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जल समाधि एक शहर की

हर व्‍यक्‍ति की जिंदगी में कुछ ना कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्‍हें वो अक्‍सर याद करता रहता है। किसी ना किसी शहर की कोई ना कोई गली ताउम्र याद रहती है क्‍योंकि उसमें कहीं उसका बचपन और बचपन की यादें दफन रहती हैं। और वो शहर तो सभी को याद रहता है जिस शहर में उसने इस दुनिया में पहली सांस ली हो। क्‍योंकि आप कोई भी महत्‍वपूर्ण फार्म भर रहे हों आपको अपना जन्‍म स्‍थान लिखना ही पड़ता है। लेकिन क्‍या कीजियेगा जब वो शहर जो आप की इन तमाम यादों को अपने में समेटा हो एक दिन जलमग्‍न हो जाये, आप की उन सारी यादों के साथ। कैसा लगेगा उन लोगों को जिन्‍हें अपना जन्‍म स्‍थान एक ऐसे शहर को लिखना पड़े जो दिखायी ना दे, जिसका अस्‍तित्‍व ही ना रहे, जो जल समाधि लेने को मजबूर हो जाय। ये कोई कहानी या कल्‍पना नही एक शहर का सत्‍य है और उस शहर का नाम है टिहरी गढ़वाल, उत्तरांचल राज्‍य के गढ़वाल क्षेत्र का एक प्राचीन शहर। जो सिर्फ लोगों की छोटी – छोटी यादें ही नही बल्‍कि एक प्राचीन इतिहास अपने में समेटा पानी के गर्भ में समा गया।

टिहरी रियासत के ६० वें राजा मानवेन्‍द्र शाह ने आजादी के बाद लोगों की इच्‍छा का सम्‍मान करते हुए भारत के साथ एक हो जाना कबूल कर लिया। इस तरह सन्‌ १९४९ में टिहरी राज्‍य को उत्तर प्रदेश में मिलाकर इसी नाम का एक जिला बना दिया गया। बाद में २४ फरवी १९६० में उत्तर प्रदेश सरकार ने इसकी एक तहसील को अलग कर उत्तरकाशी नाम का एक ओर जिला बना दिया।

इस शहर की किस्‍मत भी एक ऐसे बल्‍लेबाज की तरह है जो अपना दोहरा शतक बनाने से कुछ रन पहले ही आउट हो जाये। अपने २०० साल पूरे करने से १० साल पहले ही ये शहर भी भारत के नक्‍शे से गायब हो गया। जिस भागीरथी नदी के पानी को पवित्र मान यहाँ के लोग स्‍नान ध्‍यान करते थे आखिर में उसी नदी के पानी में यह प्राचीन शहर लीन हो गया। जिस तरह से भस्‍मासुर को मिला वरदान उसी के लिये अभिशाप हो गया था ठीक उसी तरह भागीरथी ( गंगा की एक मुख्‍य नदी, पौराणिक कथाओं के अनुसार भागीरथी ही वास्‍तव में गंगा है लेकिन भागीरथी और अलकनंदा के देवप्रयाग में मिलने के बाद ही गंगा के नाम से जाना जाता हैं) और भिलंगना जैसी दो विशाल और पानी से लबालब भरी नदियों के किनारे बसे होना ही एक दिन इसके लिये अभिशाप सिद्व हुआ।

दोनों नदियों के विशाल पानी के स्रोत को देखते हुए, सन्‌ १९७२ में यहाँ पर एक बाँध बनाना मंजूर हुआ। इसका निर्माण १९७८ से शुरू हुआ, सन्‌ १९८९ में टेहरी हाइडिल डेवलपमेंट कारपोरेशन की स्‍थापना इस बाँध की देखभाल करने के लिये हुई। टेहरी बाँध के आसपास कुछ छोटे- छोटे बाँध भी बन रहे है या बन चुके हैं। टेहरी शहर में बना मुख्‍य बाँध दुनिया का पाँचवा सबसे लम्‍बा ( या बड़ा, ८५५ फीट लम्‍बा) बाँध है। यह बाँध २४०० मेगावाट की बिजली ही नही पैदा करेगा बल्‍कि ६०००- ८७०० वर्ग किमी के क्षेत्र के लिये सिंचाई का पानी भी सप्‍लाई करेगा। इतना ही नही यह २७० मिलीयन गैलन पीने का पानी देहली, उत्तर प्रदेश और उत्तरांचल के राज्‍य ( और उसके शहरों) को देगा। मुख्‍य बाँध के पास बनने वाली पानी की झील का कुल क्षेत्रफल लगभग ४२ वर्ग किमी होगा। जिसका मतलब है टेहरी और उसके आसपास के ११२ गाँव का जल समाधि लेना और इनमें बसे १ लाख लोगों का दूसरी जगहों पर स्थानांतरित ( या विस्‍थापित) होना। बिजली की पहली यूनिट का उत्‍पादन जून २००६ में शुरू होने की संभावना (टारगेट) है।

