Archive for hindu
You are browsing the archives of hindu.
You are browsing the archives of hindu.
गुलाम अली की एक गजल है, “दिल में एक लहर सी उठी है अभी, कोई ताजा हवा चली है अभी” अगर इसी की तर्ज पर नारद को देखते हुए कुछ कहूँ तो वो कुछ यूँ होगा - “नारद में हिट बड़े हैं अभी, कोई धर्म की बहस चली है अभी”। उल्टे प्रदेश में कोई फरमान [...]
आज दिन में नारद चैक किया तो देखा कि “आईना मोहल्ले के साथ बंद होने की इजाजत मांगे” गोया कह रहा हो कि “हम तुम एक कमरे में बंद हों और चाभी खो जाय”। हमें जगदीश भाई कम से कम अपने से तो ज्यादा समझदार लगते थे इसलिये सोचा हो सकता है कि होली की [...]