07 May
Posted by Tarun as सामान्य
Tags:Pledge to help and Save Life of Hearth Patient from Uttarakhandआज इस ब्लोग के माध्यम से सभी हिन्दी ब्लोगरस और उत्तरांचल के पाठकों से उत्तराखंड के एक बच्चे की मदद के लिये विनम्र अपील करना चाहता हूँ। ये 13 साल का बच्चा मास्टर आलोक उत्तराखंड के एक गाँव से है और इसके दिल में प्रोब्लम है जिसके चलते इसका आपरेशन करना जरूरी है। आपरेशन करने के लिये दिल्ली के अपोलो अस्पताल ने हामी भर दी है और इसका पूरा खर्च 1.5 लाख रूपया है लेकिन अस्पताल 1.25 लाख रूपये जमा कर देने पर आपरेशन शुरू करने को तैयार है।
अंतिम अपडेट मिलने तक पौड़ी गढ़वाल ग्रुप ने अभी तक 31,500 रूपये जमा कर लिये हैं, यहाँ अमेरिका के ट्राई स्टेट क्षेत्र में भी कुछ परिवारों ने मिलकर अभी तक लगभग 1440 डालर इकट्ठे कर लिये हैं। यानि अभी भी कुछ हजार रूपये कम पड़ रहे हैं।
Alok belongs to Devli Goan near neel kanth and his fathers full name is Trith Bharti and his brother name is prasanna bharti.
One person among us spoke to all of them including Alok, he seems to be a very exciting kid.Just 13 years old and he has one artery blocked so the supply of oxygen is limited to his heart. He spoke to his father and he said he is critical and only one side of his heart is working.
पहले सुना था बूँद बूँद से सागर भर सकता है आज देख भी लिया कि वाकई ऐसा हो सकता है अब आप लोगों से भी निवेदन है इस बच्चे की हँसी लौटाने के लिये छोटी सी एक बूँद की। ये बूँद हर शुक्रवार के दिन बाहर होटल में होने वाल लंच हो सकती है या आफिस के कोने की चाय-काफी की दुकान में हर दिन पीने वाली चाय। ये बूँद विकेंड में थियेटर में देखी जाने वाली मूवी हो सकती है या फिर ऐसा वो रूपया जो एक दिन के लिये बजाय अपने पर खर्च करने के किसी और पे खर्च किया जाय।
यहाँ से अगले सप्ताहंत तक पैसा भेजने का प्लान है, अगर आप में से कोई जो अमेरिका से इस अपील को पढ़ रहा है और कुछ चंद डालर इस नेक कार्य के लिये देना चाहता है वो चाहे तो हमारे मार्फत ये पैसा भिजवा सकता है और या फिर डायरेक्ट वायर ट्रांसफर करके वहाँ बैंक में जमा करवा सकता है। टिप्पणी के द्वारा आप ये बता सकते हैं, मैं आपको इंडिया के बैंक का या यहाँ कहाँ चैक भेज सकते हैं उस जगह का पता मेल कर दूँगा।
और अगर आप अमेरिका के बाहर से ये पढ़ रहे हैं तो या तो सीधे बैंक में वायर ट्रांसफर कर सकते हैं या फिर भारत में अपने किसी परिचीत के मार्फत पैसा भेजवा सकते हैं। छोटी से छोटी मदद उस बच्चे को एक नया जीवन दे सकती है।
आप चाहें तो पौड़ी ग्रुप के के एस रावत जी से फोन पर संपर्क करके अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और या फिर सीधे उस बालक के पिता से भी फोन पर बात कर सकते हैं। कई बार परिस्थितियाँ ये इजाजत नही देती और आदमी चाहकर भी पैसे के द्वारा मदद नही कर पाता ऐसे में कई बार आदमी की दुआ भी दवा का काम कर जाती है या ऐसे सोर्स दिखा देती है जो मददगार सिद्ध होती है, इसलिये दुआ तो कम से कम करियेगा ही।
बालक अभी गाँव में है और जब अस्पताल के द्वारा बतायी गयी फीस जमा हो जायेगी तो उसे एडमिट करने के लिये दिल्ली लाया जायेगा।
के एस रावत, नई दिल्ली: 09818007079
मास्टर आलोक के पिता से इस नंबर पर बात करके बाकि के मालूमात पता कर सकते हैं: +(91) 9761413633
