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पुस्तक चर्चाः बिखरे मोती – टूट गयी है माला मोती बिखर गये

कनाडा के एक कस्बे से पास के बड़े शहर को जाती ट्रेन में काला चश्मा लगाये, भरे गदराये जिस्म का एक आदमी बैचेनी से इधर उधर कुछ ढूँढ रहा था। अचानक उसकी नजर थोड़ा दूर पर बैठी मल्टी प्रोसेसिंग की जीती जागती मिसाल एक युवती पर पड़ी, जो गरदन एक तरफ झुका सिर और कंधे [...]

होली पर लिखी एक कविता और एक विडियो

हमेशा की तरह इस बार भी होली आ ही गयी, ये होली भी ना, कभी आना नही भूलती, देखिये तो हर तरफ कैसे कैसे रंग बिखेरे हुए हैं इस ने। आप लोग तो होली होली के दिन ही मनायेंगे, हम तो हर त्यौहार की तरह इसे भी यहाँ वीकेंड में ही मनायेंगे। निठल्ला चिंतन पढने [...]

प्रेम कविता

जिन्हें अब तक नही मालूम उन्हें बता दें कि यदा कदा हम भी कविता जैसे शब्द कागज में उड़ेल लेते हैं। ये अलग बात है कि उसमें प्रेम या श्रृंगार रस नही के बराबर पाया जाता है। लेकिन ऐसा नही है कि हम शब्दों को प्रेमरस या श्रृंगार रस की चासनी में भिगोने का प्रयास [...]

[ More ] August 27th, 2008 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

वो लाश अभी तक रोती है

सोचा था इन बम धमाकों पर अभी कुछ नही लिखूँगा, जाहिर था अंदर का आक्रोश शब्दों को सही शक्ल नही लेने देगा लेकिन फिर……………। अपने को इस आदमी की जगह रखकर पढ़के देखिये – वो बीस हजार कमाता था, घर पर राशन पानी लाता था। जैसे तैसे भी करके वो, घर का खर्च चलाता था। [...]

[ More ] July 29th, 2008 | 15 Comments | Posted in शायरी और गजल |

प्रेम कविता – एक बार फिर

प्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी। कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले। आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन [...]

[ More ] April 8th, 2007 | 4 Comments | Posted in खालीपीली |