इसके निर्माण के शुरूआत से ही कई आवाजें विरोध में उठी, जिसके चलते इसकी लागत और निर्माण समय बढ़ता गया। अब तक सारा टेहरी शहर एक पहाड़ की तलहटी से उठाकर दूसरे पहाड़ की चोटी पर बसा दिया गया है। लेकिन यह सब यहाँ के रहने वालों के मन में एक दुखद स्‍वपन की भांति हमेशा के लिये कैद हो गया है। भ्रष्टाचार, घूसखोरी के चलते कई सीधे सादे गाँव वाले और लोग घर से बेघर ही नही हुए बल्‍कि नई जगह विस्‍थापन की समस्‍याओं से भी उन्‍हें जूझना पड़ा। हमारे लिये यह बाँध प्रगति का प्रतीक है लेकिन उनका क्‍या जिनको इसकी कीमत चुकानी पड़ी। शायद इसीलिये किसी ने कभी कहा था, ‘कुछ पाने के लिये कुछ खोना पड़ता है’। अब क्‍या खोकर क्‍या पाया ये हमेशा ही शायद बहस का मुद्वा रहेगा या रहता आया होगा। इस शहर से जुड़ी अपनी यादों को पानी में डूबा देखने के लिये शायद मैं भी कभी फिर लौट के जाऊँ और कहूँ वहाँ ठीक उस विशाल झील के बीचों बीच कभी हम भी टहला करते थे।

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34 Responses to “जल समाधि एक शहर की”

  1. प्रेमलता पांडे Says:

    बलिदान व्यर्थ नहीं जाता है। मिटकर भी जीवनदाता है।

  2. अनूप शुक्ला Says:

    जिस शहर में रहे हों उसके हमेशा के लिये डूब जाने की याद बहुत दुख देती है।

  3. रजनीश मंगला Says:

    सचमुच बहुत दुख हुआ जानकर। क्या बाँध बनाना ही एक बिजली बनाने का उत्तम साधन है? न्युक्लियर पावर तथा सोलर पावर को क्यों इस्तेमाल नहीं किया जा रहा?

  4. हिमांशु Says:

    भईया,

    यह तो एक विवाद का विषय है.

    दुख की बात यह है लोग उन इंजीनियरों, और काम करने वालों को भूल जाते हैं जिन्होने बान्ध बनाने में अपना योगदान दिया है.

    एक बान्ध बनाने में कई लाख मानव वर्ष लग जाते हैं. कई लोगों की जान तक इसमें चली जाती है.

    पर लोग हमेशा एक पक्ष को ही देखते हैं: बवाल मचाने वालों को.

    “यह बाँध २४०० मेगावाट की बिजली ही नही पैदा करेगा बल्‍कि ६०००- ८७०० वर्ग किमी के क्षेत्र के लिये सिंचाई का पानी भी सप्‍लाई करेगा”

    शायद आप नहीं जानते की 2400 मेगावाट बिजली बिना कोयला जलाये पैसा करना कितनी बङी बात है. और इस बान्ध का पानी सदियों तक सिंचाई के लिये उपयोग में लाया जायेगा.

    कम से कम आप जब भी आप इस बान्ध को देखेंगे, अपना सीना ठोंक कर यह तो कह सकेंगे की आप के गांव वालों ने भी इसके लिये बलिदान दिया है.

    ऐसी चीजे इतिहास रचती हैं, और इस गौरव पूर्ण इतिहास में आपके गांव का नाम भी स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जायेगा.

