Archive for shayari
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कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें -
शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम
चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम।
कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा सुनाता है
‘तरूण’ ये [...]
आप सोच में तो नही पड़ गये कि ये क्या बला हुई, ज्यादा मत सोचिये पहले मैं आपको ये बताऊँगा ये क्या है और उसके बाद जेनेरिक शेर भी सुनाऊँगा। आपने ये शायद ही कभी पहले सुना हो क्योंकि अभी अभी हमने ये बिल्कुल ताजा अपने दिमाग की भट्टी से निकाला है, शब्द तो पुराना [...]