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रस्सी जल गयी पर बल नही गया

पाकिस्तान के ऊपर ये कहावत बिल्कुल ठीक बैठती है, हाल ही में आयी बाढ़ ने पाकिस्तान के एक हिस्से का जन-जीवन तहस नहस कर दिया है। तकदीर के मारे उन लोगों को पाकिस्तान सरकार उतनी तेजी से जरूरत के हिसाब से राहत मुहया नही करा पा रही है, इसके बाद भी उस देश के हुकुमरानों [...]

चंदन विष व्यापत नही, लिपटे रहत भुजंग

एक शक्की आदमी था, हर वक्त भ्रमित रहता, लटकती रस्सी को साँप समझकर हमेशा डरा रहता। उसी दुनिया में एक दूसरा आदमी भी था जो आज भी यही समझता था कि कोई अगर तुम्हारे एक गाल में थप्पड़ मारे तो उसके आगे दूसरा गाल कर दो। मैंने आज के दिन दो अलग अलग अलग खबरें [...]

[ More ] August 18th, 2010 | 5 Comments | Posted in खालीपीली |

आज पंद्रह अगस्त है

आज पंद्रह अगस्त यानि भारत की स्वतंत्रता की सालगिरह के मौके पर पंद्रह अगस्त पर लिखी कुछ पंक्तियाँ राष्ट्र को समर्पित है। सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। आज पंद्रह अगस्त है वो दिन जब हमने पहली बार खुली हवा में साँस ली थी वो दिन जिसकी खातिर कई जानें गई थी [...]

[ More ] August 15th, 2009 | 13 Comments | Posted in भारत, शायरी और गजल |

भारतीय संस्कृति भी कोई दूध की धुली नही है

मैने अपनी पिछली पोस्ट में एक टीन प्रीगनेंसी का जिक्र किया था जो कि हमारे समाज (क्या पश्चिम क्या पूर्व) की विफलता का ही शायद नतीजा है। उसमें शास्त्रीजी की एक टिप्पणी आयी थी, जिसे पढ़कर ही मुझे कहना पड़ रहा है भारतीय संस्कृति (या सभ्यता या समाज) भी कोई दूध की धुली नही है। [...]

एहसानफरामोश और अपराधलिप्त नेताओं के देश से वापसी

सठिया चुके दिमाग से उलूल-जुलूल संभावनायें तलाशते अंतुले और मौकापरस्त दलबदलू नेता दिग्विजय सिंह सरीखे नेताओं की जमात वाले देश से बुश को पुश करते ओबामा की रट लगाने वाले देश में हमारी सकुशल वापसी हो गयी है। ये भारत अब वो भारत ना रहा, यहाँ “सच्चाई का बोलबाला, झूठे का मुँह काला” वाली कहावत [...]

[ More ] January 1st, 2009 | 12 Comments | Posted in राजनीति |

एक और दिन एक और विस्फोट

इस पोस्ट से किसी भी तरह की शालीनता और सयंम की उम्मीद ना करें। सपने में भी गैर हिन्दुओं के धार्मिक आकाओं को छुने की हिम्मत ना कर सकने वाली सरकार, उसकी पुलिस और रिपोर्टर जब एक साध्वी को मारमार कर ये कबुलवाने में तुली थी कि वो आतंकवादी है। ठीक उसी समय ही शायद [...]

[ More ] November 27th, 2008 | 24 Comments | Posted in भारत |

बम धमाकों पर निठल्लिकाएँ

मैं कोई साहित्यिक नही इसलिये शब्दों के फेर में ज्यादा पड़े बिना मैने ये शब्द ईजाद कर लिया। कम लाईनों में कविता करने के एक तरीके को शायद क्षणिकाएँ कहते हैं। अगर वैसे ही कम लाईनों में कुछ गद्ध लिखा जाये तो उसे क्या कहेंगे समझ नही आया इसलिये हमने नाम दिया निठल्लिकाएँ। आइये बम [...]

[ More ] October 3rd, 2008 | 14 Comments | Posted in जरा हट के |

शबाना जी, तेरा मेरा दर्द ना जाने कोई

शबाना आजमी और इनके हमनिवाला और हमप्याला शौहर जावेद अख्तर किसी परिचय के मोहताज नही, ना ही इनके साहेबजादे लख्ते-जिगर फरहान अख्तर को इसकी जरूरत है। इसलिये बजाय इनका परिचय देने के सीधे मुदद्दे पर आते हैं। शबाना आजमी पूर्व सांसद तो हैं ही, साथ में अच्छी अदाकारा भी हैं और समाज सेवी भी, ये [...]

भस्मासुर को मिला वरदान है धर्मनिरपेक्षता

आप लोगों ने भस्मासुर का नाम तो सुना होगा अगर नही तो मैं बता दूँ भस्मासुर एक राक्षस था जिसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिये कठोर तपस्या की। शिव के प्रसन्न होने पर उसने वरदान माँगा कि वो यानि भस्मासुर जिसके सिर पर भी हाथ रखे वो भस्म हो जाये। शिव तो ठेरे [...]