  5. ratna Says:

    आपका दुख सच में दुखद है ।मैं रजनीश जी से सहमत हूँ ।

  6. तरूण Says:

    @प्रेमलता, @अनूपजी, @रजनीश, @हिमांशु और @रत्‍ना आप लोगों की टिप्‍पणी के लिये धन्‍यवाद :)

    @हिमांशु, ऐसा है कि वो इंजीनियर, और काम करने वाले सब मुफ्‍त में योगदान नही देते, इस काम का उनको पैसा मिलता है। उनका देश के योगदान में उतना ही हिस्‍सा है जितना कि किसी और व्‍यक्‍ित विशेष का। बाँध बनाने में जितनी जानें जाती है उतनी तो सीमा में रक्षा करते हुए शायद एक ही महीने में चली जाती हों, मैं यहाँ किसी का पक्ष नही रख रहा हूँ। ये बाँध क्‍या करेगा क्‍या नही मुझे सब मालूम है, मैंने सिर्फ ये बाँध ही नही इसकी बाकी सहयोगी ज्‍यादातर परियोजना देखी हैं और वो भी अंदर अंदर जाकर, और शायद आपने पढ़ा नही कितनी बिजली बनेगी किस को मिलेगी सब मैंने पोस्‍ट में पहले ही लिखा है। बलिदान और इतिहास की बात शायद हम आसानी से करलें लेकिन उन गाँव वालों को बेहतर न्‍याय मिल सकता था जो भ्रष्‍टाचार के चलते शायद ठीक से नही हो पाया।

  7. e-shadow Says:

    मै आपके दुःख में आपका सहभागी हूँ, पर विकास भी आवश्यक है, केवल भावुकता से तो जीवन नही गुजारा जा सकता ना। क्षमाप्रार्थी हूँ अगर आपको बुरा लगे।

  8. तरूण Says:

    भाई लोगों आप सब को ये कैसे लग रहा है कि मैं विकास का विरोधी हूँ लगता है आप लोग निठल्‍ला चिंतन नही पढ़ते। मुझे दुख है उन गरीब गाँव वालों के लिये चाहे वो टेहरी के हों या नर्मदा के आसपास के जिनको सही मुआवजा नही मिला। :(

    ई-छाया धन्‍यवाद :)

  9. vandy Says:

    good post.I personally know the ppl who lost their property in this dam.Imagine the school, bazaars,orchards,and their ‘home sweet home’ every things snached. BTW tarun hv u heard that song by Narendra SinghBist (??) where a father writes a letter to his son that this time come home for a long vacation as Tehri is going to drown…” I literally cried when I heard it.
    And abt engineers…they earned as much moneyas any PWD engineer EARNS.

  10. vipin panwar "nishan" Says:

    Bhai, kyaa kaam kiyaa hai aapne, u r simply great.

    bolne ke liye word hi nahin hai

  11. Renu Says:

    तरूण जी,
    अपनी जन्म भूमि से आपका लगाव स्वाभाविक है,अगर मछ्ली कॊ भी उसके जन्म स्थान से अलग कर दिया जाये तो वो भी मर जाती है। और हम जिस स्थान पर जन्मे है उस स्थान के साथ हमारी यादें जुडी होती है। और वह स्थान अगर ना रहे तो दुख होता है। मै आपकी भावनाओ की कद्र करती हूं ।

  12. bhargav pundir Says:

    Heloo me tihari garhwal ka rahne wala hu
    Thank i love tihari garhwal
    Bhargav

  13. vikas Says:

    855 ft. thiari bandh bana to 2400 megawatt electricity produce karne ke liye tha. par ek lakh logo ko beghar karne ke bad aj ye total electricty produce nahi kar pa raha. logo ko beghar karke hum vikas ke kis rup ko apne samne lana chate hai.

  14. PRAMOD KUMAR KAIRA Says:

    thanks a lot for the information about uttrakhand ,i m 1st time log in in this site. i hope you will give us to more information uttrakhand samaj riti or riwaj.
    thanks again

  15. Mahavir Says:

    yeah, i love my tehri and you have done a great job, aap ko salaam.

