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ढोल ज्यादा शोर करता है या मीडिया

मेरा मानना है कि वाधयंत्रों (music instruments) में ढोल (या नगाड़ा) सबसे ज्यादा बेसुरा यंत्र है, इसके दो कारण हैं – एक, हल्के सी थाप देने में भी ये जोर की आवाज करता है और दूसरा हर कोई ऐरा-गैरा इस बजाता हुआ मिल जाता है। हो सकता है आपको मेरी बात से इत्तेफाक ना हो [...]

एक मीडिया, एक गाली, एक ब्लोगर और बचेखुचे भारतीय

कुछ लिखने से पहले ही बता दूँ मेरी समझ से ‘बचेखुचे’ कहना गाली में नही आता, अगर आता है तो बता दें मेरा भी थोड़ा ज्ञान बढ़ जायेगा। अभी पिछले कुछ दिनों में ही पत्रकार बनाम ब्लोगर प्रकरण पढ़ने में आया। कुछ लोग खासकर मीडिया वाले पत्रकार (बरखा दत्त) का पक्ष ले रहे हैं, वहीं [...]

आदमी को क्या चाहिये

क्या आप जानते हैं कि एक आदमी को क्या चाहिये? अगर नही और जानना चाहते हैं तो हमारी शब्दों के साथ खेलने की कोशिश पर नजर दौड़ाईये। आदमी को चाहिये चबाने को दाँत और पेट में आँत नेता को चाहिये कुछ घूँसे और संसद में चलाने को लात। आदमी को चाहिये दो वक्त की रोटी [...]

[ More ] October 24th, 2008 | 14 Comments | Posted in जरा हट के |

काश हम या हमारे कोई मित्र मीडिया में होते

कभी कभी ये मेरे दिल में ख्याल आता है कि काश हम या हमारे कोई मित्र मीडिया में होते। लाल रंग देखते ही जिस तरह किसी सांड में एनर्जी का उबाल आता है कुछ कुछ वैसा ही उबाल कभी कभी हमारे दिल में आता है जब भी ये किसी हिन्दी चिट्ठाजगत की खबर पर उछलते [...]

ईर बीर फत्ते

बहुत पहले ये गीत सुना था तब समझ नही पाये थे कि ये ईर बीर फत्ते हैं कौन? लेकिन लगता है अब समझ आ रहा है कि अरे ये तो अपने मीडिया वाले हैं। पहले थोड़ा इस गाने के बारे में बता दूँ, अमिताभ बच्चन का गाया हुआ ये शायद उनका पहला नान-फिल्मी एलबम गीत [...]