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रस्सी जल गयी पर बल नही गया

पाकिस्तान के ऊपर ये कहावत बिल्कुल ठीक बैठती है, हाल ही में आयी बाढ़ ने पाकिस्तान के एक हिस्से का जन-जीवन तहस नहस कर दिया है। तकदीर के मारे उन लोगों को पाकिस्तान सरकार उतनी तेजी से जरूरत के हिसाब से राहत मुहया नही करा पा रही है, इसके बाद भी उस देश के हुकुमरानों [...]

हम लोगों ने जगह जगह थूकना छोड़ जूता फेंकना शुरू कर दिया क्या?

एक ईराकी पत्रकार ने जूता क्या फेंका भारत में जूते यूँ फेंके जाने लगे जैसे कुछ समय पहले डाक्टरों (अस्पताल या मेडिकल स्कूलों) की हड़ताल हुआ करती थी। अगर ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन ऐसा आयेगा जब पब्लिक चाहे लंच बॉक्स रखना भूल जाये लेकिन बैग में एक जोड़ी जूता रखना नही भूलेगी। [...]

डिवाइड एंड रूल

आजादी से पहले अंग्रेजों ने इसी तरह राज किया, अब आजादी के बाद भारतीय नेता इसी तरह राज कर रहे हैं। कोई धर्म के नाम पर, कोई जाति के नाम पर और कोई भाषा के नाम पर बाँट कर शासन करना चाहता है। अंग्रेजों से अब कम से कम एक शिकायत तो कम हो जानी [...]

[ More ] November 3rd, 2008 | 10 Comments | Posted in Micro Post |

आम आदमी ले तो घूस नेता ले तो दान

मेरे भारत महान को अब ये जो घूस है इसे कानून की शक्ल दे देनी चाहिये, आखिर कब तक बेचारा आम आदमी यूँ पिसता रहेगा। अगर ये कानून की शक्ल ले ले तो भ्रष्टाचार भी काफी हद तक कम हो जायेगा क्योंकि सब कुछ कानून के दायरे में जो होगा। साथ ही दूसरा फायदा ये [...]

ईर कहे भारत बंद, बीर कहे भारत बंद और फत्ते कहे…

अब फत्ते क्या कहे ये जानने के लिये आपको ये पोस्ट तो पढ़नी पड़ेगी, आप यह भी सोच रहे होंगे कि भला ये ईर, बीर और फत्ते हैं कौन। अंग्रेजी की एक कहावत में तीन नाम आते हैं- टॉम, डिक और हैरी (उदाहरण के लिये If every Tom, Dick and Harry knows about something, then [...]

[ More ] July 13th, 2008 | 3 Comments | Posted in खालीपीली |

जादू है ना जोर है कैसी माया है

१५० साल पहले भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई का बिगुल उत्तर प्रदेश में ही बजा था और ऐसा ही एक बिगुल आज फिर बजा जब मायावती की माया कब लोगों के सर चढ़ वोटों के रूप में बदल गयी किसी को पता ही नही चला। जाहिर सी बात है मायावती जो कि बहुजन समाजवादी पार्टी [...]

[ More ] May 12th, 2007 | 3 Comments | Posted in राजनीति |

वाह! इनका क्या कहना

अभी अभी ये खबर पढ‌ी, वैसे कठोर सिंह से ज्यादा उम्मीद तो ना कभी थी ना कभी होगी लेकिन गद्दी के लिये कोई यहाँ तक जा सकता है पता ना था। नोएडा विजिट करने वाला कोई भी मुख्यमंत्री दुबारा मुख्यमंत्री नही बना आंकडे यही कहते हैं इसलिये कठोर सिंह ने नोएडा से किनारा करना ही [...]

[ More ] January 4th, 2007 | 12 Comments | Posted in राजनीति |