अगर आप मास्टर आलोक की आपरेशन का खर्च जुटाने में मदद करना चाहते हैं या अपनी तरफ से कुछ देना चाहते हैं तो प्लीज टिप्पणी के द्वारा बतायें जिससे आपको बाकि कि डिटेल टाईम से उपलब्ध करायी जा सके और आप चाहें तो सीधे ऊपर दिये गये नंबर पर बात करके भी मदद की पेशकश कर सकते हैं।
Let’s hope for the best
Update from KS Rawat:
Just to update you all on donations received/yet to receive for Master Alok. As informed earlier, patient is still at his village and as per his father; he will be brought and admitted here in Delhi (Apollo Hospital) once the estimate given by the Hospital is arranged. Hopefully, we will manage to collect the needed amount by 20th May, 2008.
For your kind information, till now, on the subject matter, PG Group has received/yet to receive the following amount in the PG Group’s bank A/C:
1. PG Group Trust, Rs.10,000/- Rcvd
2. Mr. Arun Kavtiyal, Rs. 500/- Rcvd
3. Mr. Manjeet Singh, Rs. 1000/- Rcvd
4. Unknown Person, Rs. 500/- Rcvd
5. Mr. Harender Patwal, Rs. 500/- Rcvd
6. Mr. Anil Nayal, Rs. 500/- Transferred but yet to receive
7. Nautiyal Family from US (Devesh Nautiyal) vides Standard Chartered Bank Cheque No. 159619 dtd. 6/5/08, Rs. 5000/- Cheque received
8. Mr. Manoj Kukreti, Gurgaon vide Andhra Bank Cheque No. 598645 dtd. 2/5/08, Rs. 5000/- Cheque received
9. Satyeshwar Gaur, Bangalore, Rs. 500/- Yet to receive
10. Mrs. Lalita Juyal, Noida, Rs. 500/- Yet to receive
11. Mr. Shashi Chamoli, Noida, Rs.500/- Cheque sent, yet to receive
12. Mrs. Sunita Kathait – PG Group Trustee again, Rs.500/- Yet to receive
13. Mr. Ramesh Patwal, USA, Rs.10000/- DD sent, yet to receive
14. Mr. Balbir Singh Rawat, Rs.1000/- Cheque sent, yet to receive
15. Mr. Vijay Chaturvedi, Rs.1000/- Yet to receive
Total: Rs.37,000/-
Please note that the following amount has already been transferred by PG Group member Shri Pramod Sharma from Dubai in the patient’s bank account directly. For this, contribution was made by the following:
1. Mr. Pramod Sharma – PG Member, Rs. 1100/-
2. Mr. Mathew, Rs. 470/-
3. Mr. Mahesh Bohra, Rs.1100/-
4. Mr. Usman Shariff, Rs.210/-
5. Mr. Kishore, Rs.210/-
6. Mr. Suryakaant Murthy, Rs.540/-
7. Mr. Nilengen Mukherjee, Rs.210/-
8. Mr. Shine Mathew, Rs.210/-
9. Mr. Arif, Rs.165/-
10. Mr. Devender Singh Rawat, Rs.540/- Total = Rs.4600/- given to the patient directly.
We are not counting this amount in the above as family is already utilizing this fund for the patient’s medicines. Thank you Sharma ji. We are also expecting the following amount from:
1. Mr. Sharma – Businessman from Delhi, Rs. 2,000/-
2. Mr. J. S. Bisht, Rs. 1000/-
Just to inform you that the hospital authorities at Apollo Hospital, Delhi has asked them to deposit Rs.1.25 before conducting the required surgery. Total expenses would be approx. Rs.1.5 Lacs. If some of the donors names are missing from the list, please let me (KS Rawat) know so that your name can be included in the list of donors.
