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कुमांऊनी होली – संगीत और रंगों का त्‍यौहार

March 7th, 2006 | 16 Comments | Posted in त्‍यौहार

फाल्‍गुन के महीने होली का आना अक्‍सर मुझे ले जाता है बहुत पीछे बचपन की उन गलियों में, जहाँ न कोई चिन्‍ता थी और ना ही नौकरी का टेंशन सिर्फ मस्‍ती और हुड़दंग। अपने जीवन की अधिकतर मस्‍त होली मैंने अपने बचपन में ही मनायी और वो भी अपने ‘नेटीव प्‍लेस’ उत्तरांचल में। यहाँ की होली अपने आप में अनुठी होती है, क्‍योंकि यहाँ होली संगीत का उत्‍सव पहले है, रंगों का बाद में। चाहे वो बैठकी होली हो, या खड़ी होली और या फिर महिला होली।

मुझे अब भी रंगों से भरे वो गुब्‍बारे याद हैं जो अक्‍सर हम एक दूसरे को मारा करते थे, हमारे मोहल्‍ले में आने वाले भी इन गुब्‍बारों की मार से नहीं बच पाते। होली के दौरान हम एक ओर मजेदार खेल खेला करते थे। हम एक रस्‍सी या धागे से एक लोहे की खुंटी (हुक) लगाते और फिर कुछ बच्‍चे छत में जाकर एक छोर थामे रहते और कुछ नीचे सड़क में खुंटी लेकर इंतजार करते रहते, उन आदमियों का जो सिर पर टोपी पहने हमारे सामने से गुजरते। जैसे ही ऐसा कोई मुर्गा आता, कोई ना कोई जाकर उस हुक को उसकी टोपी में फंसा देता, इससे पहले कि कोई सोचे क्‍या हुआ, उसकी टोपी हवा में। कुछ लोग पहले गुस्‍सा दिखाते फिर वो भी इसका मजा लेते। हमारे ज्‍यादातर शिकार नेपाली डोटियाल (कुली) या फिर हुलियार (कुमांऊनी शब्‍द है, होली गाने वाले व्‍यवसायिक और प्रशिक्षित गायक, जो चुड़ीदार पायजामा, कुर्ता और सिर पर ट्रेडिसनल कुमांऊनी टोपी लगाये रखते हैं) होते थे। लेकिन अब ऐसे दिन कहाँ। अब कुछ कुमांऊनी होली के बारे में।

बैठकी और खड़ी होली में मन को लुभावने वाले बोलों से भरे गीत गाये जाते हैं। ये गीत मुख्‍यतया क्‍लासिकल राग पर बेस्‍ड होते हैं। बैठकी होली की शुरूआत किसी मंदिर के आँगन से होती है, जहाँ हुलियार और काफी सारे लोग होली गाने को इकट्‍ठा रहते हैं।

होली से लगभग एक महीने पहले से, उत्तरांचल की वादियों में होली के गीतों की आवाज सुन सकते हैं, जहाँ लोग रात को आग के चारों ओर बैठ कर स्‍पेशियल होली के गीतों (कुमांऊनी बोली के गीत) को गाते हुए सुने और देखे जा सकते हैं।

लोकल परंपराओं के अनुसार, होली से ठीक एक सप्‍ताह पहले शुरूआत होती है, कुमांऊनी ‘खड़ी होली’ की। जिसमें लोग गाने के साथ-साथ हुलियारों और अपनी आवाज की धुन में थिरकते दिखायी देते हैं। यह सब रात के वक्‍त चीर (होलिका दहने के लिए लाया गया पेड़, जैसे क्रिसमस ट्री लगाया जाता है) के चारों ओर नाच गाकर मनाया जाता है।

और फिर अंतिम दिन (दुलहेंदी के पहले की रात) उस चीर को जलाया जाता है, जिसे होलिका दहन कहते हैं। उस दिन देर रात तक नाच गाना चलता रहता है। इसी सप्‍ताह होली के समुह जगह-जगह जाकर होली गाकर चंदा इकट्‍ठा करते रहते हैं। और फिर दुलहंदी के दिन मचता है, धमाल तरह तरह के रंगों का, मिठाई, गुजिया और भांग (एक पेय पदार्थ जो केनाबिस बीज से बनया जाता है) का।

संक्षिप्‍त में कहा जाय तो, खुशी और मस्‍ती का ही आलम होता है होली के दौरान। ढोलक और मंजीरे की तान में नाचते गाते लोग कुमाँऊ की सड़कों में, मोहल्‍लों में आसानी से देखे जा सकते हैं। ऐसा लगता है जैसे बच्‍चे, जवान, बुढ़े, आदमी, औरत सभी अपने आप में क्‍लासिकिल गायक हों। जैसे मैंने पहले कहा होली के दौरान गाये जाने वाले गीत न सिर्फ रागों में बेस्‍ड होते हैं बल्‍िक उनके गाने का भी स्‍पेशियल वक्‍त होता है। उदाहरण के लिए, दिन के वक्‍त वो ही गीत गाये जाते हैं जो कि पीलू, भीम पलासी या सारंग राग में बेस्‍ड होते हैं जबकि शाम का वक्‍त होता है कल्‍याण, श्‍याम कल्‍याण और यमन राग पर बेस्‍ड गीतों का।

