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मुक्केबाज हो तो मेरी जैसी

भारत में क्रिकेट के अलावा बाकि खेलों की दशा दिनप्रतिदिन दयनीय होती जा रही है, ऐसे में १-२ प्रतिभायें हैं जो आशा की किरण बन कर हल्की सी उम्मीद को जिंदा रखती है। इन्हीं में से एक हैं महिला मुक्केबाज एम सी मेरी कॉम (M C Mary Kom) जिन्होंने विश्व मुक्केबाजी में लगातार पाँचवी बार [...]

[ More ] September 20th, 2010 | 2 Comments | Posted in sports, खेल खिलाड़ी |

भारतीय संस्कृति भी कोई दूध की धुली नही है

मैने अपनी पिछली पोस्ट में एक टीन प्रीगनेंसी का जिक्र किया था जो कि हमारे समाज (क्या पश्चिम क्या पूर्व) की विफलता का ही शायद नतीजा है। उसमें शास्त्रीजी की एक टिप्पणी आयी थी, जिसे पढ़कर ही मुझे कहना पड़ रहा है भारतीय संस्कृति (या सभ्यता या समाज) भी कोई दूध की धुली नही है। [...]