  16. shivani Says:

    This is a great site and I am proud of been born as a Kumaoni…
    In Our culture I have seen that
    people who are coming to Delhi and are a part of Delhi now, but they belong to Uttaranchal.
    I don’t know why they have a guilt feeling that they belong to uttaranchal region. A we can see how many of us communicate in Kumaoni or Garhwali in our homes Hardly 10 % of young generation can talk and understand Kumaoni and Garhwali Language please talk to your kids in your own mother tongue then gettinf influenced by other people in state……
    BE PROUD to B A PART OF INDIA WHICH HAVE BEAUTIFUL HIMALAYA RANGES… i AM PROUD OF BEING A KUMANOI ….. SO EVEY BODY SHOULD… YOU CAN GROW YOUR CULTURES IF YOU CAN GROW YOUR LANGUAGE….. JAI UTTRANCHAL…. JAI GYOAL DEVTA … JAI BADRINATH….

  17. jag Says:

    \
    ]

  18. chater singh suriyal Says:

    i love my tehri garhwal………………..

  19. chandan kumar Says:

    Tehari Bandh ke banane se nuksan sirf aapke past ka huwa hai mere kahne ka matlab ye hai ki agar kuch khokar bahut kuch mil jaya to aapka tyag bekar nahi jayega bus itna jarror chahunga ki 100000 logon ka tyaag Uttrakhand ke vikas mein kaam aana chahiye.
    Chandan

  20. Kamal Singh Sajwan Says:

    Dev Bhumi ko mera Sat Sat Pranam

  21. Kamal Singh Sajwan Says:

    mujhe apni Dev Bhoomi duniya ke sare ajoobon sa bahut pyari hain

  22. Deepak Karki Says:

    I Like this site and I am giving respect to this person who have created this website.
    I Love my Dev Bhoomi Uttranchal and I am feeling proud of me that I am attached with this Dev Bhoomi Uttranchal. I like the way of creating this website. I am Saluting the owner of this website.

  23. K.S.RAWAT Says:

    Namaskar!!!!

    PGG Family Get-Together Schedule for 25th November, 2007 at Garhwal Bhawan, New Delhi (from 10 AM onwards)
    Kindly note that:
    This time we are not going to charge any single penny from the group members for this get-together.
    Snacks will be served/provided to all the members “Free of Cost”. Like we did last year, all costs, involved for this get-together, will be borne by the Trustees & Board Members of the PG Group!.
    Here is One Suggestion from My Side:
    As is done in the 1st family get-together, our parents who are all +70 should be honoured by PGG. The old people have a gruge against the present generation that they do not take care of their parents. These old-people do not realise the ground realities of today’s world. Anyway, I am not casting reflection on anybody, but it was only my humble suggestion which if implemented then will bring us more closer.

    Who We Are: PG Group!

    We can’t think of anything other than working for Uttarakhand. We have a mad obsession about the welfare of Uttarakhandi society/community.

    http://www.paurigarhwal.com/
    http://pauri-garhwal-group.blogspot.com
    http://groups.yahoo.com/group/paurigarhwal

    K.S.RAWAT / NEW DELHI / UTTARAKHAND / UTTARANCHAL

  24. Gautam Says:

    मैं बहुत दिन के बाद किसी site पर अपना विचार लिख रहा हूँ . मैं पहले अपने बारे में आपलोगों को बताना चाहूँगा.
    मैं गौतम पाण्डेय एक s/w engineer हूँ. मैं अभी bangalore में कार्यरत हूँ और future में मैं राजनीति में जाऊँगा . मैं अभी भी राजनीति में लगभग आ चूका हूँ . मेरे दल का web site है http://www.bpd.org.in . मेरी पार्टी अभी UP में ज्यादा active है . मैं पार्टी से हट कर माँ गंगा को बचने में भी लगा हुआ हूँ. गंगा महासभा जो की मदन मोहन मालवी के द्वारा १९१४ में गंगा को बचने के लिए स्थापित किया गया था . अभी लोग इसी संघटन के साथ मील कर गंगा को बचने में लगे हुए है. इनका web site है http://www.gangamahasabha.org .
    अब मैं आपसे कुछ प्रशन करता हूँ –
    १. विकाश के नाम पर एक नदी की हत्या कंहा का न्याय है ?
    २. जो लोग बलिदान का बात करते है उनसे मेरा पूछना है की हमेशा गरीबो और लाचारों को ही क्यों बलिदान करना होता है .
    ३. आप २४०० MW बिजली की बात कर रहे है लेकिन अभी सिर्फ और सिर्फ २०० से ३०० MW ही बिजली बन रही है जो की २४०० MW के सामने कुछ भी नहीं है .
    ४. क्या गंगा प्रदूषित नहीं हो जायेगी , उसके धरा को रोकने से ?
    ५. क्या होगा हमारी सभ्यता का, जिसके हिरदय में माँ गंगा ही गंगा है, गंगा के विलुप्त होने के बाद…
    ६. और सब से अहम् बात की यदि टेहरी बांध टूट जाये तो ८ करोर लोग का अंत पल भर में हो जायेगा क्योकि टेहरी सिर्फ ८० किलो मीटर दूर है चीन से तो फिर इस आत्मघाती बम का निर्माण क्यों हुआ.