For your kind information, in the morning, I had a detailed discussion on the subject with Ms. Sanjana Raturi, who is arranging donations in US for Master Alok and as per our discussions, now its time that we tell the family that they should plan to come to Delhi and admit Master Alok in the Apollo Hospital. I would be giving him some short of assurance that the funds will be collected/ arranged before 20th May, 2008. Please act accordingly.
Thanks & Regards,
K.S.RAWAT
Moderator & Trustee – PG Group!!
New Delhi / 0918007079
< I will update this section later when donation will be sent out from USA, so far amount suggests that Alok can have his required surgery very soon. - Tarun>
27 Mar
Posted by Tarun as गीत और संगीत, गढवाली संगीत
Tags:gajendra rana, garhwali geet, pauri khal, popular, Pushpa chori paurikhala ki, uttarakhand musicपुष्पा छोरी पौड़ीखाल की, लगदी छें तू बड़ा कमाल की, ये गीत गाया है गजेन्द्र राणा ने। लड़की की तारीफ करते हुए उसे छेड़ने के अंदाज में गाया हुआ गीत है, इसलिये संगीत में भी कुछ कुछ वैसा ही असर देखने को मिलता है। पुराने गीतों में लोक संगीत ढूँढने वालों को ये गीत भले ही पसंद ना आये लेकिन आजकल के युवाओं की जबान पर पुष्पा छोरी की चर्चा कुछ उसी तरह से सुनने को मिलेगी जैसे बबली के मोबाईल और उसकी स्माईल की चर्चा।
कभी हंसी की तारीफ तो कभी चलने की, उम्र भी कुछ ज्यादा नही है पुष्पा छोरी की क्योंकि गीत में तो सत्रह ही बतायी जा रही है। लड़की की तारीफ कमर की तारीफ किये बिना अधूरी है इसलिये गीत लिखने वाले ने लगे हाथ बता दिया की पुष्पा छोरी की कमर भी कमाल की है और उसकी चोटी (यानि बालों को बनायी गयी चुटिया) भी। जो भी है लेकिन इस पुष्पा की चर्चा पट्टी गांव सभी जगह है।
गीत के बोल थोड़ा चलताऊ किस्म के ही हैं लेकिन संगीत और गायन ने इसे थोड़ा प्रभावशाली बनाया है। अब आप खुद ही ये गीत सुनिये और फैसला कीजिये
(सुनने के लिये प्ले के साईन पर डबल क्लिक कीजिये)
डिस्क्लेमर:उत्तरांचल में पोस्ट होने और बजने वाले गीत सिर्फ कुमाँऊ और गढवाल के संगीत को बढावा देने के लिये विज्ञापन मात्र ही हैं, ये कहीं से भी असली सीडी और कैसेट का विकल्प नही है। पसंद आने पर कृप्या असली कैसेट और सीडी ही खरीदें।
काम की अतिव्यवस्ता के चलते पिथौरागढ़ की श्रृंखला को थोड़ा ब्रेक दिया है, लेकिन जल्दी ही उसे आगे फिर से बढ़ाया जायेगा।
20 Mar
Posted by Tarun as त्यौहार, कुमाऊँनी संगीत, विडियो
Tags:bali bedna, kumaoni holi geet, uttarakhand, videoवैसे तो होली आने वाली है लेकिन हमने अभी पिछले शनिवार एक बार तो होली मना ही ली है। इस बार पहली बार यहाँ अमेरिका में हमें भी बैठकी होली में बैठकर होली मनाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बचपन की सारी यादें ताजा हो गयी, थोड़ा अफसोस रहेगा कि खड़ी होली का मजा नही ले पाये।
