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Uttarakhand Relief: साथी हाथ बढ़ाना साथी रे

उत्तराखंड में बाढ़ और भूस्खलन से आयी तबाही से अब तक तो सभी अवगत हो गये हैं, विभिन्न समाचार पत्रों और टेलीविजन के माध्यम से इतना कहा और दिखाया जा चूका है कि मेरा कुछ कहना कम ही होगा। आज इतने महीनों बाद कुछ लिखने कहने का मकसद उत्तराखंड में आपदा की मार झेल रहे [...]

[ More ] June 26th, 2013 | Comments Off | Posted in Announcement, Uttarakhand News |

जाड़ों की नर्म धूप और …

दुनिया के इस कोने से उस कोने तक मौसम की ऊठापटक जारी है और ऐसे ही इस साल के जाड़ों में हर सप्ताह पड़ने वाली बर्फवारी के बीच एक सुबह की खिली खिली धूप ने याद दिलायी, इस गीत की – दिल ढूँढता, है फिर वो ही, फुरसत के रात दिन। और इस गीत की [...]

[ More ] January 21st, 2011 | 14 Comments | Posted in Uttarakhand's Life |

कुमाऊँनी कवि शेरदा अनपढ़ का कविता पाठ

क्या आप जानते हैं ग्राम सभा, विधान सभा और लोक सभा किसे कहते हैं? अगर नही तो इस पोस्ट को जरूर पढ़िये। शेरदा अनपढ़ कुमाऊँ क्षेत्र के बहुत प्रसिद्ध कवि हैं, इनकी दो कवितायें (O Parua Boju and, Mat Maro Mohana Pichkari) मैंने आपको पहले सुनवायी थी। आज यू-ट्यूब में घूमते घूमते कुछ और मिल [...]

Holi: क्या हम अपनी पारम्परिक होली को फास्ट फारर्वड करते जा रहे हैं?

मेरा ये मानना रहा है कि हमारी संस्कृति को सबसे बड़ा खतरा बाहर के लोगों से नही बल्कि अपनों से होता है। अगर ऐसा नही होता तो काँटा लगा माफिक पुराने गीतों की मिक्सिंग गोरे कर रहे होते लेकिन ये रिमिक्स की अंधी दौड़ अपन लोगों ने ही शुरू की। दरअसल आजकल गीत आडियो के [...]

[ More ] February 26th, 2010 | Comments Off | Posted in गीत और संगीत, त्‍यौहार |

पिथौरागढ़ः एक शहर जो अब भी याद आता है – ४

पिथौरागढ़ पर पिछला अंक लिखे जमाना हो गया शायद भूल गये हों बात कहाँ से शुरू करके अंत में कहाँ छोड़ी थी। आज मैं बता रहा हूँ पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जाये और उसके आसपास के दर्शनीय स्थलों के बारे में। पिथौरागढ़ कैसे पहुँचा जायेः यहाँ या तो टैक्सी से पहुँचा जा सकता है या बस [...]

[ More ] January 18th, 2010 | 1 Comment | Posted in कुमाऊँ, पर्यटन |

कुमाँऊनी गीतः रंगीली चंगीली पुतई कैसी

मुझे एक ईमेल/टिप्पणी आयी जिसने मुझे नींद से जगाने का बिल्कुल वैसा ही काम किया जैसा काम इस गीत का नायक नायिका को जगाने के लिये चाय से करवाना चाह रहा है। अगर आपकी शादी हो गयी हो तो शायद आपने भी कभी कोशिश की हो अपनी श्रीमति को जगाने की। शायद श्रीमति की शान [...]

[ More ] August 25th, 2009 | Comments Off | Posted in कुमाऊँनी संगीत, गीत और संगीत |

कुमाऊँनी लोकगीतः ओ भिणा कसके जाणूँ द्वरहटा

कुमाँऊ का ये एक बहुत प्रसिद्ध लोकगीत है, मुझे याद है बचपन में स्कूल में हमने इस पर डांस भी किया था। ये गीत जीजा साली के बीच हो रहे संवादों से बना है। रानीखेत से आगे एक जगह पड़ती है द्वाराहाट, जहाँ हर साल मेला लगता है (पहले लगता था इसलिये कह सकता हूँ [...]

कुमाँऊनी होली: गीत-संगीत और रंगों का त्‍यौहार

[Whenever holi comes it take me down to memory lane, way back when I was kid. Most of the best holi I ever had when I was a kid and all those holi I celebrated in my native place (Uttaranchal/Uttarakhand). It’s unique because the Kumaoni Holi lies in being a musical affair, whether it’s the [...]

पहाड़ी गीतः अल्खते बिखौती मेरी दुर्गा हरे गे

गोपाल बाबू गोस्वामी जी की आवाज में सुनिये ये मधुर और प्रसिद्ध कुमाऊँनी गीत। ये गीत एक पति द्वारा अपनी पत्नी दुर्गा के लिये गाया गया है। ये दोनों पति और पत्नी पग डंडियों पर मस्त होकर छेड़ छाड़ करते हुए द्वाराहाट के स्याल्दे बिखौती के मेले में घूमने के लिये जा रहे हैं लेकिन [...]

पहाड़ी गीतः स्वर्गतारा जुनली रात

इस गीत के बारे में पहली बार मैंने यहाँ अमेरिका में एक पहाड़ी गेट-टुगेदर में सुना था और वहीं सुना भी जब कुछ लोगों ने मिलकर गाया। अभी इंडिया गया था तो मुझे वहाँ ये गीत मिल गया लेकिन इस गीत से जुड़े कलाकारों का नही मालूम। अगर किसी को मालूम हो तो जरूर बतायें। [...]

मकर संक्रान्तिः घुघुतिया और मेले ही मेले

जनवरी माह में उत्तर भारत में मकर संक्रान्ति, दक्षिण में पोंगल और पंजाब में लोहड़ी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर में उत्तराखंड में एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है, कुमाँऊ में अगर आप मकर संक्रान्ति में चले जायें तो आपको शायद कुछ ये सुनायी पड़ जाय – काले कौव्वा, खाले, [...]

वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 22 Comments | Posted in Uttarakhand's Life |