    अब हमलोगों का एक ही लक्ष्य है की माँ गंगा को जीवित कैसे रखा जाये, जो बन गया सो बन गया . हमलोग अगले साल गंगा सागर से गंगोत्री तक रथ यात्रा निकल रहे है गंगा को बचने के लिए.
    आपलोग सभी सादर आमंत्रित है

    बातें बहुत है जो मैं कह सकता हू लेकिन office में होने के कारन मैं अब पूरा नहीं कर पाया जो मैं आगे पूरा करुगा और गंगा महासभा के विचार को रखुगा

    धन्यवाद
    गौतम

  25. Tinku Rana Says:

    paili tumun boli haiji mo ka mena oun phir tumari chithi aayi baisekh ma aan apadu choutu jiya min kab tak samjhan tum ni aalya ghor min mat chali jaan

    ye hi feeling hoti hai uttrakhandi nari ki ki pati gaye perdesh our ghar ka koi ata pata

    bata godadi kya tero no cha bol borani kakh tero go ch.

    good by

    good after noon every body

    by

    thanks.

  26. Narain Dutt Pandey Says:

    Aap ka lekh mujhe pasand aaya, main iska samarthan karta hoo!
    Mein bhi Utrakhand ka hi rahne wala hoon.

  27. Shivnaresh "GANGA PUTRA" Says:

    har har Gange
    mokshdayni Ganga Maa ko bandh mein bandhne wale ek din aise bandhan mein bandh jayenge ki koi chhudane wala nahin hoga.
    Manushya yadi bhagwan ko maanta hai to jaroor janta hoga ki kalyug mein dravya roop mein matra ek hi shakshat dev “MAA GANGA” hai. Haal hi mein Shri Gangotri yatra ke dauran Maa ki durdasha dekh aankhon mein pani aagaya. Jisne apni Maa ka gala ghotne ka fanda taiyar kiya use moksh kaise milega.

  28. Mohan Says:

    Dear Tarun ji or sabhi uttranchali bhai logo ko mera saadar namaskar,
    me almora distt. ranikhet k najdeek 1 gaon k runi chhain. uttranchal side kuchh dino bati dekhan suru karo. tehari dam bar main jyada jankari n chhi.
    aaj ye lekh pad k kafi jankari prapt hoi gay.
    dhanybad.

  29. Rakesh joshi Says:

    Mr.
    Tarun aapni janm bhoomi ko shayad hi koi bhool pata he, aapka dard jayaj hai

  30. rajendra pundir Says:

    hi hello my name rajendra singh pundir.i am belong to tehari garhwal.I love very much to uk.i read some comments of abou lists i feels so proud. thank you

  31. chatar singh pundir Says:

    hi hello may name CHATAR SINGH PUNDIR .pungagu to tehari gardwal uttrakhand

  32. chatar singh pundir Says:

    hi hello may name CHATAR SINGH PUNDIR .pungagu to tehari gardwal uttrakhand

  33. chatar singh pundir Says:

    hi hello may name CHATAR SINGH PUNDIR .pungagu to tehari gardwal uttrakhand

  34. chatar singh pundir Says:

    hi ……

बड़ी देर कर दी, मेहरबाँ आते-आते

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