सालों से जिन होली के गीतों को इंटरनेट पर ढूँढ रहा था वो भी इस बैठकी होली में हमें मिल गये, पहले शनिवार को इन्हें वहाँ गाया तो सोचा क्यों ना अब आप लोगों के साथ बाँटा जाय। वैसे तो बहुत सारी होलियां थीं लेकिन हम उनमें से कुछ ही यहाँ दे रहे हैं।
कुमाँऊ में हो या वहाँ से बाहर होलियार होली की शुरूवात ज्यादातर जिस होली से करते हैं वो है - “सिद्धि को दाता, विघ्न विनाशन, होली खेलें गिरिजापति नंदन“, इसलिये हमने भी पहले इसी का जिक्र कर दिया। चूँकि वक्त की कमी थी इसलिये हमने ज्यादा होलियां तो नही गायीं लेकिन जो गायीं पहले वो बता देता हूँ।
वैसे तो आजकल यमुना इतनी गहरी नही रह गयी है लेकिन जब ये होली लिखी गयी होगी तब जरूर रही होगी -
जल कैसे भरूं जमुना गहरी -२
ठाडी भरूं राजा राम जी देखें
बैठी भरूं भीजे चुनरी
जल कैसे…
धीरे चलूं घर सास बुरी है
धमकि चलूं छलके गगरी
जल कैसे…
गोदी में बालक सिर पर गागर
परवत से उतरी गोरी
जल कैसे…
शुरूआत में गाने वाले हम बहुत कम थे इसलिये हम लोगों ने महिला होलियारों (नेताओं के महिला वोटरों को रिझाने वाले अंदाज में) को रिझाने के लिये शुरू किया -
रंग में होली कैसे खेलूं री मैं सांवरियाँ के संग….
अबीर उडता गुलाल उडता, उडते सातों रंग
भर पिचकारी सनमुख मारी, अंखियाँ हो गयी बंद…
तबला बाजे, सारंगी बाजे, और बाजे मृदंग
कान्हा जी की बांसुरी बाजे, राधा जी के संग…
रंग में होली कैसे खेलूं री मैं सांवरियाँ के संग….
इसका फायदा भी देखने में आया, होलियारों की संख्या बढ़ने लगी उसके बाद एक और होली गायी थी जो अभी याद नही आ रही और उस होली की कॉपी लाना भी मैं भूल गया। लेकिन वो शुरू हाँ हाँ हाँ से होती थी। अब हाँ हाँ से शुरू होने वाली तो काफी होलियां हैं, दो मैं बता देता हूँ अगर आप को कोई और याद हो तो बतायें। ये दो है -
1. हाँ हाँ हाँ, छैला खेलो ना होरी
2. हाँ हाँ हाँ मोहन गिरधारी, हो-हो-हो मोहन गिरधारी,
ओ ऐसो अनाड़ी चुनर गयो फाडी, हंसी-हंसी दे गयो गारी
फिर रंग में होली कैसे खेलूँगी वाली होली दोबारा गाई गयी वैसे ही जैसे किसी किसी फिल्म में एक ही गाना पहले पुरूष आवाज में होता है फिर महिला गायिका की आवाज में। अब चूँकि हम सब लोग इधर-उधर से हांक कर लाये गये थे इसलिये शुरू शुरू में हमारे रंभाने के स्वर सुर और ताल में थोड़ा बेताला हो रहे थे। लेकिन फिर बुजुर्ग होलियारों के स्टेज संभालने के बाद थोड़ा लय बना और जोगी ने दरवाजे में दस्तक दी -
जोगी आयो शहर में व्योपारी -२
अहा, इस व्योपारी को भूख बहुत है,
पुरिया पकै दे नथ-वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को प्यास बहुत है,
पनिया-पिला दे नथ वाली,
जोगी आयो शहर में व्योपारी।
अहा, इस व्योपारी को नींद बहुत है,
पलंग बिछाये नथ वाली
जोगी आयो शहर में व्योपारी -२
