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अध्याय १: भयानक रातें
रात का अंधेरा चारों ओर फैला हुआ था, रात के सन्नाटे को चीरती किसी उल्लू की आवाज कभी-कभी सुनायी पड़ रही थी। दूर दूर तक कुछ नजर नही आ रहा था, अशोक के कदम बड़ी तेजी से घर की तरफ बढ़ रहे थे। अचानक आसमान में बड़ी तेजी से बिजली कड़की थी, [...]
गतांक से आगे…..
क्या करे क्या न करे मुगेरी की समझ नही आ रहा था, उसे यूँ बैठे हुए काफी देर हो गयी। अब तक रात का धुंधलका भी छाने लगा था। उसके पेट मे भूख से चूहे दौड़ने लगे, पास पर ही एक खाने का ठेली वाला नजर आया तो मुंगेरी उसी ओर चल दिया।
पेट [...]