Archive for संस्‍कृति

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तेरा पानी अमृत, मेरा पानी पानी

ये सारांश कह रहा हूँ उस बात की चर्चा का जो अफगानिस्‍तान की गलियों और पश्‍चिमी देशों के गलियारों के बीच चल रहा है। (आप चाहें तो तेरा को मेरा कर दें और मेरा को तेरा अर्थ नही बदलने वाला) अभी तक अगर नही समझे तो कुछ यहाँ पढ़ोकुछ यहाँ पढ़ो और कुछ यहाँकुछ यहाँ। [...]