आजकल मार्केट में वैसे ही मंदी का दौर चल रहा है तो इस व्यापारी को भी नही पूछा गया और हम सारे होलियारों को हो हो, हो नगरे, होली है कहते हुए स्टेज से रूखसत होना पड़ा। क्योंकि सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नंबर जो था। बरहाल स्टेज के बाद हमने एक दो लोगों से अफसोस जताया कि बेस्ट होली तो हमने गायी ही नही, दरअसल ये होली बेस्ट, सिर्फ लड़को के बीच ही मानी जाती है। वो होली है -
झनकारो झनकारो झनकारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो - २
तुम हो बृज की सुन्दर गोरी, मैं मथुरा को मतवारो
चुंदरि चादर सभी रंगे हैं, फागुन ऐसे रखवारो।
गौरी प्यारो…
सब सखिया मिल खेल रहे हैं, दिलवर को दिल है न्यारो
गौरी प्यारो…
अब के फागुन अर्ज करत हूँ, दिल कर दे मतवारो
गौरी प्यारो…
भृज मण्डल सब धूम मची है, खेलत सखिया सब मारो
लपटी झपटी वो बैंया मरोरे, मारे मोहन पिचकारी
गौरी प्यारो…
घूंघट खोल गुलाल मलत है, बंज करे वो बंजारो
गौरी प्यारो लगो तेरो झनकारो -२
हमारी रंग लगी हुई होली गाती तस्वीरें और क्लिप अब तक सहारा और TV एशिया में दिखायी जा चुकी होंगी। अब कुछ उन होली की बता देते हैं जो पसंदीदा होलियों में से हैं और जिन्हें हम गाने से रह गये -
बलमा घर आयो फागुन में -२
जबसे पिया परदेश सिधारे,
आम लगावे बागन में, बलमा घर…
चैत मास में वन फल पाके,
आम जी पाके सावन में, बलमा घर…
गऊ को गोबर आंगन लिपायो,
आये पिया में हर्ष भई,
मंगल काज करावन में, बलमा घर…
प्रिय बिन बसन रहे सब मैले,
चोली चादर भिजावन में, बलमा घर…
भोजन पान बानये मन से,
लड्डू पेड़ा लावन में, बलमा घर…
सुन्दर तेल फुलेल लगायो,
स्योनिषश्रृंगार करावन में, बलमा घर…
बसन आभूषण साज सजाये,
लागि रही पहिरावन में, बलमा घर…
एक और मजेदार होली है -
शिव के मन माहि बसे काशी -२
आधी काशी में बामन बनिया,
आधी काशी में सन्यासी, शिव के मन
काही करन को बामन बनिया,
काही करन को सन्यासी, शिव के मन…
पूजा करन को बामन बनिया,
सेवा करन को सन्यासी, शिव के मन…
काही को पूजे बामन बनिया,
काही को पूजे सन्यासी, शिव के मन…
देवी को पूजे बामन बनिया,
शिव को पूजे सन्यासी, शिव के मन…
क्या इच्छा पूजे बामन बनिया,
क्या इच्छा पूजे सन्यासी, शिव के मन…
नव सिद्धि पूजे बामन बनिया,
अष्ट सिद्धि पूजे सन्यासी, शिव के मन…
होली के गीतों में ज्यादातर, शिव, राधा-कृष्ण और राम-सीता का उल्लेख भी मिलता है। ऐसी ही एक होली है -
हाँ हाँ जी हाँ, सीता वन में अकेली कैसे रही है
कैसे रही दिन रात, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता रंग महल को छोड़ चली है
वन में कुटिया बनाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता षटरस भोजन छोड चली है
वन में कन्दमूल फल खाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता तेल फुलेल को छोडि चली है
वन में धूल रमाई, सीता वन में…
हाँ हाँ जी हाँ, सीता कंदकारो छोड़ चली है
कंटक चरण चलाई, सीता वन में
कैसे रही दिन रात, सीता वन में।
