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सिमटती हिंदी ब्लोगिंग का बढ़ना जारी है

आह वाह से उठकर पढ‌़ने वालों को हो सकता है इस पोस्ट के टाईटिल में विरोधाभास नजर आये, इसलिये आगे कुछ कहने से पहले टाईटिल के फर्क को जान लें। बढ़ने और सिमटने में वो ही फर्क है जो किसी भी ग्राफ के x-Axis और y-Axis में यानि बढ़ना vertically होता है और सिमटना horizontally। [...]

एक टिप्पणी गलत पड़ी थी कुछ नये हिंदी ब्लोगस में

एक परेशान दिल से निकली आह की कराह जानकर बतायें आप किस जमात में शामिल है, सताये हुए की या सताने वाले की। आजकल जिंदगी बहुत व्यस्त चल रही है, कई कई दिनों तक ब्लोगिंग में उपयोग लायी ई-मेल चैक नही हो पाती और आज जब थोड़ा फुरसत में चैक की तो देखकर दिल से [...]

[ More ] June 5th, 2009 | 27 Comments | Posted in बस यूँ ही |

ब्लोगिंग के 5 सालः कुछ फायदे कुछ नुकसान

विगत १५ फरवरी २००९ को ब्लोगिंग करते अपने को ५ साल पूरे हो गये, मंदी के इस दौर में ये बताने की रफ्तार भी कितनी मंद रही ये इसी से दिखता है कि हम ये बात आज ४ मार्च को बता रहे हैं। सोचा आज क्यों ना थोड़ा पीछे मुड़ कर देखा जाये और जानने [...]

[ More ] March 4th, 2009 | 44 Comments | Posted in Announcement |

व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर टिप्पणी

आजकल व्यावसायिक चिट्ठाकारी पर बहस चालू है, बहुतों ने बहुत कुछ लिखा, विवेचन किया तो मैंने सोचा बजाय हर आलेख पर टिप्पणी करने के क्यों ना उस टिप्पणी को पोस्ट की शक्ल दे दी जाय। व्यावसायिकता की बातें तो बहुतों ने पहले ही कर दी इसलिये मैने सोचा कि क्यों ना चिट्ठाकारों (हिन्दी और अंग्रेजी [...]

हिन्दी ब्लोगिंग वर्जीनिया रेडियो पर

सुनिये वर्जीनिया रेडियो पर अनुराग द्वारा आयोजित हिन्दी ब्लोगिंग वार्ता में देबाशीष, ईस्वामी, शुकुल जी और अनुराग के बीच हुई बातचीत। बीच में हम ने भी ट्राई मारा था अपनी टांग अडाने का लेकिन कामयाब नही हो पाये तो जिस दौरान हम स्काईप पर कनेक्टेड थे उतने समय की बातचीत रिकार्ड नही कर पाये, अन्यथा [...]

[ More ] January 27th, 2007 | 21 Comments | Posted in जरा हट के |