काश फिर कभी मैं किसी होली में जाकर देख पाता कि अभी भी वो मस्‍ती, गीत और मदहोशी का आलम वैसे ही बरकरार है या फिर वक्‍त के साथ कहीं खो गया है।

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16 Responses to “कुमांऊनी होली – संगीत और रंगों का त्‍यौहार”

  1. hiren Says:

    आप का यह लेख पड कर बहुत अछा लगा और बहुत कुछ जानने को मिला!
    मै पिछ्ले काफी दिनो से हिन्दी के आलेख ढुन्ढ रहा था! और यह भी कोशीश कर रहा था कि हिन्दी को कैसे इस्तेमाल किया जाये बिना किसी बद्लाव के अपने कोम्पयुटर मे! आखिर कुछ दिनो की मेहनत रंग लाई और मुझे हिन्दी मे लिख्ना आ गया है. अब मै अंग्रेजी का कीबोर्ड इस्तेमाल कर के हिन्दी मे लिख सकता हुं!

    और अब मै भी अपना योगदान दे पाऊंगा कुछ हिन्दी के लेख लिख्ने मे.

    आभार
    हिरेन

  2. Rohit Dhaundiyal Says:

    Hi Dadda,
    Good Job done. Just went through few sections of your website. Keep it up. Nice one

    Regards
    Rohit

  3. vandy Says:

    Hi tarun .
    Wonderful way to celebrate holi..and They sang songs based on ragas…I didn’t know that.
    U really must hv had great time…
    PS: I wish I knew how to post in hindi :-(

  4. नरेश नौगाई Says:

    महोदय नम्स्कार
    आपका यह आपका प्रयास काफी सराहनीय है

  5. Devendra sanwal Says:

    I am from Uttarnchal into software business and would like to meet uttaranchli people.
    thanks
    Devendra

  6. bhuwan phulara Says:

    it is an god worked

  7. bhuwan phulara Says:

    main utranchal ka hon aur yahan apne login ki baaton ko padh kar bahut khushi hoyi hai.
    yeh ek achcha prayas hai.

    tahnks bhuwan

  8. vinod fulara Says:

    hi, i also belong to kumaoon I really surprised to listen the song thru on line. It is good job to tell our history, culture, riti rivaz thru online. Keep it up lage raho you are going to right way.

    vinod fulara

  9. PRITHVI Says:

    APNE LOGO KI BAATO KO PADH KAR BUHAT KUSHI HOYI HAI

    GOOD KEEP IT UP

    FROM PRITHIV (PAPPU) FROM UTTARNCHAL
    IN DELHI

  10. Narayan Pandey Says:

    होली की आप सभी लोगो को नारायण पाण्डेय , अल्मोरा दांया की तरफ़ से शुभकामना

    नारायण पाण्डेय
    चंडीगढ़

  11. Kewal Joshi Says:

    Excellent work !!! A Hearty Congratulaions !!
    I would appreciate if you could please tell me how can I get the collection of songs related to Holi?

  12. Jay Prakash Kandpal Says:

    kumoni logu ko holi kee hardik subh kamnai

    Jay Prakash Kandpal(Jagga)
    Delhi

  13. हितेश उप्रेती Says:

    गूगल में सर्च करने में इस साईट तक पहुचा हूँ.
    सर्च हिरेन जोशी , अल्मोडा की कर रहा था.
    यहाँ पर श्री हिरेन जोशी का एक रिस्पांस है. अगर यह मैसेज हिरेन जी को मिले तो मुझे hitesh.upreti@gmail पर संपर्क करें.
    धन्यवाद !

    हितेश उप्रेती

  14. Hemant Singh Says:

    Mera Uttarakhand ———

    Hello Mere pyare Dosto

    Mai Hemant Singh —–

    Aaj kal log apane Uttrakhand ka culture ko bhulkar deshi culture ko apna rahe hai. Or apane Bachho ko bhi Galat salah de rahe hai ki tum bhi deshi culture rahane ko kah rahe hai. mujhe dukha hota hai jab hamare Uttrakhand ke log apane culture ke bare mai hi nahi jante. ———

    Yahi bat apne aap mai badi dukha ki hai ——–

    Mera Village —————”Naubara’

    I want to tell all of you about my village “Naubara”. My Village is very beautiful and very good. Every person lives in harmony . Naubara is a very big village of the area. there are many people who are educated. There are 22 caste living in Naubara. This village is situated in hills of Naithana Devi Mandir. There is a small market where everything is available. More than one hundred families live there. This temple is very famous in Almora district. There is an Inter college in the area named G.I.C. Uttam Sani. Uttam Sani is a famous school of the Almora district. More then four hundred students read there.

    Hemant Singh ————

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