अब ये होली तो निपट ही गयी है, होली के गीत अभी भी बहुत बाकि हैं इसलिये इन्हें अगली होली के लिये छोड़ देते हैं। अब होली के अवसर पर कुछ शानदार और जानदार विडियो और कुमाऊँनी कविता सुनाते हैं। सबसे पहले देखिये ये क्रियेटिव विडियो, ये उत्तरांचल से संबंधित तो नही है लेकिन होली से है और बहुत अच्छा बनाया गया है -
अब सुनिये ओ परूवा बोजू वाले शेरदा अनपढ़ की होली पर ये कुमाऊँनी कविता,
यहाँ देखिये, गिरीश तिवारी गिर्दा कुमाँऊनी होली के बारे मे बता रहे हैं -
कुमाँऊनी फिल्म “बली बेदना” का ये होली गीत बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय है, इस पोस्ट को लिखते लिखते हम ये ५-६ बार सुन चुके हैं (गीत के बोल हिंदी में हैं इसलिये सभी को समझ आ जायेंगे), हरि खेल रहे हैं होरी, देवा तेरे द्वारे में (जिसे संजू ने कुछ दिनों पहले भेजा था) -
कुमाँऊ में होली की इक बैठक में ये देखिये एक छोटा सा बालक (३-४ साल से ज्यादा नही दिखता) कितना बढ़िया तबला बजा रहा है।
और आखिरी गीत है हेम पंत और दोस्तों का होली पे खड़ी होली अंदाज में गाया हुआ ये गीत (जिसे हेम ने आज ही भेजा) -
10 Mar
Posted by Tarun as कुमाऊँ, इतिहास
Tags:pithoragarh history, prithvi raj chauhan, uttarakhand, Uttaranchalपिथौरागढ़ का इतिहास
पिथौरागढ़ का इतिहास काफी पुराना है, पुराने समय में पिथौरागढ़ प्रसिद्ध राजपूत राजा पृथ्वी राज चौहान की राजधानी था, जिन्हें राय पिथौरा के नाम से भी जाना जाता था। इन्हीं के नाम पर शायद उस स्थान का नाम पिथौरागढ़ पड़ा हो।
फिर मुस्लिम आक्रमणकारियों से त्रस्त होकर कुछ लोग जान बचाकर (या उनके आक्रमण से बचकर) वहाँ से भागकर यहाँ उत्तराखंड के इस हिस्से की तरफ आ गये। ऐसा माना जाता है कि राजपूत Settlers जब भी कोई नयी जगह बसते थे तो उस जगह का नाम वो ही रखते थे जहाँ से वो आये होते थे, इसलिये चौहान राजपूतों ने अपने उस शहर के नाम पर ही इस नये स्थान का नाम भी पिथौरागढ़ रखा जो कि आज उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण जिला भी है।
सन् १३६४ के बाद से बाकि बची १४वीं शताब्दी में यहाँ पाल वंशजों का राज रहा जो कि पिथौरागढ़ से अस्कोट तक फैला हुआ था। ऐसा देखने (पढ़ने) में आता है कि पाल राजवंश को नेपाल से आये ब्रहम राजवंश ने यहाँ से उखाड़ फेका था लेकिन फिर क्षेत्रपाल के साथ हुई लड़ाई के दौरान इनके राजा ज्ञानचंद की मृत्यु की वजह से यहाँ एक बार फिर पाल वंशजों का आधिपत्य हो गया।
१६वीं शताब्दी में एक बार फिर चंद राजवंश ने पाल राजवंश को उखाड़ के यहाँ अपना आधिपत्य स्थापित कर लिया और १७९० में एक पहाडी के ऊपर नये किले का निर्माण किया जहाँ आजकल गर्ल्स इंटर कालेज है।
उसके बाद ब्रितानी (British) साम्राज्य के दौरान ये अल्मोडा़ जिले की एक तहसील रहा फिर १९६० में पिथौरागढ को अलग से एक जिला बना दिया गया। अंग्रेजों के शासन के दौरान ही वहाँ आर्मी कैंट (वड्डा में), चर्च, मिशन स्कूल (सिल्थाम के पास की पहाड़ी में, जहाँ हमने भी २ साल पढ़ाई की थी) और ईसाई धर्म का भी फैलाव (विकसित) हुआ।
