Archive for gazal
You are browsing the archives of gazal.
You are browsing the archives of gazal.
मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलाम अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी - एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ [...]
कबाड़खाने के अशोक दाज्यू ने जब हुसैन भाईयों को सुनाया तो हमारा खोया प्यार जैसे हमें दोबारा मिल गया। इससे पहले आप इधर-उधर की सोचें हम बता दें कि हम संगीत की बात कर रहे हैं। इसलिये आज उन्हीं के पहले ऐलबम की एक खुबसूरत गजल “चल मेरे साथ ही चल, ऐ मेरी जाने गजल” [...]