Archive for कथा कहानी
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गतांक से आगे…..
क्या करे क्या न करे मुगेरी की समझ नही आ रहा था, उसे यूँ बैठे हुए काफी देर हो गयी। अब तक रात का धुंधलका भी छाने लगा था। उसके पेट मे भूख से चूहे दौड़ने लगे, पास पर ही एक खाने का ठेली वाला नजर आया तो मुंगेरी उसी ओर चल दिया।
पेट [...]
गतांक से आगे…..
मुंगेरी बड़ा खुश था उसने दिल्ली जाने वाली ट्रैन जो पकड़ ली थी। लेकिन अन्दर से एक डर था मन मे, अन्जान शहर और वो कभी अकेला किसी शहर कभी गया भी नही था। एक गाँव से दुसरे गाँव यही एक सफर उसने अकेला किया था, उसमे भी अक्सर कोई यार-दोस्त साथ मे [...]