आगे जारी…….अगली बार पिथौरागढ़ के मौसम की बात करके इस श्रृंखला को आगे बढ़ायेंगे
[पिछली कड़ी - भूमिका]
03 Mar
Posted by Tarun as कुमाऊँ, पर्यटन
Tags:hill station, mini kashmir, pithoragarh, tourism, uttarakhandपिथौरागढ़, यानि प्रकृति की गोद में बसा उत्तरांचल (उत्तराखंड) राज्य का एक बेहद रमणीक शहर, वो शहर जो मिनी काश्मीर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग १० वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली सोर घाटी में बसा ये शहर, चंडाक, ध्वज, थल केदार और कुंदर पहाड़ियों के मध्य घिरा हुआ है। कैमरे में कैद करने लायक प्राकृतिक सुंदरता से भरा होने की वजह से ही शायद इस शहर को छोटा काश्मीर भी कहते हैं।
अगले कुछ लेखों में हम इसी शहर के बारे में बतायेंगे। यही वो शहर है जहाँ मनायी गयी होली हमें रह रहकर याद आती है। इसी शहर से हमने क्रिकेट, फुटबाल और बास्केटबॉल जैसे खेल सीखे। सिलथाम की सड़कों में भुट्टा खाने के बाद बचे उसके डंडे से फुटबाल खेलना अभी भी याद है। याद है डीएवी (शायद ये ही स्कूल का नाम था) के मैदान में बास्केटबॉल और फुटबाल सीखने के लिये जाना, स्टेडियम में बैठकर फुटबाल मैच का लुत्फ उठाना। खेतों से फसल कटने के बाद उस पर अपने विकिट गाड़ क्रिकेट खेलना।
मिशन स्कूल की पहाड़ी के पीछे जल्दी छुट्टी होने पर क्रिकेट खेलना, टांट बिछाकर रामलीला देखना, जेल वाले किले की दीवारों में चढ़ना, चंडाक का मैला, वो खड़िया की खान। गर्मियों में भाटकोट की तरफ घूमने निकल जाना, वड्डा में जाकर आर्मी थियेटर में सिनेमा देखना। नये बाजार की चौड़ी (तब तो ऐसी ही लगती थी) सड़कों में घूमना, पुनेठा पुस्तक भंडार में किताबें खरीदने के लिये लाईन लगाना। यादों का क्या एक बार जो आनी शुरू हो तो आती ही जाती है - “यादें याद आती हैं, बातें याद आती हैं”।
ऐसी ही यादें हो सकता है आप में से किसी के साथ भी जुड़ी हों, कोई ऐसी जगह जिससे ये इंटरनेट अभी तक अनजान हो, वो आपका कोई सुंदर सा गांव जिसके बारे में आपके सिवा कोई और नही जानता। अगर आप के साथ भी इस शहर को लेकर कोई ऐसी याद जुड़ी हो तो हमें लिख भेजिये या टिप्पणी के द्वारा हमें बता दें। जिसे हम अपनी पिथौरागढ़ की इस श्रृंखला में शामिल कर सकें। पिथौरागढ़ की वादियों या इस शहर की तस्वीरें भी अगर आपके पास हैं और वो भी आप हमारे साथ बांट सकें तो ये सोने पर सुहागा वाली बात होगी।
आगे जारी…… पिथौरागढ़ का इतिहास
, धन्यवाद।
Uttaranchal is the weblog of Tarun, he lived and grown up in this beautiful state mainly in Almora, Pithoragarh, Nainital, Pauri, Uttarkashi, Tehri, Chamoli and Dehradun. He created this weblog to spread information about this state. Why this weblog in Hindi? Because there are very few sites about Uttaranchal in hindi.