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वो भांगे की चटनी, वो नौले का पानी

जगजीत सिंह की गायी मशहूर गजल से २-३ लाईनें उधार लेकर अपने बचपन की यादों को इस गीत गजल में समेटने की कोशिश की है। आज ऐसे ही कुछ सफाई कर रहा था तो २-३ साल पहले लिखी ये गजल मुझे मिल गयी। पहाड़ों में बिताये उन अनमोल पलों को समेटने की कोशिश जो अब [...]

[ More ] January 8th, 2009 | 17 Comments | Posted in शायरी और गजल |

चंद शब्द चुनके लाया हूँ

कुछ समय पहले ये लिखा था, इस कलाम की कहानी कुछ वैसी ही है जैसी ‘तिल बना रहे थे, स्याही फैल गयी’ की। मुलाहयजा फरमायें – शेर तुम, गजल तुम, गीत और कविता भी तुम चंद शब्द चुनके लाया था, जाने कहाँ वो हो गये गुम। कोई आंखों पे गुनगुनाता है, कोई मंदिर में जा [...]

[ More ] July 18th, 2008 | 13 Comments | Posted in शायरी और गजल |

माँ सुनाओ मुझे वो कहानी और लब पे आती है दुआ

गीत और संगीत में आज दो ऐसे गीत पेश हैं जो हैं तो जगजीत सिंह के एलबम से लेकिन जिसे उन्होंने नही बल्कि एक बच्ची सिजा रॉय ने गाया है। शायद ही कोई ऐसा होगा जिसे भावविभोर कर देने वाले ये गीत पसंद ना आयें। 1995 में जगजीत सिंह का एक एलबम आया था जिसका [...]

[ More ] July 15th, 2008 | 4 Comments | Posted in गीत संगीत |

एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी

मैं तब अल्मोड़ा में था जब गुलाम अली का ये एलबम निकला था, लाला बाजार में घूमते हुए अक्सर इसकी एक गजल जो सुनायी पड़ती थी, वो थी – एक पगली मेरा नाम जो ले, शरमाये भी, घबराये भी। तब गुलाम अली की गजलें मुझे इतनी पसंद नही थी लेकिन फिर भी ना जाने क्यूँ [...]

[ More ] July 6th, 2008 | 9 Comments | Posted in गीत संगीत |

चल मेरे साथ ही चल, ऐ मेरी जाने गजल

कबाड़खाने के अशोक दाज्यू ने जब हुसैन भाईयों को सुनाया तो हमारा खोया प्यार जैसे हमें दोबारा मिल गया। इससे पहले आप इधर-उधर की सोचें हम बता दें कि हम संगीत की बात कर रहे हैं। इसलिये आज उन्हीं के पहले ऐलबम की एक खुबसूरत गजल “चल मेरे साथ ही चल, ऐ मेरी जाने गजल” [...]

[ More ] June 25th, 2008 | 10 Comments | Posted in गीत संगीत |

प्रेम कविता – एक बार फिर

प्रेम कविता लिखने की, एक दिन हमने भी ठानी लिखने से पहले मन बोला, कहाँ है दिल की रानी। कहाँ है दिल की रानी, जो प्रेम रस को घोले अपना भी दिल कभी, कुछ इलु इलु बोले। आये कोई, हमें भी, जो थोड़ा दर्द दे जाय कवि ना बन पाये ये दिल तो शायर बन [...]

[ More ] April 8th, 2007 | 4 Comments | Posted in खालीपीली |