताल में कभी कभी दिखने वाले पाठक जी पहाड नाम की पत्रिका भी काफी सालों से अकेले निकालते आ रहे हैं।

इन सभी को उत्तरांचल और उत्तरांचल वासियों की तरफ से बहुत बहुत शुभकामनायें साथ ही साथ २००७ के समस्त पद्म अवार्ड विजेताओं को बहुत बहुत बधाई।

Ye Dil Maange More, Get it right here
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Interview: गढ़वाली सिनेमा के जनक पराशर गौढ़ के साथ बातचीत
गड़वाली सिनेमा के २५ साल पूरे होने पर हमने जा पकड़ा, पहाड़ी महिला के संघर्ष की कहानी कहती फिल्म "गौरा" और पहली गढ़वाली फिल्म "जग्वाल" के निर्माता पराशर गौढ़ को, और उनके साथ करी एक लंबी बातचीत। आज से उसी बातचीत का सिलसिला यहाँ शुरू कर रहे हैं। "मुश्किल नही है

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